PM मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट की कालाबाज़ारी, झाड़ियों में मिले उज्जवला योजना के 5000 गैस सिलेंडर

By: jhansitimes.com
Aug 23 2019 01:18 pm
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बलरामपुर: गरीबों को मुफ्त रसोई गैस देने की प्रधानमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट उज्जवला योजना पर भृष्टाचारियो ने नजरेंगडा दी है । भारत नेपाल से सटे बलरामपुर के पचपेड़वा कस्बे में झाड़ियों में छिपाकर रखे गए 5 हजार रसोई गैस सिलेंडर बरामद हुऐ है । जांच में प्रथम दृष्ट्या यह पाया गया है कि ये सभी सिलेंडर उज्जवला योजना (Ujjawala Scheme) के हैं, जो गरीबो में बांटे ही नहीं गए बल्कि इनकी कालाबाजारी की जा रही थी.

गुरुवार को जब स्थानीय लोगों से डीएम  करुण करुणेश को सूचना मिली थी कि पचपेड़वा के भार्गव गैस एजेंसी के पास झड़ियो में बड़ी संख्या में उज्ज्वला योजना के  अवैघ गैस छिपा कर रखे गए है । सूचना पर एसडीएम तुलसीपुर की अगुवाई में पूर्ति निरीक्षण सहित टीम ने छापा मारा । बड़ी तादाद में उज्ज्वला योजना के रसोई गैस सिलेंडर देख कर अधिकारियों के होश उड़ गए ।  टीम ने जांच में करीब 5 हजार अवैघ सिलेंडर , 6 हजार से अधिक रेगुलेटर सहित अन्य सामग्री बरामद कर गैस एजेंसी को सील कर दिया है । जांच के दौरान इस बात का भी खुलासा हुआ है कि पिछले 2 वर्षों से गरीबो को उज्ज्वला योजना के सिलेंडर नही दिए गए । पूर्ति निरीक्षक की तरफ से पचपेड़वा थाने में गैस एजेंसी संचालक सहित 5  लोगो के खिलाफ 3/ 7 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया है । सीमावर्ती क्षेत्र पचपेड़वा में इतनी बड़ी संख्या में अवैध रसोई गैस मिलने से जिलां प्रशासन के कान खड़े हो गए है । 
गरीबों को नहीं बांटे कनेक्शन
जांच में प्रथम दृष्ट्या यह पाया गया है कि ये सभी सिलेंडर उज्जवला योजना के हैं, जो गरीबों में बांटे ही नहीं गए बल्कि इनकी कालाबाजारी की जा रही थी. दरअसल 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस योजना की शुरुआत की थी. तब इस एजेंसी ने इलाके के गरीब लोगों में गैस कनेक्शन बांटने के नाम पर फॉर्म भरवाए थे. जिसके बाद एजेंसी को गैस सिलेंडर, चूल्हे व रेग्युलेटर मुहैया करवाए थे. लेकिन एजेंसी इन्हें लाभार्थियों को बांटे ही नहीं. आरोप यह है कि एजेंसी ने लाभार्थियों से 500-1500 रुपए तक कि अवैध वसूली भी की, लेकिन कनेक्शन नहीं दिया.

सब्सिडी भी हड़पी
आरोप यह है भी है कि उज्जवला योजना में मिलने वाली सब्सिडी को भी एजेंसी में हड़प लिया. मामले में डीएम कृष्णा करुणेश ने पांच सदस्यीय जांच कमेटी बनाई है. इस पूरे मामले में एजेंसी संचालक राम गोपाल तिवारी समेत पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है. इंडियन आयल के अधिकारी भी इस पूरे मामले की जांच में जुटे हैं कि आखिर गरीबों को मिलने वाले इन गैस सिलेंडरों को बांटा क्यों नहीं गया. आशंका यह भी व्यक्त की जा रही है कि नेपाल सीमा से सटा होने के कारण इन सिलेंडरों की कालाबाजारी कर नेपाल तो नहीं भेजा जा रहा था?


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