नहीं रहे बॉलीवुड के रोमांटिक स्टार शशि कपूर, एक नजर अब तक के फ़िल्मी सफर पर

By: jhansitimes.com
Dec 04 2017 07:01 pm
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 2014 के दादासाहेब फाल्‍के अवॉर्ड और साल 2011 में पद्म भूषण से सम्‍मानित शश‍ि कपूर ने बॉलीवुड को एक से बढ़कर एक फिल्‍में दी हैं. अपनी मोहक मुस्‍कान और डॉयलॉग डिलिवरी के जुदा अंदाज के लिए मशहूर बॉलीवुड का ये सितारा हम सबको छोड़कर हमेशा-हमेशा के लिए विदा हो गया है, लेकिन अपनी फिल्‍मों की बदौलत वो हमेशा हमारे बीच बने रहेंगे. उनके अब तक के फिल्‍मी सफर पर एक नजर: 

शशि कपूर ने हिन्दी सिनेमा की 160 फिल्मों में काम किया था। वे 79 साल के थे। 60 और 70 के दशक में शशि कपूर ने जब-जब फूल खिले, कन्यादान, शर्मीली, आ गले लग जा, रोटी कपड़ा और मकान, चोर मचाए शोर, दीवार कभी-कभी और फकीरा जैसी कई फिल्में में काम किया।

शश‍ि कपूर ने बचपन से ही फिल्‍मों में काम करना शुरू कर दिया था. 1940 के दशक में उन्‍होंने कई धार्मिक फिल्‍मों में काम किया. बाल कलाकार के रूप में उनकी सबसे यादगार फिल्‍में हैं 'आग' (1948) और 'आवारा' (1951). इन दोनों ही फिल्‍मों में उन्‍होंने अपने बड़े भाई राजकूपर के बचपन का किरदार निभाया.

शश‍ि कपूर ने बतौर हीरो 1961 में यश चोपड़ा की फिल्‍म 'धर्मपुत्र' से बड़े पर्दे पर कदम रखा. इसके बाद वो करीब 100 फिल्‍मों में नजर आए. वो 1960, 1970 और 1980 के दशक के मशहूर अभ‍िनेता थे. इस दौरान उन्‍होंने बॉलीवुड को 'वक्‍त' (1965), 'जब-जब फूल ख‍िले' (1965), 'कन्‍यादान' (1969), 'हसीना मान जाएगी' (1968), 'आ गले लग जा' (1973), 'रोटी कपड़ा और मकान' (1974), 'चोर मचाए शोर' (1974), 'दीवार' (1975), 'कभी-कभी' (1976), 'फकीर' (1976), 'त्रिशूल' (1978), 'सत्‍यम शिवम सुंदरम' (1978), 'काला पत्‍थर' (1979), 'सुहाग' (1979), 'शान' (1980), 'क्रांति' (1981) और 'नमक हलाल' (1982) जैसी सुपर हिट फिल्‍में दीं. 

शश‍ि कपूर ने अपने करियर की सबसे सफल फिल्‍में 1970 और 80 के दशक के दौरान अमिताभ बच्‍चन के साथ कीं. 

शश‍ि कपूर बॉलीवुड के उन अभ‍िनेताओं में शामिल हैं जो ब्रिटिश और अमेरिकी फिल्‍मों में भी काम कर चुके हैं. उन्‍होंने 'शेक्‍सपीयर वल्‍लाह' (1965), 'बॉम्‍बे टॉकी' (1970) और पत्‍नी जेनिफर केंडल के साथ 'हीट एंड डस्‍ट' (1982),  'प्रिटी पॉली' (1967), 'सिद्धार्था' (1972) और 'सैमी एंड रोज़ी गेट लेड' (1987) जैसी विदेशी फिल्‍मों में भी अपनी एक्टिंग का लोहा मनवाया. 

