बुंदेलखंड: सपा- बसपा का संम्भावित गठबंधन बिगाड़ सकता है भाजपा और कांग्रेस का समीकरण?

By: jhansitimes.com
Dec 28 2018 05:54 pm
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झांसी । उत्तर प्रदेश जहां से देश के पीएम बनने का रास्ता खुलता है और वहां पर अब सपा-बसपा का गठबंधन होने कारण भाजपा की स्थिति कमजोर पड़ सकती है? वहां  कांग्रेस जो कि प्रदेश में अब तक अपनी मजबूत पकड़ नहीं बना पाई। इस गठबंधन से वो हाशिए पर खड़ी हो सकती है। 

राजनीति में जो आंकड़े उभरकर आ रहें है उससे बुंदेलखंड की झाँसी -ललितपुर लोकसभा, जालौन-गरौठा क्षेत्र, हमीरपुर-महोबा और बाँदा -चित्रकूट लोकसभा  में भाजपा के वर्तमान सांसदों के विरोधी अभी से सक्रिय होने लगे है | विरोधियों का कहना है कि अब टिकट देने से पहले में सोच समझकर फैसला लिया जाए| 

सपा ओर बसपा के गठबंधन की सुगुबुगाहट के बीच राजनीतिज्ञों और सूत्रों की मानें तो झाँसी-ललितपुर, जालौन-गरौठा-भोगनीपुर और हमीरपुर-महोबा बसपा के खाते में जा सकती है। साथ ही बाँदा-चित्रकूट समाजवादी के खाते में | 

वहीं टिकट के संभावित उम्मीदवार जिला मुख्यालय से लेकर दिल्ली दरबार में बसपा सुप्रीमो मायावती के चरणबंदन में लग गए है। कुछ लोगो को भरोसा मिला तो कुछ लाइन में लगे हुए है लगातार यह सिलसिला जारी है। झाँसी-ललितपुर लोकसभा से प्रबल दावेदार बसपा के प्रदेश अध्यक्ष  आर. एस कुशवाहा, जुगल किशोर कुशवाहा, श्रीमती अनुराधा शर्मा के साथ अन्य दलों के भी कई दिग्गज टिकट की कतार में खड़े हैं |  

जालौन-गरौठा-भोगनीपुर लोकसभा से लंबे समय से पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी जो कि सपा छेाडक़र बसपा में शामिल हुए थे, पूर्व नगर पालिकाध्यक्ष विजय चौधरी जिन्हें 2017 विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा था, अजय कुमार पंकज पूर्व विधायक साथ ही बसपा से निष्कासित और पार्टी छोड़कर गए कई दिग्गज भी प्रबल दाबेदार है | 

हमीरपुर-महोबा लोकसभा से बसपा का समय-समय पर सहयोग करने वाले दिलीप सिंह, संजय दीक्षित , राम अवतार राजपूत सहित अन्य दलों  के बागी  बसपा से उम्मीदवार हो सकते हैं | 

जिस तरह से तीन प्रदेशो में हुई जीत से गदगद कांग्रेस के भी हौंसले बुलंद हैं और भाजपा केंद्रीय उमा भारती के लोकसभा चुनाव न लड़ने कारण झाँसी -ललितपुर से बहुत सोच समझकर प्रत्याशी खड़ा करना चाहती है। हालांकि भाजपा में गुटबाजी अभी भी सुरसा जैसा मुंह खोले खड़ी है किसको लील जायेगी यह पता चुनाव के समय में ही चलेगा, परंतु सपा में कई फाड़ हो गए ऐसे परिस्थितियों में कोई भी पार्टी बढ़े हौसले के साथ अपने कंडीडेंट की हामी भरने में कहीं न कहीं अटक रही है। 

साल गुजरते ही लोकसभा चुनाव की सरगर्मियां तेज हो जायेेंगी। ऐसी परिस्थितियों में जो नेता विधानसभा चुनाव के उपरांत ठंडे पड़ गए अब वो भी अगडाइयां लेने लगे हैं | नेताओं का क्रीच किए हुए कुर्ते पैजामे और टोपी पहनने का समय नजदीक आ गया है। चूंकि २०१४ में लोकसभा चुनाव में भाजपा ने एकतरफा जीत हासिल कर 73 सीटों पर विजय पताका  फहराई थी और पांच सपा के खाते में तथा दो कांग्रेस को मिली थीं | बुआ-भतीजे का बीच रिश्ता भाजपा और कांग्रेस के सामने कठिन रहे खड़ी कर रहा है | फिलहाल अभी तो हर पार्टी से कई दावेदार मैदान में उतरकर अपनी फील्ड बनाकर वेटिंग करने के पूरे मूड में है।


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