अमेरिका को एक भारतीय डॉक्टर दिला रहे हैं नशीली दवाओं से मुक्ति, पढ़े

By: jhansitimes.com
Nov 28 2017 11:10 pm
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(रिपोर्ट- पी के श्रीवास्तव ) नई दिल्ली. पूरी दुनिया में सर्जरी के बाद दर्द को कम करने के लिए टाइलनाल के विविध प्रकार की दवाओं का प्रयोग किया जाता है। इसमें दर्द कम करने वाली कुछ दवाई ओपिआईड्स यानी अफीम से बने हुए होते हैं। इनमें नशीले तत्व पाए जाते हैं, जो दर्द से राहत तो दिलाते हैं, लेकिन लंबे समय के लिए शरीर को काफी नुकसान पहंुचाते हैं। भारतीय मूल के अमेरिकी डाक्टर मधुकर ने नशीले दवाओं से होने वाले नुकसान पर विस्तृत शोध करने के साथ ही इसके विकल्प का रास्ता अपनाया है, जिससे मरीजों को काफी फायदा हो रहा है। उनके कार्य की सराहना अमेरिका सहित पूरी दुनिया में मेडिकल क्षेत्र में हो रही है।

सर्जरी के बाद दर्द को कम करने के लिए टाइलनॉल  और टाइलनॉल  आईड्रोकोडोन (परकोकीट) जैसे कांबिनेशन का प्रयोग किया जाता है। वर्तमान समय में पूरी दुनिया में इसका प्रचुर मात्रा में प्रयोग किया जा रहा है। डाक्टरों और मरीजों की इस पर निर्भरता दिनों दिन बढ़ती जा रही है। इसी को देखते हुए डाक्टर मधुकर रेड्डी कसारला ने इसके प्रयोग से होने वाले नुकसान और विकल्प पर विस्तृत शोध किया है, जिसके परिणाम चैंकाने वाले हैं। उन्होंने ढूंढा कि टाइलनॉल और बाकी दर्द निवारक दवा में कई प्रकार के नशीले तत्व पाए जाते हैं, जो दर्द को कम कर देते हैं। लेकिन, इस दवा के प्रयोग से रोगी अनजाने ही दिन प्रतिदिन नशा का आदि हो जाता है। साथ ही उसे कई प्रकार के लीवर संबंधी रोग भी हो जाते हैं, जैसे टाइलनॉल से एक्यूट लीवर फेल्योर हो सकता है। दुर्भाग्य से दर्द निवारक दवाओं के प्रयोग के कारण हाइपोटेंशन, मानसिक स्थिति में बदलाव और थकान आदि के लक्षण काफी ज्यादा प्रकट होने लगते हैं। इन लक्षणों की पहचान करके जल्दी इलाज नहीं किया जाता है, तो इसका शरीर पर काफी दुष्प्रभाव पड़ता है। डाक्टर मधुकर ने योग व दूसरे वैकल्पिक दवाओं के माध्यम से टाइलनॉल व अन्य दर्द निवारक दवा के प्रयोग को समाप्त कर दिया है।

डाक्टर कसारला के अंड्रायड एप्प माईमेड्स (mymeds.net) से मरीज खुद अपनी दवा के लिस्ट को मेंटेंट कर सकते हैं। दवा खत्म हो जाने पर लिस्ट खुद अपडेट करने से मरीज की सोच में बदलाव आता है, जिससे वह नशीली दवाओं से छुटकारा पाने लगते हैं। और दोबारा मांगते नहीं हैं। डाक्टर कसारला इस व्याहवारिक रणनीति से ओपिओड क्राइसिस में बहुतपूणे योगदान किया है। क्योंकि, यह अमेरिका में राष्ट्रीय आपदा की तरह फैल रहा है।

डाक्टर मधुकर का शोध कार्य विश्वविख्यात अमेरिकी पत्रिका द फिजिशियन विकली में प्रकाशित हुआ। अमेरिका में दर्द व नशीले दवाओं के प्रयोग से होने वाले नुकसान से जुझ रहे अमेरिकी समाज के लिए डाक्टर मधुकर का शोध कार्य काफी उपयोगी है। डाक्टर कसारला वारांगल के ककैत मेडिकल कालेज ( Kakatiya Medical College ) से एमबीबीएस किया है। उसके बाद वह शिकागो चले गए। यहां के मेरी मेडिकल सेंटर से इंटरनल मेडिसिन रेसिडेंसी खतम किया। फिलहाल, डाक्टर कसारकला पेरिओपेरेटिव मेडिसिन के एक्सपर्ट हैं। वह डलास के नजदीक फोर्ट वर्थ पार्कवे सर्जिकल एंड कार्डिवस्कुलर हास्पिटल में प्रेक्टिस करते हैं। 2014 में डाक्टर कसारकला को फिजिशियन आॅफ द ईयर का अवार्ड दिया गया है।


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