बुन्देलखण्ड: कांग्रेस की सोशल इंजीनियरिंग से सपा-बसपा गठबंधन और भाजपा हलकान

By: jhansitimes.com
Mar 23 2019 09:52 pm
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झांसी। उप्र के बुन्देलखण्ड में कांग्रेस की सोशल इंजीनियरिंग से सपा-बसपा गठबंधन हलकान है। इस अंचल में कांगे्रस की राजनीति में कभी ब्राहमणों का प्रभुत्व रहा करता था। यह पहली बार है जब कांग्रेस ने इस अंचल की तीनों गैर सुरक्षित लोकसभा सीटों पर मजबूत पिछड़ी जातियों के दमदार प्रत्याशी उतारकर दूसरे दलों के समीकरण बिगाड़ दिये है।

कांग्रेस ने आज पूर्व सांसद बालकुमार पटेल को पार्टी में शामिल कर लिया। नयी दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने महासचिव प्रियंका गांधी और ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ उप्र कांग्रेस के अध्यक्ष राज बब्बर की मौजूदगी में उन्हे पार्टी मंे शामिल करने की घोषणा की।

बालकुमार पटेल कुख्यात डकैत शिवकुमार पटेल उर्फ ददुवा के भाई है। वे पहले मिर्जापुर से सांसद रह चुके है। इसके बाद समाजवादी पार्टी ने उन्हे गत चुनाव में बांदा-चित्रकूट लोकसभा क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया था हालांकि वे मोदी लहर के कारण भाजपा के भैरो प्रसाद मिश्रा से चुनाव हार गये थे।

हाल में सपा ने भाजपा छोड़कर समाजवादी पार्टी  में शामिल हुए श्यामाचरण गुप्ता को बांदा से उम्मीदवार घोषित कर दिया था जिसके कारण बालकुमार पटेल खिन्न थे। उनके पार्टी छोड़कर कांग्रेस में शामिल होने से सपा को जबरजस्त झटका लगा है।

गौरतलब है कि पुलिस भले ही ददुवा को डकैत कहती रही हो लेकिन कुर्मी समाज में उसे भगवान की तरह पूजा जाता है। इसी कारण बालकुमार पटेल की भी कुर्मियों में भारी पैठ है। बांदा-चित्रकूट लोकसभा क्षेत्र में कुर्मियों की अच्छी खासी तादात है। कांग्रेस ने बांदा-चित्रकूट से उन पर दांव लगाने का संकेत दिया है। कुर्मी समाज के नरेश उत्तम को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर अपने साथ इस समाज को मजबूती से जोड़ने का ताना-बाना बुनने वाली समाजवादी पार्टी कांग्रेस के इस कदम से बेचैन है।

ध्यान रहे कि कांग्रेस ने झाॅंसी सीट पहले ही बाबू सिंह कुशवाहा की नेतृृत्व वाली जन अधिकारी पार्टी के हवाले कर दी है। बाबू सिंह कुशवाहा को प्रदेश में कुशवाहा समाज का बड़ा लीडर माना जाता है जो कि मायावती के साथ कैबिनेट मंत्री रह चुके है। उन्होने अपने भाई को कांग्रेस के सिम्बल पर लोकसभा चुनाव लड़ाने का संकेत दिया है।

झाॅंसी-ललितपुर लोकसभा सीट पर सबसे पहले वीपी सिंह ने कुशवाहा समाज का असर आंका था इसलिए मण्डल आयोग की रिपोर्ट लागू होने के बाद 1991 में हुये लोक सभा के मध्यावधि चुनाव में उन्होने देवरिया के रामनरेश कुशवाहा को यहां से जनता दल का उम्मीदवार बनाया था। मायावती भी इसी समाज के बाबूलाल कुशवाहा को एक बार झाॅंसी-ललितपुर क्षेत्र से आजमा चुकी है। भले ही आज तक यहां से कोई कुशवाहा सांसद न बन पाया हो लेकिन उक्त चुनावों से इस समाज की लोकसभा क्षेत्र में निर्णायक ताकत प्रमाणित हो चुकी है। हांलाकि गठबंधन के साथ-साथ भाजपा को भी कांग्रेस के इस कार्ड से परेशानी झेलनी पड़ रही है। केशव प्रसाद मौर्य और स्वामी प्रसाद मौर्य की वजह से भाजपा इस समाज का समर्थन व्यापक तौर पर बटोरने का मंसूबा पाल रही थी।

हमीरपुर, महोबा क्षेत्र में भी कांग्रेस लोध नेता प्रीतम सिंह राजपूत को पहले ही अपना प्रत्याशी घोषित कर चुकी है। दूसरी ओर जालौन-गरौठा-भोगनीपुर लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस ने बृजलाल खाबरी को प्रत्याशी बनाया है जो बसपा से सांसद रह चुके है। उनकी चर्मकार समाज में व्यक्तिगत पकड़ है जाहिर है इस नाते वे बसपा के वोट बैंक में जबरजस्त सेंधमारी कर सकते है।


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