बुंदेलखंड के जिताऊ दलित वोट पर राजनैतिक दलों की नजर, क्या बसपा फिर होगी नाकाम ....

By: jhansitimes.com
Feb 05 2018 06:28 pm
266

झाँसी। बुंदेलखंड की विधानसभाओं और लोकसभा सीटों पर जिताऊ दलित वोट पर सभी राजनैतिक दलों की नजर है। इस बार 2019 में होने वाले आम लोकसभा चुनावों के पहले बसपा के  इस परंपरागत वोट बैंक को अपने पाले में करने की सभी राजनैतिक दलों में होड़ मची है। देखना होगा बसपा के आधार वोट बैंक को कौन सा दल अपने पाले में अधिक संख्या में लाकर वोट में तब्दील करेगा या फिर बसपा इनके इस मंसूबे को नाकाम कर देगी।

कभी था बसपा-सपा का गढ़, अब भाजपा के हैं चारों सांसद व 19 विधायक

गौरतलब है कि बुंदेलखंड में पहले बसपा की तूती बोलती थी। अधिकांश सीटों पर बसपा के विधायक चुने जाते थे। यही विधायक लोकसभा चुनावों में भी अपने समर्थकों को वोट में तब्दील कर पार्टी को अधिकांश सीटों पर जीत दिलाने में कामयाब होते थे। कारण था बुंदेलखंड क्षेत्र में 30 प्रतिशत दलित वोट का होना। परिस्थतियां बदलीं और बुंदेलखंड में सपा ने अपना झण्डा गाड़ दिया। देखते ही देखते सपाई परचम बुंदेलखंड में लहराने लगा। परिसीमन हुआ और कुल 21 में से दो सीटें कम हो गई। बुंदेलखंड में केवल 19 सीटें ही विधानसभा की बचीं। पिछले लोकसभा चुनाव 2014 में भाजपा की लहर चली। जिसमें सपा, बसपा और कांग्रेस बुंदेलखंड से साफ हो गई। भाजपा ने लोकसभा की चारों लोकसभा सीटों पर भारी मतों से जीत हासिल की। इस जीत में दलित वोट का बहुत बड़ा हिस्सा भाजपा के खाते में गया। इस दलित वोट बैंक को भाजपा ने सहेज कर रखा और गत वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में भी भाजपा ने सभी राजनैतिक दलों का सूपड़ा साफ कर दिया। नतीजा भाजपा के पक्ष में गया और केंद्र के बाद उत्तर प्रदेश में भी भाजपा की सरकार काबिज हो गई। 

पांच दलित विधानसभा प्रत्याशी उतारना मजबूरी

मालूम हो कि झाँसी जनपद में चार में से 1 मऊरानीपुर विधानसभा, ललितपुर में 2 में से एक महरौनी विधानसभा, जालौन में तीन में से एक उरई विधानसभा, हमीरपुर की दो में एक राठ विधानसभा और बांदा की चार में एक नरैनी विधानसभा सीट आरक्षित है। महोबा व चित्रकूट में कोई भी विधानसभा सीट आरक्षित नहीं हुई। अब बुंदेलखंड की 19 में से केवल 5 सीटों पर दलित उम्मीदवार उतारना हर दल की मजबूरी बन गया। ऐसे में अन्य सीटों पर दलित वर्ग को साधना और उसे अपने पक्ष में पडऩे वाले वोट में बदलना चाहते हैं सभी राजनैतिक दल।

दलित वोट व नेताओं पर गिद्ध दृष्टि

इसलिए आगामी लोकसभा चुनाव के पहले ही सभी राजनैतिक दलों ने दलित वोट को अपने पक्ष में करने की कवायद अभी से शुरू कर दी है। भारतीय जनता पार्टी जहां बाबा साहब के सिद्धांतों को लेकर दलितों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है तो कांग्रेस दलित वोट को अपना पुराना वोट और समर्थक बताते हुए वापस लाने का प्रयास जोर-शोर से कर रही है। वहीं सपा ने भी बसपा के कई बड़े नेताओं को हाल के दिनों में अपने पाले में लाकर दलित वोट पर पक्की दावेदारी जताने की कोशिश की है। रही बसपा की बात, तो बहुजन समाज पार्टी जानती है कि दलित वर्ग अन्य दलों की सत्ता के समय परिस्थति वश जो भी करे, मगर जब वोट देने की बारी आएगी तो वह बसपा से मुंह नहीं मोड़ सकता। 

