आखिर क्यों पोर्न फिल्मों को BLUE फिल्म कहा जाता है ?

By: jhansitimes.com
Jan 09 2017 11:15 am
1474

ब्लू? ब्लू क्यों? वजह है। इसके पीछे भी वजह है। अब सुनिए क्या वजह है।  देखते सब हैं बताता कोई नहीं। अब समझ तो आ ही गया होगा। मैं कौन से फिल्म की बात कर रहा हूं। सही पकड़े हैं। जिसको कुछ लोग पोर्न फिल्म कहते हैं। कुछ लोग ब्लू फिल्म कहते हैं। पोर्न तो समझ आता है। 

 

 पहली थ्योरी क्या कहती है? 

पहली थ्योरी के मुताबिक़ बब्लू फिल्म जो है वो रंगों को लेकर है।  ज्यादा या कम। ज्यादातर कम ही। शुरूआती दिनों में बनाना बहुत ही मुश्किल काम था। बजट बहुत कम होता था। तो फिल्म ठीक से बन नहीं पाती थी। और जो बनती थीं उनमें रंगों का हिसाब किताब ठीक नहीं रहता था। लाइट सीधे सपाट इस्तेमाल कर दिए जाते थे। तो सस्ती ब्लैक एंड व्हाईट जैसी बन रही फिल्में कहीं नीले रंग के आस-पास ठहरती थी। और इनको तब किसी ऐसे-तैसे सीडी मूवी हाउस में दिखाया जाता था। जिसके बाद इन चीप फिल्मों को देखने वालों ने इसे ब्लू फिल्म नाम दे दिया।  

 

 दूसरी थ्योरी का हिसाब कुछ और ही है

इनका कहना है कि जो सीडी बेचने वाले वीसीआर स्टूडियो वाले इन फिल्मों को सजाते वक़्त अलग से नीले रंग के पेपर में लपेट कर रखते थे। जिससे किसी को कोई गलत फिल्म की सीडी न चली जाए। तो इस वजह से ही इन फिल्मों को ब्लू फिल्म का नाम पड़ गया।  

 

एक तीसरी थ्योरी भी...

इसके हिसाब से जब पोर्न फिल्मों की शुरुआत हुई थी। तब इन फिल्मों के पोस्टर पर फिल्म के हिस्से की कुछ तस्वीरें होती थी। वाजिब है कि उनपर रोक था। रोक ये कि सीधे-सीधे इस्तेमाल नहीं कर सकते। जिसकी वजह से इन तस्वीरों के कुछ हिस्सों को नीले रंग से रंग दिया जाता था। क्योंकि ये रंग सस्ता होता था। तो इन नीले रंगों से रंगे फिल्मों के पोस्टर की वजह से। इन फिल्मों को पोर्न फिल्म कहा जाता है।   

 

थ्योरी एक और है जिसमें क्रिसचन देशों में जो 'ब्लू लॉ' हुआ करता था। उनसे जोड़ कर भी बताया गया है। जिसमें ये होता था कि शराब जैसी चीज़ों की बिक्री रविवार जैसे दिनों में नहीं हो सकती। तो ब्लू लॉ जो है वो कुछ चीज़ों पर बंदिशों को लेकर था। 


comments

Create Account



Log In Your Account



छोटी सी बात “झाँसी टाइम्स ” के बारे में!

झाँसी टाइम्स हिंदी में कार्यरत एक विश्व स्तरीय न्यूज़ पोर्टल है। इसे पढ़ने के लिए आप http://www.jhansitimes .com पर लॉग इन कर सकते हैं। यह पोर्टल दिसम्बर 2014 से वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई की नगरी झाँसी (उत्तर प्रदेश )आरंभ किया गया है । हम अपने पाठकों के सहयोग और प्रेम के बलबूते “ख़बर हर कीमत पर पूरी सच्चाई और निडरता के साथ” यही हमारी नीति, ध्येय और उद्देश्य है। अपने सहयोगियों की मदद से जनहित के अनेक साहसिक खुलासे ‘झाँसी टाइम्स ’ करेगा । बिना किसी भेदभाव और दुराग्रह से मुक्त होकर पोर्टल ने पाठकों में अपनी एक अलग विश्वसनीयता कायम की है।

झाँसी टाइम्स में ख़बर का अर्थ किसी तरह की सनसनी फैलाना नहीं है। हम ख़बर को ‘गति’ से पाठकों तक पहुंचाना तो चाहते हैं पर केवल ‘कवरेज’ तक सीमित नहीं रहना चाहते। यही कारण है कि पाठकों को झाँसी टाइम्स की खबरों में पड़ताल के बाद सामने आया सत्य पढ़ने को मिलता है। हम जानते हैं कि ख़बर का सीधा असर व्यक्ति और समाज पर होता है। अतः हमारी ख़बर फिर चाहे वह स्थानीय महत्व की हो या राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय महत्व की, प्रामाणिकता और विश्लेषण के बाद ही ऑनलाइन प्रकाशित होती है।

अपनी विशेषताओं और विश्वसनीयताओं की वजह से ‘झाँसी टाइम्स ’ लोगों के बीच एक अलग पहचान बना चुका है। आप सबके सहयोग से आगे इसमें इसी तरह वृद्धि होती रहेगी, इसका पूरा विश्वास भी है। ‘झाँसी टाइम्स ‘ के पास समर्पित और अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ संवाददाताओं, समालोचकों एवं सलाहकारों का एक समूह उपलब्ध है। विनोद कुमार गौतम , झाँसी टाइम्स , के प्रबंध संपादक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। जो पूरी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता का पिछले लगभग 16 वर्षों का अनुभव है। के पी सिंह, झाँसी टाइम्स के प्रधान संपादक हैं।

विश्वास है कि वरिष्ठ सलाहकारों और युवा संवाददाताओं के सहयोग से ‘झाँसी टाइम्स ‘ जो एक हिंदी वायर न्यूज़ सर्विस है वेब मीडिया के साथ-साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना विशिष्ट स्थान बनाने में कामयाब रहेगा।