बौद्ध धम्म प्रचार के लिए करें संघ दान, बोले- अशोक बौद्ध

By: jhansitimes.com
Oct 30 2017 07:49 pm
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(अशोक बौद्ध सामाजिक कार्यकर्ता)

किसी भी धर्म संस्कृति को अधिक समय तक जिंदा रखने के लिए प्रचार-प्रसार के साथ-साथ उसकी अच्छाइयों को भी समाज तक पहुँचाना अति आवश्यक होता है। जिसके लिए दान की जरूरत होती है। यह कहना है सामाजिक कार्यकर्ता अशोक बौद्ध का। उन्होंनंे कहा कि बौद्ध धम्म में भी संघ दान का नियम है। जिसे अपना कर हम अपने धम्म का प्रचार प्रसार कर इसके अनुयायियों की संख्या बड़ा सकते हैं।

बौद्ध धम्म दुनिया का सबसे अच्छा, वैज्ञानिक, प्राकृतिक और वास्तविक धम्म है, जिसे धारण कर कोई भी मानव अपना जीवन मानवता के साथ व्यतीत कर सकता है। आज भारत में इस धम्म को प्रचार प्रसार की कमी महसूस हो रही है। मानवता के महान वैज्ञानिक तथागत गौतम बुद्ध के बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय की बात हम कहीं न कहीं आम जन मानस तक नहीं पहुंचा पा रहे है, जिसका कारण संघ दान की कमी भी है। करोड़ों बहुजनों के मसीहा बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी ने भी कहा था कि आप अपनी कमाई का बीसवां हिस्सा समाज के लिए दान दें। इसी बात को मान्यवर साहब कांशीराम जी ने अपने शब्दों में पे बैक टू सोसायटी का नाम दिया है।

आज संघ दान के आभाव में कई बुद्ध बिहार, अम्बेडकर भवन अपने जीर्णोद्धार की वाट जोह रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर बौद्ध धम्म को जमीन पर यानि अनुयायियों तक पहुँचने का कार्य कर रहे बौद्ध भिक्खुओं को भी संघ दान की कमी जरूर महसूस हो रही है। जिससे भिक्खु बौद्ध धम्म को बहजुनों तक सही मायने में पहुँचाने में असमर्थ हैं।

14 अक्टूबर 1956 को विश्व रत्न बाबा साहेब अम्बेडकर जी ने अपने 6 लाख अनुयायियों के साथ नागपुर में बौद्ध धम्म दीक्षा जरूर ली थी। पर हमारे लोग अनुयायी की जगह उनके भक्त बन बैठे, नहीं तो आज भारत प्रबुद्ध भारत जरूर होता।  

वह बहुजन साथियों से कहना चाहते है कि हम अपने स्तर से धम्म दान करके धम्म को पूरे देश में फैलाने का कार्य जिम्मेदारी से करें। तभी हमारा समाज बहुजन समाज के साथ बौद्ध समाज बनेगा, जिससे जाति और गोत्र की नशबंदी होगी और पाखंडवाद का सफाया भी।


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