लोकसभा की चार में एक सीट ही आरक्षित

उधर, लोकसभा की चार में से बुंदेलखंड में महज एक सीट आरक्षित है। इनमें झाँसी-ललितपुर, बांदा-चित्रकूट, महोबा-हमीरपुर सामान्य वर्ग के लिए हैं तो जालौन-गरौठा-भोगनीपुर सीट दलित वर्ग के लिए आरक्षित है। बुंदेलखंड के तीस प्रतिशत दलित वोट को अपने पाले में लाने के लिए सभी राजनैतिक दलों ने कमर कस ली है और दलित समाज के विभिन्न वर्गों के बड़े नेताओं को अपने दल में शामिल करने की होड़ मची है। भाजपा ने कई लोकलुभावन वादे किए हैं तो कांग्रेस पुराने उपकार गिना रही है, वहीं सपा बड़े नेताओं को लगातार शामिल कर रही है। ऐसे में बसपा ही एकमात्र दल है जो फिलहाल इस बड़े वर्ग को अपना मान कर चल रही है और अन्य दलों के कुछ नेताओं को शामिल कर अपनी पार्टी व संगठन को गुपचुप तरीके से मजबूती प्रदान करने में जुटी है। 


comments

Create Account



Log In Your Account



छोटी सी बात “झाँसी टाइम्स ” के बारे में!

झाँसी टाइम्स हिंदी में कार्यरत एक विश्व स्तरीय न्यूज़ पोर्टल है। इसे पढ़ने के लिए आप http://www.jhansitimes .com पर लॉग इन कर सकते हैं। यह पोर्टल दिसम्बर 2014 से वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई की नगरी झाँसी (उत्तर प्रदेश )आरंभ किया गया है । हम अपने पाठकों के सहयोग और प्रेम के बलबूते “ख़बर हर कीमत पर पूरी सच्चाई और निडरता के साथ” यही हमारी नीति, ध्येय और उद्देश्य है। अपने सहयोगियों की मदद से जनहित के अनेक साहसिक खुलासे ‘झाँसी टाइम्स ’ करेगा । बिना किसी भेदभाव और दुराग्रह से मुक्त होकर पोर्टल ने पाठकों में अपनी एक अलग विश्वसनीयता कायम की है।

झाँसी टाइम्स में ख़बर का अर्थ किसी तरह की सनसनी फैलाना नहीं है। हम ख़बर को ‘गति’ से पाठकों तक पहुंचाना तो चाहते हैं पर केवल ‘कवरेज’ तक सीमित नहीं रहना चाहते। यही कारण है कि पाठकों को झाँसी टाइम्स की खबरों में पड़ताल के बाद सामने आया सत्य पढ़ने को मिलता है। हम जानते हैं कि ख़बर का सीधा असर व्यक्ति और समाज पर होता है। अतः हमारी ख़बर फिर चाहे वह स्थानीय महत्व की हो या राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय महत्व की, प्रामाणिकता और विश्लेषण के बाद ही ऑनलाइन प्रकाशित होती है।

अपनी विशेषताओं और विश्वसनीयताओं की वजह से ‘झाँसी टाइम्स ’ लोगों के बीच एक अलग पहचान बना चुका है। आप सबके सहयोग से आगे इसमें इसी तरह वृद्धि होती रहेगी, इसका पूरा विश्वास भी है। ‘झाँसी टाइम्स ‘ के पास समर्पित और अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ संवाददाताओं, समालोचकों एवं सलाहकारों का एक समूह उपलब्ध है। विनोद कुमार गौतम , झाँसी टाइम्स , के प्रबंध संपादक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। जो पूरी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता का पिछले लगभग 16 वर्षों का अनुभव है। के पी सिंह, झाँसी टाइम्स के प्रधान संपादक हैं।

विश्वास है कि वरिष्ठ सलाहकारों और युवा संवाददाताओं के सहयोग से ‘झाँसी टाइम्स ‘ जो एक हिंदी वायर न्यूज़ सर्विस है वेब मीडिया के साथ-साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना विशिष्ट स्थान बनाने में कामयाब रहेगा।