बुंदेलखंड फिर हुआ उपेक्षा का शिकार,क्या भाजपा आलाकमान के पास है इन सवालों जवाब

By: jhansitimes.com
Mar 12 2018 11:16 am
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झाँसी। बुंदेलखंड का मतदाता हमेशा भारतीय जनता पार्टी के हाथों ठगा जाता रहा है और संभवत: ठगा जाता रहेगा। यहां के कार्यकर्ताओं व मतदाताओं को पार्टी सिर्फ इस्तेमाल की चीज समझती है, जिसे यूज़ करने के बाद फेंक दिया जाता है। भाजपा आलाकमान द्वारा कुछ ऐसा ही किया जा रहा है बुंदेलखंड की भोली-भाली जनता व कार्यकर्ताओं के साथ। एक बार फिर राज्यसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने अपने अन्य राज्यों के व आरएसएस से जुड़े कार्यकर्ताओं व नेताओं को तवज्जो दी। तबज्जो नहीं दी तो केवल बुंदेलखंड को | जब 4 सांसद और 19 विधायक है यहाँ से| 

गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने अपने कार्यकर्ताओं और जनता की बदलाव की चाहत के चलते पहले वर्ष 2014 में बुंदेलखंड की चारों लोकसभा सीटों पर भाजपा का परचम लहराया गया। चार सांसद देने के बावजूद एक भी मंत्री केबिनेट में नहीं बनाया गया। इसके बाद वर्ष 2017 विधान सभा चुनाव में भी बुंदेलखंड की सभी 19 सीटों पर भाजपा का भगवा परचम फहरा और सभी विधायक भाजपा की झोली में गए। इसके बावजूद एक भी केबिनेट स्तर का मंत्री पद यहां के विधायकों को नहीं दिया। केवल एक राज्यमंंत्री का पद देकर यहां के कार्यकर्ताओं को झुनझुना पकड़ा दिया गया। फिर संगठन की बात आई तो प्रदेश कार्यकारिणी में भी यहां के नेताओं को तवज्जो न देकर महज कार्यकारिणी सदस्यों में उन्हें शामिल कर आश्वस्त कर दिया गया। लोकसभा चुनावों में भाजपा द्वारा बुंदेलखंड को पृथक राज्य बनाने का मुद्दा भी चुनाव जीतने और सरकार बनने के बाद ठंडे बस्ते में चला गया। आखिर कब तक जनता और कार्यकर्ता ऐसे ही इस्तेमाल होता रहेगा? 

अब उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के लिए चुने जाने वाले आठ सदस्यों में से एक भी ऐसा उम्मीदवार घोषित नहीं किया गया, जो बुंदेलखंड का रहने वाला हो। क्या भाजपा के पास बुंदेलखंड में एक भी चेहरा ऐसा नहीं है जो राष्ट्रीय अथवा प्रदेश स्तर पर चमक सकता हो? क्या एक भी नेता ऐसा नहीं जो संगठन के लिए किसी बड़ी जिम्मेदारी को निभा सके? क्या बुंदेलखंड का मतदाता और कार्यकर्ता केवल वोट हासिल करने के लिए ही है? इन सवालों का शायद भाजपा के पास कोई जवाब नहीं है। राज्यसभा चुनावों में केवल वहीं उम्मीदवार बनाए गए हैं, जो जातीय गठित में भाजपा की राजनीति में फिट बैठते हैं अथवा संघ या फिर बड़े नेताओं के संपर्क में है। 

बुंदेलखंड का मतदाता और भाजपा कार्यकर्ता अपनी ही पार्टी के इस उपेक्षापूर्ण रवैये का बुरी तरह शिकार है। इसलिए उसने भी आगामी चुनाव में उचित प्रतिनिधित्व न मिलने पर पार्टी को सबक सिखाने का मन बना लिया है। यदि भाजपा शीर्ष नेतृत्व जल्द ही इस दिशा में नहीं चेता तो निश्चित ही आने वाले भविष्य की राजनीति में उसे बड़ा झटका लग सकता है। 


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