बुंदेलखंड विश्वविद्यालय: निर्माण कार्यों में हुआ करोड़ों का घोटाला

By: jhansitimes.com
Jun 20 2019 08:11 am
2576

झांसी। बीते वर्षों बुंदेलखंड विश्वविद्यालय को नया रूप देने के लिये कई प्रस्ताव पास हुये, जिनमें कई इमारतें, पार्क व अन्य प्रस्ताव थे। जिन पर मुहर लगायी गयी और उन निर्माण कार्यों को कराने की अनुमति मिली, लेकिन अपनी हरकतों से बाज न आने वाले विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की मिलीभगत से उस निर्माण कार्यों में करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया, फर्जी बिल पास किये गये, ठेकेदारों ने समय मुताबिक कार्य नहीं किया, तब भी उनके द्वारा दिये गये बिलों को बिना जांच किये पास किया गया। पहले इस मामले की शिकायत विश्वविद्यालय के कुलपति से की गयी। बाद में मंडलायुक्त से की गयी। तब कोई सुनवाई नहीं हुयी तब इस शिकायत को शासन से किया गया। इसके बाद इस मामले में बिजिलेंस गहरायी से जांच कर रही है। इसमें लगभग आधा दर्जन से अधिक विश्वविद्यालय के कर्मचारी और ठेकेदार जांच के दायरे में हैं। इस घोटाले की जांच से बचने के लिये फंसे हुये कर्मचारी व अफसर तरह तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।

मालूम हो कि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय का स्वरूप जो इस समय है, वह पहले नहीं था। इसका स्वरूप बदलने के लिये बीते वर्षों विश्वविद्यालय में आये तत्कालीन कुलपति द्वारा कई प्रस्ताव बनाये गये और उन प्रस्तावों पर मुहर भी लगी तथा विश्वविद्यालय में कई इमारतों का निर्माण हुआ और कई पार्क बनाये गये। इन निर्माण कार्यों के दौरान काफी घपलेबाजी की गयी। जिस मामले की लिखित शिकायत बीते वर्ष की गयी थी, उस शिकायत को काफी दबाया गया, लेकिन आखिरकार वह शिकायत वहां तक पहुंच गयी, जहां से कार्यवाही होनी थी। हालांकि शिकायतकर्ता विश्वविद्यालय में कार्यरत कर्मचारी ही है। निर्माण कार्य के घोटाले की जांच में विश्वविद्यालय के आधा दर्जन से अधिक कर्मचारी व ठेकेदार शामिल हैं जिन्होंने कार्य किया है। की गयी शिकायत में बताया गया है कि निर्माण में जिस पत्थर का प्रयोग करना चाहिये, वह पत्थर नहीं लगाया गया। पार्कों में जिस ईंट-पत्थर का व अन्य सामान का प्रयोग करना था, जो वर्क आर्डर में था, उसका प्रयोग नहीं किया गया। जिस कार्य का जो समय निर्धारित था, उस कार्य को समय के मुताबिक नहीं किया गया। जिस निर्माण कार्य की जितनी सीमा है, उस सीमा से अधिक कार्य दिखाकर बिल बनाकर पास कराये गये। जिसमें विश्वविद्यालय के कर्मचारी ही शामिल रहे और उन्होंने मिलकर सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगा दिया। जब इस मामले की शिकायत विश्वविद्यालय के कुलपति से की गयी तो उन्होंने मामले को काफी दबाने का प्रयास किया और यही शिकायत मंडलायुक्त से की गयी तो वहां भी कोई कार्यवाही नहीं हुयी। मंडलायुक्त के यहां की गयी शिकायत अभी विचाराधीन है। जब यह शिकायत शासन तक पहुंची, तब इसमें जांच के आदेश किये गये। बिजिलेंस टीम कई बार विश्वविद्यालय में मामले की जांच करने आ चुकी है। अभी जांच चल रही है, देखना है कि जांच में फंसे विश्वविद्यालय के कर्मचारी व उन ठेकेदारों पर क्या कार्यवाही होती है, यह जांच के बाद ही पता चलेगा।

