बुंदेलखंड: फूट-फूट कर रोया किसान, कहा- हम तो हो गये बर्बाद, कैसे होगी बच्चों की पढ़ाई और शादी

By: jhansitimes.com
Feb 13 2018 04:56 pm
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रिपोर्ट-सैय्यद तामीर उद्दीन महोबा। गांव-गरीब-खेत-खलिहान और किसान की बात करने वाले राजनेता जब किसानों पर आफत का पहाड़ टूटा तो गायब थे। फसल बर्बादी के बाद यहां का तबाह हुआ किसान फूट-फूट कर रो रहा है। लेकिन उसके आंसू पौछने की सत्ता पक्ष से जुड़े राजनेता हो या विपक्ष से जुड़े रहनुमा को उनकी सुध लेने की फुर्सत नही थी, किसानों का सदैव दम भरने वाले राजनेताओं के इस आचरण को लेकर किसान और आम जनमानस अचम्भित है। 

 आज के संदर्भ में तो यह बात कही जा  सकती है। कि किसानों से हमदर्दी सिर्फ इनके घड़ियालु आंसू बहाने के सिवा कुछ नही है। जब किसानों पर आफत टूटी तो बड़ी-बड़ी बात करने वाले राजनेता गायब थे। जनपद में तबाही का मंजर देखकर हर आदमी हैरत में है, किसान पर तो जैसे विपदा टूट पड़ी है उसके सामने भविष्य के मसले खड़े हो गये है। किसान खेती बाड़ी के आगे न तो कुछ सोच पाता है और न ही इसके अलावा जीविकोपार्जन के अलावा और कोई चारा नही है। लेकिन प्राकृतिक सितम के आगे वह पिछले एक दशक से बोझिल हुआ जा रहा है स्थितियां यहां इन बीते 10 वर्षो के भीतर इस तरह की निर्मित हो चुकी है कि प्राकृतिक चक्र की मार ने उसे पूरी तरह से बोझिल कर रखा है। छोटी जोत का किसान हो या बड़ी जोत का किसान आफत सब पर पड़ी है। 

 प्राकृतिक आपदा के बाद उसके ऊपर जिन्दगी की गाड़ी खीचने का मसला खड़ा हो गया है। समस्यायें एक नही अनेक है जिसका उसे सामना भी करना है। लेकिन शायद जेब में अब इनके बोझ ढोने के लिये कुछ नही बचा है। बच्चों की पढ़ाई, घर के खर्चे, बेटी और बेटों की शादियों सब कुछ तो अभी किसानों के सामने खड़ा हुआ है, इनका निर्वहन वह आने वाले दिनों में किस तरह करेगा इसका भी शायद कोई रास्ता हाल फिलहाल उसे नजर नही आ रहा है। हां यहां किसानों को प्राकृतिक आपदा के बाद आश्वासनों की झड़ी जरूर  लगा दी गयी है। लेकिन जैसा कि होता है आने वाले दिनों में उन्हें व्यवस्थाओं का उसी भांति सामना भी करना पड़ेगा। दरसअल दर्द बांटने के लिये मंगलवार को सब हमदर्दी का ढिढोरा पीट रहे थे लेकिन यह सब क्षणभंगुर आने वाले दिनों में साबित होगा। 

 लेकिन लाख टके का सवाल यह है कि हमेशा किसानों की बात और उनकी हिमायत करने के लिये सीना पीटने  वाले राजनेता कही नजर नही आये। यह बात किसानों को अंदर तक पीड़ा दे गयी है। उनका यह नजरिया उन्हें कतई भी पसंद नही आ रहा है। हालांकि यह बात मंगलवार के  संदर्भ में पूरी तरह से सटीक बैठी है लेकिन आने वाले दिनों में सत्ता पक्ष से जुड़े राजनेता हो या विपक्ष से किसानों से हमदर्दी दिखाने के लिये पीछे नही रहंेंगे। 


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