विधान परिषद चुनाव में ये हो सकते हैं भाजपा के उम्मीदवार, बुंदेलखंड को फिर झेल सकता है उपेक्षा का द

By: jhansitimes.com
Apr 13 2018 12:42 pm
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद चुनाव का शंखनाद हो चुका है, 13 सीटों पर चुनाव होने हैं। इनके लिए विभिन्न दलों ने अपने प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। विधानसभा में विधायकों के संख्याबल के आधार पर बसपा व सपा के खाते में एक-एक सीट जा रही, जबकि सबसे ज्यादा फायदा भाजपा को हो रहा है।  भाजपा के संभावित उम्मीदवारों की जो सूची सामने आई है, उसमें एक बार फिर बुंदेलखंड को उपेक्षा का दंश झेलना पड़ सकता है। 

एक फिर से बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की जोड़ी इन चुनावों में है। राज्यसभा चुनाव में हार का मुंह देख चुके बसपा उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर को पार्टी ने इस बार विधान परिषद के टिकट पर मैदान में उतारा है और सपा ने वादा किया है कि वो हर कीमत पर मायावती के उम्मीदवार की जीत तय करेगी।  

लोकसभा चुनाव के बाद बने मंत्री मंडल में, फिर उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद मंत्री मंडल में, बाद राज्यसभा चुनावों में, इसके बाद भाजपा संगठन में बुंदेलखंड को उपेक्षित रखने वाली भारतीय जनता पार्टी एक बार फिर बुंदेलखंड को विधान परिषद चुनाव में महरूम रख सकती है। बार-बार पीएम और सीएम बुंदेलखंड के विकास की बात तो करते हैं, मगर बुंदेलखंड की समस्त सीटों पर कार्यकर्ताओं की बदौलत जीत हासिल करने वाली भाजपा कार्यकर्ताओं को उचित प्रतिनिधित्व देने से कतराती है। न तो यहां के नेताओं को संगठन में कोई सम्मानजनक स्थान मिला है और न ही केंद्र व प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल में। अब विधान परिषद चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो गई हैं। 13 सीटों के लिए हो रहे इन चुनावों में भाजपा के खाते में स्पष्ट रूप से संख्या बल के आधार पर 11 सीटें आ रही हैं। इसके बावजूद भाजपा से जो संभावित प्रत्याशियों की सूची तैयार की गई है, उसमें बुंदेलखंड का कोई नेता शामिल नहीं है। 

सूत्रों की माने तो भाजपा की संभावित सूची में यशवंत सिंह, जसवंत सैनी, विजय बहादुर पाठक, अशोक कटारिया, भारत दीक्षित, महेंद्र सिंह, सलिल विश्रोई, विद्या सागर सोनकर, कृष्णा पटेल, सरोजनी अग्रवाल, श्याम देव राय चौधरी, बक्कुल नवाब प्रत्याशियों की दौड़ में सबसे आगे है। इनमें कोई भी नाम बुंदेलखंड का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। ऐसे में यदि इन संभावित प्रत्याशियों को ही टिकट दिया गया तो एक बार फिर बुंदेलखंड के साथ भाजपा का दोगला चरित्र उजागर हो जाएगा।  विधान परिषद के चुनाव के लिए नामांकन करने की आखिरी तारीख 16 अप्रैल है।

सूत्रों की मानें तो अपना दल की अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल और उनकी मां कृष्णा पटेल में भी समझौता हो गया है। समझौता होने के बाद कृष्णा पटेल को विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार बनाया जा रहा है। आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव के बाद अनुप्रिया पटेल और उनकी मां कृष्णा पटेल में विवाद हो गया था।

इससे पहले गुरुवार को बसपा उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर ने विधान परिषद चुनाव के लिए नामांकन किया। गौरतलब है कि समाजवादी पार्टी ने विधान परिषद चुनाव में बसपा उम्मीदवार को समर्थन देने का ऐलान किया है। राज्यसभा चुनाव में बसपा प्रत्याशी की हार से सबक लेते हुए सपा ने यह भी कहा कि है इस बार वो पहले भीमराव अंबेडकर की जीत तय करेगी और उसके बाद अपने प्रत्याशी को 


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