भाजपा ने बिछाई बिसात, ललितपुर जिला पंचायत अध्यक्ष पर लटकी अविश्वास की तलवार

By: jhansitimes.com
Feb 13 2018 07:26 pm
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ललितपुर। जिला पंचायत अध्यक्ष सरिता यादव के सिपहसलार ही अब धोखा देने लगे हैं। जिला पंचायत के सपा सदस्यों ने उनके खिलाफ अविश्वास लाने की कवायद तेज कर दी है। समझौते के सभी रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं। देखना है कि कब इस कुर्सी पर नई ताजपोशी की उम्मीदें करवट लेती हैं। 

समाजवादी पार्टी की सरकार में जिला पंचायत अध्यक्ष कुर्सी के कई दावेदारों को पीछे छोड़ते हुए सरिता यादव के नाम पर आलाकमान ने मोहर लगाई थी। सभी सपा समर्थित जिला पंचायत सदस्यों ने उनके नाम में अपनी आस्था जताते हुए उन्हें अध्यक्षी का ताज नवाजा था। अब सरकार के जाने के बाद भाजपा ने अपनी गोट बिछानी शुरू कीं और अध्यक्ष से नाराज चल रहे सपा समर्थक सदस्यों को अपने पाले में लाने के प्रयास तेज कर दिए। असंतुष्टों ने भी अध्यक्ष के बदले जाने में ही अपना नफा-नुकसान देखा और 12 सदस्य खुल कर अध्यक्ष में अविश्वास जताने लगे। उन्होंने अविश्वास प्रस्ताव के पत्र पर हस्ताक्षर भी कर दिए हैं। प्रस्ताव पेश करते समय यह संख्या बढक़र 15 हो सकती है वोटिंग वाले दिन यह संख्या बढक़र 18 तक पहुंच सकती है। 

गौरतलब है कि सरिता यादव समाजवादी पार्टी से ही जिला पंचायत अध्यक्ष चुनी गई थी। इससे पहले इनके पति शिशुपाल यादव जिला पंचायत अध्यक्ष थे। सरकार बदलने के बाद से यह कयास लगाए जा रहे थे कि जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आ सकता है। उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की पैरवी करने वाले और कोई नहीं उनके ही पार्टी के लोग हैं। यह उनके प्रति पार्टी के सदस्यों में असंतोष की पराकाष्ठा है।

इस संकट के पहले सपा के राज्यसभा सांसद डॉ. चंद्रपाल सिंह यादव ने असंतुष्ट सदस्यों और अध्यक्ष के मध्य तालमेल बैठाने का प्रयास किया था, मगर उनके प्रयासों पर जिला पंचायत अध्यक्ष खरी नहीं उतरीं। इससे सदस्यों का असंतोष और बढ़ गया। बीते रोज एमएलसी प्रतिनिधि आरपी निरंजन ने भी असंतुष्टों के साथ बैठक कर समन्वय बनाने का प्रयास किया, मगर यह भी बेकार गया। सूत्रों का कहना है कि अब राज्यसभा सांसद एक बार और इस मामले में हस्तक्षेप कर सकते हैं। 

उधर, अध्यक्ष सरिता यादव के पति और पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष शिशुपाल यादव कुर्सी बचाने के लिए ललितपुर, झाँसी से लखनऊ तक कोई कोर-कसर नहीं छोड़ेंगे। इसके बावजूद यदि बात नहीं बनी तो अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आना लगभग तय है।


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