पार्कों में हुआ हरी घास का घपला

विश्वविद्यालय में जब पार्क बनकर तैयार हो गये। उन पार्कों में पेड़-पौधे व हरी घास लगना थी, उस दौरान ठेकेदार द्वारा वर्कआर्डर पर निर्धारित की गयी हरी घास व पेड़-पौधे नहीं लगाये, बल्कि खराब क्वालिटी की हरी घास लगायी। और तो और पार्क की जितनी सीमा थी, उस सीमा से अधिक जगह पर घास लगाने का बिल बना दिया गया और बिना जांच किये कर्मचारियों ने पार्क की सीमा से अधिक लगायी गयी घास का बिल पास कर दिया गया। वह भी जांच के दायरे में है।

रंगाई-पुताई में भी हुआ घपला

विश्वविद्यालय के अंदर रंगाई-पुताई में काफी घपलेबाजी की गयी है। वर्कआर्डर के मुताबिक न तो कलर प्रयोग किया गया और न ही पुताई में सीमा निर्धारित हुयी। जब चाहे जहां की रंगाई-पुताई कराने के नाम पर फर्जी बिल पास करा लिये गये।

झुलसा कर्मचारी करा रहा उपचार, नहीं मिला न्याय

बीते दिनों विश्वविद्यालय में कार्यरत एक कर्मचारी करंट लगने से झुलस गया था। उसका उपचार मेडिकल कालेज में चल रहा है। बताया गया है कि कर्मचारी माता प्रसाद विश्वविद्यालय में प्लंबर का कार्य करता है। लेकिन उसके सीनियर अफसर द्वारा जबरन विद्युत का कार्य कराया गया, जबकि वह विद्युत कार्य में कुछ नहीं जानता था। अधिकारी द्वारा जबरदस्ती करने पर वह विद्युत का कार्य करने गया, तभी अचानक डी.पी. जलने से उसे करंट लग गया और वह बुरी तरह झुलस गया। विश्वविद्यालय में एम्बुलेंस होने के बावजूद भी वह कर्मचारी स्वयं अपनी गाड़ी पर दूसरे के माध्यम से सहारा लेकर मेडिकल कालेज पहुंचा। बाद में उसके परिवार वालों को सूचना दी गयी। इस मामले में माता प्रसाद की पत्नी ने पहले लिखित शिकायत विश्वविद्यालय के कुलपति से की, लेकिन कुलपति द्वारा इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की गयी। तब उसने इसकी शिकायत जिलाधिकारी व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से की। इस शिकायत के आधार पर पुलिस चौकी प्रभारी विश्वविद्यालय द्वारा जांच की गयी और जांच को ठण्डे बस्ते में डाल दिया गया। माता प्रसाद की पत्नी व अन्य परिवार वाले जब दोबारा शिकायती पत्र लेकर नवाबाद थाने पहुंचे तो वहां पर नवाबाद थाना प्रभारी द्वारा उसे यह कहकर टहला दिया गया कि मामला विश्वविद्यालय का है और विश्वविद्यालय ही इस मामले में जांच करेगा। उसने फिर से प्रदेश के राज्यपाल व मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगायी है।

