सामाजिक सम्मेलनों के जरिए सपा-बसपा गठजोड़ को मात देगी भाजपा ! चुनावी गोट सजाने में जुटी

By: jhansitimes.com
Aug 08 2018 09:01 am
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भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश में 2014 के मोदी लहर को फिर से पैदा करने के लिए सामाजिक सम्मेलनों के जरिये चुनावी बिसात सजाने की रणनीति बनाई है. इसकी शुरूआत मंलवार को राजधानी लखनऊ में प्रजापति सम्मेलन के हुई . बुधवार को राजभर समाज का सम्मेलन होगा. इसी तरह गुरुवार को नाई, सविता, ठाकुर और सेन जातियों के प्रतिनिधियों का इसी स्थान पर सम्मेलन होगा. इसके बाद मेरठ में 11 व 12 अगस्त को पार्टी की प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के बाद सम्मेलनों का सिलसिला शुरू होगा.

25 अगस्त को निषाद, कश्यप, बिंद, केवट, कहार जातियों का 24 और भुर्जी, भड़भूजा, कांदू, कसौधन जाति का सम्मेलन प्रस्तावित है. पार्टी के मुताबिक प्रदेश स्तर पर इन सम्मेलनों के बाद लोकसभा और विधानसभा के सभी क्षेत्रों में यह काम शुरू हो जाएगा. पार्टी की रणनीति के मुताबिक पिछड़ों के साथ दलितों के भी अलग-अलग तबकों के सम्मेलन की योजना है.

 पिछड़े एकजुट हों तो 50 फीसदी वोट खुद ही बीजेपी की झोली में

इतना ही नहीं बीजेपी ने सामान्य वर्ग के लोगों के भी पेशे के आधार पर सम्मेलन करने की तैयारी है. दरअसल, लोकसभा चुनाव में सपा और बसपा के गठबंधन की चुनौती को देखते हुए बीजेपी के रणनीतिकारों ने चुनावी बिसात इस तरह बिछानी शुरू की है जिसमें गठबंधन के मोहरे भाजपाई गोटों को मात न दे सकें. यही वजह है कि बीजेपी ने खेतिहर और पेशेवर दोनों प्रकार की जातियों पर फोकस किया है.

लखनऊ में हो रहे सम्मेलनों में संबंधित जाति के बीजेपी के सांगठनिक जिलों से पांच-पांच प्रतिनिधि बुलाए जा रहे हैं. बता दें बीजेपी ने संगठन के कामकाज के लिहाज से प्रदेश को 92 जिला और महानगरों में बांट रखा है. इस लिहाज से हर सम्मेलन में उस जाति के करीब 400 लोग जुटेंगे. इस सम्मलेन में खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उस समाज के लिए किए गए काम को बताएंगे. इतना ही नहीं पिछड़ों में प्रभावी संदेश देने के लिए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को इन सम्मेलनों का प्रभारी बनाया गया है.

योजना है कि प्रत्येक समाज के सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले प्रतिनिधियों का जिलों में भी एक समूह बनेगा. यही समूह चुनाव के दौरान अपने-अपने समाज को बीजेपी के साथ लाने का काम करेगा. हर समाज के प्रतिनिधि लोकसभा व विधानसभा क्षेत्रों में अपने-अपने समाज के सम्मेलन करेंगे. इनमें उस वर्ग और पिछड़ों के लिए किए गए काम बताकर लोगों को लामबंद किया जाएगा.


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