बुंदेलखंड: शराब के नशे पर भारी पड़ गया यह नशा, गांव में बह चली बदलाव की बयार

By: jhansitimes.com
Sep 09 2017 08:03 pm
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उरई। जिले का लुधियात इलाका पीढ़ियों से देशी शराब भटिटयों के लिए बदनामी के सागर में गर्क रहा है। लेकिन इस इलाके में रामधुन के साथ प्रभातफेरी की परिपाटी ने मुहम्मदाबाद गांव को अब इस इलाके में नशा मुक्ति के लाइट पोस्ट के रूप में खड़ा कर दिया है।डेढ़ दशक से ज्यादा समय पहले इस मूक क्रांति का सूत्रपात गांव के नौजवानों की दशा से दुखी होकर जगदीश बाबू और रामदास नन्ना ने किया था। 5 हजार की आबादी के इस गांव में भी शराब का तांडव तब छाया हुआ था। परिवार बर्बाद हो रहे थे, नौजवानों की सेहत चैपट थी। आज गांव की दशा बदल गई है। सुबह 4 बजे सिद्धेश्वर मंदिर से रामधुन के साथ प्रभातफेरी ढोलक, मंजीरा, झांझर और करताल बजाते हुए ग्रामीण निकलते हैं तो एक अलग समां बंध जाता है। भाईचारे का मोहक विन्यास प्रभातफेरी के तानेबाने में नजर आता है। ढोलक पर थाप जगदीश बरार देते हुए घूमते है, मंजीरा पूर्व प्रधान रमेश राजपूत, करताल रामदास अहिरवार और झींका बजाने का जिम्मा रामनारायण राजपूत संभालते हैं। इनकी लयताल और सुर भक्ति भावना की हिलोरों में गांव का जनमानस डूबने-उतराने लगता है। 

सिद्धेश्वर मंदिर के बाद शंकर जी के मंदिर, रामजानकी मंदिर, हनुमान जी का मंदिर, बड़ी माता, खेरापति और गुज्जन हरे के शंकर जी के मंदिर में मत्था टेकते भक्त वापस सिद्धेश्वर मंदिर में आकर प्रभातफेरी का चक्र पूर्ण करते हैं। प्रभातफेरी में नियमित प्रतिभाग करने वालों में मुख्य रूप से हरिश्चंद्र, रामसिंह, भारत सिंह, पुष्पेंद्र, बाबा बब्बा, परुषराम टोला वाले बृजकिशोर राजपूत, शशि राजपूत, दुर्गाचरण, शिवप्रसाद, विकास, सौरभ, टिंकू राजपूत, मूलचंद्र, वंशनारायण, रामप्रसाद बरार, राजवीर अहिरवार, रामप्रसाद श्रीवास और अनुज राजपूत अग्रणी हैं। फेरी लगाने में डेढ़ घंटे लग जाते हैं। सुबह 4 बजे जागने के लिए रात में जल्दी सोना पड़ता है। रामधुन के साथ फेरी की इस दिनचर्या की वजह से मास-मदिरा का शौक लोगों में खुद ही छूटने लगा है क्योंकि शराब पीने के मतलब है कि देर रात तक जागना और तय है कि इसके बाद प्रभातफेरी के समय उठने की स्थिति नही रहेगी। 

प्रताःकालीन बिहार से लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा का भी मंत्र मिलता है। मानसिकता भक्तिपूर्ण बन जाने से कुंठा, तनाव जैसे मनोविकारों को विराम लग जाने के चलते आपस में लड़ाई-झगड़े की कुरीति पर भी पूरी तरह ब्रेक लग गया है। मुहम्मदाबाद गांव के कायकल्प को देखकर समीपवर्ती दूसरे गांवों के लोग भी रामधुन के साथ प्रभातफेरी निकालने के लिए आकर्षित हो रहे हैं जिससे महिलायें बहुत खुश हैं। आदमियों की शराब छूटने की सबसे ज्यादा मुराद तो महिलाओं को ही होती है।


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