बसपाई तानाशाही में एक और इजाफा, इस्तीफा देने वाले तिलक को तीन पहले पार्टी से निकालने का दावा

By: jhansitimes.com
Jan 28 2018 01:16 pm
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झाँसी। बुंदेलखंड में बसपा के आधार स्तम्भ कहे जाने वाले कैडर नेताओं के एक-एक करके पार्टी छोडऩे अथवा संगठन से निकाले जाने के कारण मिशनरी कार्यकर्ताओं में जहां असमंजस्य की स्थिति है, वहीं बहन जी का धन प्रेम व तानाशाही इसे हवा दे रही है। इसका खामियाजा बुंदेलखंड में पार्टी उठा रही है, साथ ही पूरे उत्तर प्रदेश में भी इसका असर साफ तौर पर देखा जा रहा है। इसका ताजा उदाहरण तिलकचंद्र अहिरवार के मामले में देखने को  मिला। जहां तिलकचंद्र अहिरवार स्वयं को अस्वस्थ बताते हुए पार्टी के विभिन्न पदों व सदस्यता से इस्तीफा देने की बात कर रहे हैं, वहीं बसपा जिलाध्यक्ष व बुंदेलखंड प्रभारी उन्हें तीन दिन पूर्व ही पार्टी से निकाले जाने का दावा कर रहे हैं। 

जनपद झाँसी के एक साधारण परिवार में जन्मे तिलकचंद्र अहिरवार ने बहुजन समाज पार्टी में जिलाध्यक्ष से लेकर कई पदों पर काम किया और संगठन को फर्श से अर्श तक पहुंचाया। पार्टी ने भी उन्हें झारखंड, बिहार का प्रभारी, एमएलसी तक बनाया। अब अपनी बीमारी की बात करते हुए तिलकचंद्र अहिरवार ने पार्टी के विभिन्न पदों एवं सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। इसकी जानकारी सुबह लोगों को मीडिया के माध्यम से हुई तो सभी को आश्चर्य हुआ। 

उधर, बसपा जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ अहिरवार ने बुंदेलखंड प्रभारी लालाराम अहिरवार के बयान के आधार पर दावा किया कि पूर्व एमएलसी तिलकचंद्र को तीन दिन पूर्व ही पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त होने के कारण निकाल दिया गया है। अब पार्टी यह भूल गई कि जिस नेता ने दो दिन पूर्व बसपा छोडऩे का दावा किया है, पार्टी उसे तीन दिन पहले ही संगठन से निष्कासित कर रही है। आखिर अपनी साख बचाने के लिए किस हद तक जाएंगे इस संगठन के लोग? 

बहुजन समाज पार्टी के जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ अहिरवार ने प्रेस विज्ञप्ति जारी की है। जिसमें उन्होंने बुंदेलखंड प्रभारी लालाराम अहिरवार के  द्वारा बताया है कि बसपा ने पूर्व एमएलसी तिलकचंद्र अहिरवार को तीन दिन पूर्व ही बसपा से निष्कासित कर दिया गया है। उन पर पार्टी विरोधी गतिविधियों, पार्टी मेम्बरशिप में हेराफेरी करने, मेम्बरशिप जमा न करने, बिहार प्रदेश में पार्टी को समय न देने, ज्यादा समय जालौन-गरौठा-भोगनीपुर लोकसभा क्षेत्र में दिए जाने के आरोप लगाए गए हैं। बताया गया कि इस सीट पर पार्टी ने पहले ही पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी को प्रत्याशी घोषित कर दिया है। जिलाध्यक्ष द्वारा जारी पत्र में बताया गया कि इटावा सुरक्षित सीट से भी पार्टी द्वारा जाटव-अहिरवार समाज के व्यक्ति को चुनाव लड़ाया जाएगा। जिलाध्यक्ष के जारी पत्र से प्रतीत होता है कि तिलकचंद्र अहिरवार जालौन-भोगनीपुर- गरौठा सीट पर दावेदारी करने की तैयारी कर रहे थे, जबकि पार्टी वहां पर पहले ही अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी थी। 

बुंदेलखंड में कार्यकर्ताओं की फौज खड़ी करने वाले और पार्टी की रीड़ समझे जाने वाले जमीनी बसपा नेताओं को हाशिए पर लाकर या तो उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया, या फिर उन नेताओं ने खुद ही पार्टी छोड़ दी। इनमें पूर्व सांसद बृजलाल खाबरी, पूर्व मंत्री बाबूसिंह कुशवाहा व दददू प्रसाद और अब तिलकचंद्र अहिरवार, नसीमुद्दीन सिद्दीक़ी, श्रीरामपाल  शामिल हैं। ये वो नाम हैं, जो कभी बसपा के लिए तन,मन,धन से काम करते थे और जनाधार वाले नेता थे। अब बुंदेलखंड क्षेत्र से बचे केवल ग्याचरण दिनकर, जो वर्तमान में पार्टी के लिए जीतोड़ मेहनत तो कर रहे हैं, लेकिन कब मठाधीशों की चुगलियों के चलते बहन जीके कोप का भाजन बन जाए, यह निश्चित नहीं है। 

पिछले कुछ समय से बसपा का संगठन वैसे भी बुंदेलखंड में हाशिए पर है। मिशनरी कार्यकर्ता स्वयं को ठगा महसूस कर रहे हैं। हाईटेक होती पार्टी को अब जमीनी कार्यकर्ता व नेता रास नहीं आ रहे हैं। इसका खामियाजा पार्टी लगातार भुगत भी रही है। 

उधर, बहन जी का धन प्रेम भी मिशन के आड़े आता दिख रहा है। बड़े ऊंचे घरानों और धनाढय लोगों को संगठन में तरजीह दी जा रही है। धन कुबेरों को चुनाव लडऩे के लिए टिकट दिए जा रहे हैं और कार्यकर्ता सिर्फ पार्टी का झण्डा उठाने के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं । संगठन में अपनी उपेक्षा होते देख नेता एक-एक कर पार्टी छोड़ रहे हैं, जबकि बसपा आलाकमान उन पर विभिन्न आरोप लगाकर उन्हें पार्टी से निष्कासित करने का दावा करने से भी नहीं चूक रहा है। ऐसे में संगठन किस ओर जा रहा है, आम कार्यकर्ता की समझ से परे है। सभी बहन जी के इन निर्णयों को आश्चर्य की नजर से देख रहे हैं। 


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