प्राकृतिक प्रकोप के बावजूद स्वर्गाश्रम के कुण्ड नहीं होते कभी खाली, पानी में रोगों से लडऩे की है

By: jhansitimes.com
Feb 13 2018 01:11 pm
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(न्यूज एडिटर, मदन यादव के साथ अंकित की ख़ास रिपोर्ट) झाँसी मुख्यालय से महज 25 किमी दूर स्थित बरुआसागर अपने आप में बुंदेलखंड का महत्वपूर्ण इतिहास समेटे हुए है। इसके गर्भ में कई ऐसी चमत्कारी, धार्मिक व ऐतिहासिक धरोराहरें छिपी हैं, जिन्हें जानने के बाद खुद पर गर्व महसूस होता है कि हम बुंदेलखंड की पावन धरती पर जन्मे हैं। ऐसा ही तीन चमत्कारी कुण्ड बरुआसागर के ऐतिहासिक स्वर्गाश्रम में स्थित झील पर भी हैं। बुंदेलखंड में चाहे जितना भी सूखा पड़ता रहे, पानी गिरे अथवा न गिरे, मगर ये कुण्ड हमेशा भरे रहते हैं। आज तक कोई इनके जलस्रोत का पता नहीं लगा सका है।

बरुआसागर के स्वर्गाश्रम में बनी चंदेलकालीन तालाब का सौंदर्य जहां देखते ही बनता है, इस तालाब के भरने के बाद गिरने वाला झरना सैलानियों को अपनी ओर स्वयं ही आकर्षित करता है। जानकार बताते हैं कि यहां बने मंदिर व तालाब चंदेलों ने बनवाए थे। चंदेलकालीन बने इस तालाब, मंदिर व अन्य स्थलों में अलग ही नक्काशी और दर्शनीय सौंदर्य मौजूद है। देश-विदेश के पर्यटक व सैलानी यहां आते हैं और इन अदभुत व ऐतिहासिक स्थल को देखकर सुखद अनुभूति महसूस करते है। 

पूर्व पालिकाध्यक्ष बरुआसागर मेहेर सागर यादव बताते हैं कि सैकड़ों वर्षों पूर्व कुछ संत व महात्मा यहां आए और उन्होंन कठोर तपस्या की। इस तपस्या के परिणामस्वरूप उन्हें यहां जलस्रोत प्राप्त हुए। यह जलस्रोत यहां बने तीन कुण्ड को हमेशा पानी से भरा रखते हैं। बुंदेलखंड में लगातार पड़ रहे सूखे से तालाब नहीं भरा और तीन वर्षों से पानी न होने के कारण झरना भी सूख गया। इसलिए पानी की चादर नहीं आई। लेकिन इन तीनों चमत्कारी कुण्डों में हमेशा पानी भरा रहता है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिकों ने इन कुण्डों के जलस्रोतों का पता लगाने की कोशिश की, मगर वह सफल नहीं हुए। हां, उन्हें इस बात की जानकारी अवश्य हो गई कि इन कुण्डों के पानी में सल्फर की मात्रा भी शामिल है। जो शारीर के विभिन्न रोगों, चर्म रोग आदि में बेहद लाभदायक है। दूर-दूर से लोग इस पानी से नहाने आते हैं, और स्वास्थ्य लाभ पाकर ईश्वर का धन्यवाद करते हैं। 


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