मिलीभगत से पहाड़ी की कटान जारी

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के ठीक पीछे ऐतिहासिक माता का मंदिर है, जिसे कैमासन माता मंदिर के नाम से जाना जाता है और उस मंदिर में हजारों श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं। यह पहाड़ी वर्षों पुरानी है। लेकिन विश्वविद्यालय के ठीक पीछे कुछ जमीन माफियाओं द्वारा पहाड़ी को काटा जा रहा है। पहाड़ी कटान के दौरान बीते महीनों विश्वविद्यालय की बाउंड्री टूट गयी थी, जिस पर मामूली बबाल भी हुआ था, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की मिलीभगत से बिना हस्तक्षेप के पहाड़ी की कटान जारी है। बीते दिनों पहाड़ी के दूसरी तरफ खुदाई के दौरान दो मजदूरों की मौत हुयी थी, उस समय प्रशासन द्वारा यह पत्र जारी किया गया था कि किसी व्यक्ति के भूमिधरी नंबर में अगर मिट्टी का टीला है या मिट्टी है तो वह बिना किसी की परमीशन लिये हटा सकता है। जो लोग पहाड़ी की कटाई कर रहे हैं, उनके पास किसी न किसी व्यक्ति के नाम भूमिधरी नंबर है। इन लोगों का भूमिधरी नंबर कहां से आया, यह तो प्रशासन, तहसील व लेखपालों से ज्यादा कोई नहीं जानता। लेकिन जानकारों द्वारा जो बताया गया है कि जिस भूमिधरी नंबर की कटाई की जा रही है, वह भूमिधरी नंबर आर्मी की फायरिंग रेंज में आता है और कारोबारियों द्वारा दूसरी साइड पहाड़ी की कटाई की जा रही है। हालांकि यह जांच का विषय है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की मिलीभगत होना उनके लिये प्रश्नचिह्न बन रहा है और विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवालिया निशान भी लग रहे हैं।


comments

Create Account



Log In Your Account



छोटी सी बात “झाँसी टाइम्स ” के बारे में!

झाँसी टाइम्स हिंदी में कार्यरत एक विश्व स्तरीय न्यूज़ पोर्टल है। इसे पढ़ने के लिए आप http://www.jhansitimes .com पर लॉग इन कर सकते हैं। यह पोर्टल दिसम्बर 2014 से वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई की नगरी झाँसी (उत्तर प्रदेश )आरंभ किया गया है । हम अपने पाठकों के सहयोग और प्रेम के बलबूते “ख़बर हर कीमत पर पूरी सच्चाई और निडरता के साथ” यही हमारी नीति, ध्येय और उद्देश्य है। अपने सहयोगियों की मदद से जनहित के अनेक साहसिक खुलासे ‘झाँसी टाइम्स ’ करेगा । बिना किसी भेदभाव और दुराग्रह से मुक्त होकर पोर्टल ने पाठकों में अपनी एक अलग विश्वसनीयता कायम की है।

झाँसी टाइम्स में ख़बर का अर्थ किसी तरह की सनसनी फैलाना नहीं है। हम ख़बर को ‘गति’ से पाठकों तक पहुंचाना तो चाहते हैं पर केवल ‘कवरेज’ तक सीमित नहीं रहना चाहते। यही कारण है कि पाठकों को झाँसी टाइम्स की खबरों में पड़ताल के बाद सामने आया सत्य पढ़ने को मिलता है। हम जानते हैं कि ख़बर का सीधा असर व्यक्ति और समाज पर होता है। अतः हमारी ख़बर फिर चाहे वह स्थानीय महत्व की हो या राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय महत्व की, प्रामाणिकता और विश्लेषण के बाद ही ऑनलाइन प्रकाशित होती है।

अपनी विशेषताओं और विश्वसनीयताओं की वजह से ‘झाँसी टाइम्स ’ लोगों के बीच एक अलग पहचान बना चुका है। आप सबके सहयोग से आगे इसमें इसी तरह वृद्धि होती रहेगी, इसका पूरा विश्वास भी है। ‘झाँसी टाइम्स ‘ के पास समर्पित और अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ संवाददाताओं, समालोचकों एवं सलाहकारों का एक समूह उपलब्ध है। विनोद कुमार गौतम , झाँसी टाइम्स , के प्रबंध संपादक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। जो पूरी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता का पिछले लगभग 16 वर्षों का अनुभव है। के पी सिंह, झाँसी टाइम्स के प्रधान संपादक हैं।

विश्वास है कि वरिष्ठ सलाहकारों और युवा संवाददाताओं के सहयोग से ‘झाँसी टाइम्स ‘ जो एक हिंदी वायर न्यूज़ सर्विस है वेब मीडिया के साथ-साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना विशिष्ट स्थान बनाने में कामयाब रहेगा।