शश‍ि कपूर ने 1980 में 'फिल्‍म वलास' नाम से एक प्रोडक्‍शन हाउस भी खोला, जिसके तहत 'जुनून' (1978), 'कलयुग' (1981),'36 चौरंगी लेन' (1981), 'विजेता' (1982) और 'उत्‍सव' (1984) जैसी क्रिटिकली एक्‍लेम्‍ड फिल्‍में बनीं. साल 1991 में उन्‍होंने अपने फेवरेट कोस्‍टार अमिताभ बच्‍चन और भतीजे ऋषि कपूर के साथ 'अजूबा' नाम से भी एक फिल्‍म बनाई. 

शश‍ि कपूर आख‍िरी बार साल 1998 में फिल्‍म 'जिन्‍ना' में नजर आए थे.  यह पाकिस्‍तान के पहले प्रधानमंत्री मोहम्‍मद अली जिन्‍ना की बायोपिक थी | 

-शशि कपूर को हिंदी सिनेमा का पितामह कहा जाता था। उनके पिता का नमा पृथ्वीराज कपूर था और उनका जन्म 18 मार्च 1938 को हुआ था। शशि पृथ्वीराज के चार बच्चों में सबसे छोटे थे। उनकी मां का नाम रामशरणी कपूर था।

-शशि ने एक्टिंग में अपना करियर 1944 में अपने पिता पृथ्वीराज कपूर के पृथ्वी थिएटर के नाटक 'शकुंतला' से शुरू किया। उन्होंने फिल्मों में भी अपने एक्टिंग की शुरुआत बाल कलाकार के रूप में की थी।

-शशि कपूर के बचपन का नाम बलबीर राज कपूर था। बचपन से ही एक्टिंग के शौकीन शशि स्कूल में नाटकों में हिस्सा लेना चाहते थे। उनकी यह इच्छा वहां तो कभी पूरी नहीं हुई, लेकिन उन्हें यह मौका अपने पिता के 'पृथ्वी थियेटर्स' में मिला।

-शादी के मामले में भी वह अलग ही निकले। पृथ्वी थिएटर में काम करने के दौरान वह भारत यात्रा पर आए गोदफ्रे कैंडल के थिएटर ग्रुप 'शेक्सपियेराना' में शामिल हो गए। थियेटर ग्रुप के साथ काम करते हुए उन्होंने दुनियाभर की यात्राएं कीं और गोदफ्रे की बेटी जेनिफर के साथ कई नाटकों में काम किया। इसी बीच उनका और जेनिफर का प्यार परवान चढ़ा और 20 साल की उम्र में ही उन्होंने खुद से तीन साल बड़ी जेनिफर से शादी कर ली। कपूर खानदान में इस तरह की यह पहली शादी थी।

-श्याम बेनेगल, अपर्णा सेन, गोविंद निहलानी, गिरीश कर्नाड जैसे देश के दिग्गज फिल्मकारों के निर्देशन में जूनून, कलयुग, 36 चौरंगी लेन, उत्सव जैसी फिल्में बनाईं। ये फिल्में बॉक्स ऑफिस पर तो सफल नहीं हुईं, लेकिन इन्हें आलोचकों ने काफी सराहा और ये फिल्में आज भी मील का पत्थर मानी जाती हैं।

-शशि कपूर भारत के पहले ऐसे एक्टर्स में से एक हैं, जिन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ब्रिटिश और अमेरिकी फिल्मों में भी काम किया। इनमें हाउसहोल्डर, शेक्सपियर वाला, बॉम्बे टॉकीज, तथा हीट एंड डस्ट जैसी फिल्में शामिल हैं।

-अपनी फिल्म 'जुनून' के लिए उन्हें बतौर निर्माता राष्ट्रीय पुरस्कार मिला, 'न्यू डेल्ही टाइम्स' में एक्टिंग के लिए उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया और 2011 में उन्हें पद्मभूषण सम्मान मिला।

-इसके अलावा शशि कपूर को फिल्म 'जब जब फूल खिले' के लिए बेस्ट एक्टर, बांबे जर्नलिस्ट एशोसिएशन अवॉर्ड और फिल्म 'मुहाफिज' के लिए स्पेशल ज्यूरी का नेशनल अवॉर्ड भी मिला था।

-बॉलीवुड से वह लगभग संन्यास ले चुके थे. वर्ष 1998 में आई फिल्म 'जिन्ना' उनके फिल्मी करियर की आखिरी फिल्म थी।


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