बुंदेलखंड: योगीराज में बालू के लिए वर्चस्व की जंग, खून के प्यासे हो रहे दौलत के पुजारी

By: jhansitimes.com
Mar 14 2018 11:24 am
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झाँसी। उत्तर प्रदेश में पिछली सरकार में बुंदेलखंड की खनिज संपदा को जमकर लूटा गया। इसका मुद्दा भी विधानसभा चुनावों में हावी रहा। नतीजा, उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हुआ और भारतीय जनता पार्टी ने पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। सबसे पहले खनन नीति में बदलाव किया और नई नीति लागू कर अवैध खनन पर रोक लगाने के दावे किए गए। ऑनलाइन हुई बोलियां और पट्टे कर दिए गए। निर्धारित जगह को छोड़ माफियाओं ने नए घाट बनाए और उसे बालू को सोने में बदलने की खान बना डाला। अब रुपयों के बंदरबांट में बालू घाटों पर वर्चस्व की लड़ाई शुरू हो गई है। और कोई नहीं, ये वही हैं जो सत्ता में होने का दंभ भरते हैं और अपना वर्चस्व कायम करने के लिए खून के प्यासे बने बैठे हैं। 

जी हां, बात हो रही है झाँसी में अवैध खनन की। प्रदेश सरकार ने नई खनन नीति अवश्य लागू की, मगर इससे अवैध खनन पर रोक लगने के बजाए और अधिक होने लगा है। रात हो या दिन हो। जबरदस्त तरीके से ट्रैक्टर, ट्रक, डंपर बालू से भरकर निकाले जा रहे हैं। कोई भी राष्ट्रीय राजमार्ग हो या फिर कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों की सडक़ें। सभी इन ओवरलोड वाहनों से क्षतिग्रस्त हो गई हैं। यदि पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है इन अवैध खनन करने वाले वाहनों को पकडऩे के लिए तो फिर इन अवैध खनन करने वालों में पुलिस और प्रशासन का खौफ क्यों नहीं है? 

कारण, आम आदमी अवैध खनन कर रही नहीं पा रहा है। सत्ता पक्ष से जुड़े वही लोग खनन में जुटे हैं, जो सिस्टम के तहत कार्य कर रहे हैं। प्रत्येक थाना क्षेत्र में सत्ताधारी राजनीतिक वरहस्त के इस सिस्टम में पुलिस, अधिकारी व राजनेता सभी शामिल हैं। जिसका पैसा नहीं मिला, या जो सिस्टम से हटकर चला, उसकी गाड़ी थाने में दिखाई देती है। जो सिस्टम से चलते हैं, वे लंबी पारी खेलते हैं। 

अब बात आती है वर्चस्व की। इस लड़ाई में घाटों पर हिस्सेदारी की मांग है। अधिकांश घाटों के पट्टे जनपद के बाहर की कंपनियों को आवंटित हुए हैं। लेकिन क्षेत्रीय लोगों, नेताओं व दबंगों ने इन घाटों पर कब्जा कर लिया है। इसमें वे हिस्सेदारी देने से स्पष्ट इंकार करते हैं। इसलिए जो लोग अपनी सरकार आने पर रुपया कमाने का मंसूबा पाले थे, वे अब इन घाटों  में हिस्सेदारी चाहते हैं। इसी वजह से बालू के घाटों पर खूनी जंग छिड़ी है। एक भाजपा नेता ने पिछले दिनों गरौठा के ठर्रो घाट पर गोलियां चलाई थीं। सबकुछ कैमरों में कैद था, मगर मामला लिखा-पढ़ी के बावजूद रफा-दफा हो गया। अब बीते रोज देवरी में एक घाट पर कैशियर की हत्या कर रात के अंधेरे में दबंग पंद्रह लाख से अधिक की रकम लूट ले गए। पुलिस व प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा, सुरक्षा के बड़े-बड़े दाव किए और वापस मुख्यालय लौट आए। वहां एक दिन पहले जो खून बहा था, उस पर बालू फिर गई। फिर शुरू हो गया खनन। 

आखिर मिट्टी को सोने में बदलने की लालसा में पर्यावरण और बुंदेली धरा को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कब प्रशासन व सत्ता कड़ी कार्रवाई करेगी? कब इन घाटों पर सकारात्मक तरीके से काम होगा? कब आवंटित घाटों के अलावा होने वाले अन्य स्वयंभू घाटों से अवैध खनन रूकेगा? आखिर कब? 


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