93rd Birth Anniversary: पढ़ लीजिये, लता मंगेशकर ने मोहम्मद रफी के साथ बंद कर दिया था गायन

By: jhansitimes.com
Dec 24 2017 03:31 pm
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jhansitimes:  24 दिसंबर, 1924 को जन्मे  मोहम्मद रफी की 93वीं बर्थ एनिवर्सरी है |  गूगल ने Mohammed Rafi's 93rd Birthday नाम से डूडल पर जगह दी है. मोहम्मद रफी अपनी गायकी से उस जमाने के सबसे लोकप्रिय गायकों में थे और उतने ही शानदार शख्सियत भी. हालांकि, ईश्वर ने उन्हें ज्यादा समय नहीं दिया और वे 38 साल की उम्र में ही दुनिया से विदा हो गए थे. मोहम्मद रफी का जन्म 24 दिसंबर, 1924 को अमृतसर के पास कोटला सुल्तान सिंह में हुआ था. उनका परिवार लाहौर से अमृतसर आ गया था. रफी के बड़े भाई की नाई की दुकान थी. रफी ज्यादा समय वहीं बिताते थे| 

मोहम्मद रफी के मशहूर के गानों के अलावा उनकी निजी जिंदगी के बारे में बहुत कम ही लोग जानते होंगे। मोहम्मद रफी की दो शादियां हुई थीं और उनकी पहली पत्नी ने उनका साथ छोड़कर चली गई थी।  मोहम्मद रफी की पहली शादी उनकी कजिन बशीरा बानू से उनके पैतृक गांव में हुई थी। यह शादी ज्यादा दिन नहीं चली, क्योंकि बशीरा ने रफी के साथ भारत आने से मना कर दिया। 

बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बंटवारे के समय काफी हिंदू-मुस्लिम दंगे हुए थे और इन दंगों में बशीरा के माता-पिता की मौत हो गई थी। इन दंगों से वह इतनी डर गईं कि उन्होंने भारत में रहने से इनकार कर दिया और वह लाहौर में ही रह गईं जबकि रफी अपने सिंगिंग करियर को जारी रखते हुए मुंबई में ही रहे। 

इस तरह रफी की पहली शादी का अंत हो गया। बाद में, मोहम्मद रफी की दूसरी शादी बिलकिस बानो से हुई थी। पहली पत्नी बशीरा से मोहम्मद रफी के एक बेटे सईद थे जबकि दूसरी पत्नी से उनके चार बच्चे नसरीन, खालिद, परवीन और हामिद हुए। 

मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर की गायकी से जुड़ा एक बड़ा ही मजेदार वाकया है जिसने हिंदी सिनेमा में तहलका मचा दिया था. इसका जिक्र यतींद्र मिश्र ने अपनी किताब 'लता सुरगाथा' में किया है. किताब में यतींद्र ने लता मंगेशकर से रॉयल्टी को लेकर हुए विवाद पर सवाल पूछा तो लता मंगेशकर ने जवाब दिया, "...मैंने प्रस्ताव किया था कि म्युजिक कंपनियों को हमारे गाए हुए गीतों की एवज में उनके रेकॉर्ड की बिक्री पर कुछ लाभ का अंश देना चाहिए. धीरे-धीरे इसने एक बड़े विवाद का रूप लिया और सबसे ज्यादा रफी साहब इस बात के विरोध में थे कि जब हमने एक बार गाने के पैसे ले लिए तो दोबारा से उस पर पैसे मिलने का मतलब क्या है...हालांकि इस लड़ाई में मुकेश भैया, मन्ना डे, तलत महमूद और किशोर दा समर्थन में खड़े थे. सिर्फ आशाजी, रफी साहब और कुछ सिंगर्स को यह बात ठीक नहीं लग रही थी. मुझे लगता है कि रफी साहब को इस पूरे मुद्दे के बारे में ठीक से जानकारी नहीं थी और वे गलतफहमी का शिकार थे...और देखिए उसका नतीजा तो यही हुआ कि ना कि बाद में बहुत सालों तक मैंने रफी साहब के साथ और राज कपूर जी के लिए गायन नहीं किया....लेकिन यह तो बर्म दादा के कारण संभव हुआ. वे ही हमारे बीच में पड़े तब कर हम दोनों ने साथ में गाना शुरू किया." दोनों के बीच संबंध 1967 में जाकर सामान्य हो सके.

आज मोहम्मद रफी के जन्मदिन के मौके पर लता मंगेशकर ने उन्हें याद किया है. लता मंगेशकर ने ट्विटर पर रफी के सुपरहिट गाने 'दिल का फवर..' का वीडियो पोस्ट कर उन्हें नेकदिल और शरीफ इंसान बताया है.


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