बुंदेलखंड की नैय्या फंसी मझधार में, चुनावी वर्ष में भाजपा और कांग्रेस की बढ़ रही मुश्किल !

By: jhansitimes.com
Dec 26 2018 01:53 pm
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JHANSI: 2019 लोकसभा चुनाव होने वाले हैं और काफी समय से बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाए जाने की उठ रही मांग थमने का नाम नहीं ले रही। हालांकि, ये मांग अभी की नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, झारखंड और तेलंगाना जैसे राज्यों के भी गठन के पहले से ये मांग होती रही है। यूपी और एमपी के कुछ जिलों को मिलाकर बुंदेलखंड राज्य की स्थापना की मांग की जा रही है।

हालांकि, 2014 लोकसभा चुनाव के चुनावी मंच से सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने तीन वर्ष के भीतर बुंदेलखंड राज्य बनाने का दवा किया था | लेकिन केंद्र में  भाजपा की यदि सरकार ने इस मामले को कभी तवज्जो नहीं दी। पिछले कई दिनों से झाँसी और महोबा जिला मुख्यालय पर बुंदेलखंड राज्य समर्थक  संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं । और इनका दावा है कि ये विरोध तब तक जारी रहेगा, जब तक इस मामले पर कोई फैसला नहीं आ जाता। आज भी झाँसी के कचहरी चौराहे पर  देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह और केंद्रीय मंत्री उमा भारती का पुतला फूकने का प्रयास किया गया जैसे पुलिस ने नाकाम कर दिया | 

2007 में यूपी की तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने अलग बुंदेलखंड राज्य बनाने की पेशकश की थी, उस समय भाजपा और कांग्रेस ने भी इसका समर्थन किया था। 2012 में मायावती के सत्ता से बाहर होने के बाद ये मामला ठंडे बस्ते में चला गया। 2019 लोकसभा चुनाव  सुगबुगाहट के बीच राज्य समर्थक  इस मांग को लेकर उग्र आंदोलन की तैयारी में हैं जिससे सत्तारूढ़ भाजपा की मश्किलें बढ़ सकती हैं।

लोकसभा के चुनावी वर्ष में ये मामला फिर गर्मा गया है। कांग्रेस और बसपा ने अलग राज्य का समर्थन किया है। कांग्रेस इसे घोषणा पत्र में शामिल करने पर विचार भी कर रही है। वहीं, भाजपा इस मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। सवाल ये उठता है कि भाजपा इतने बड़े आंदोलन के बावजूद फैसला लेने में इतना समय क्यों ले रही है?

दरअसल, उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश में विभाजित बुंदेलखंड को अगल राज्य घोषित करना भाजपा के लिए इतना आसान नहीं है, क्योंकि इसमें दोनों राज्यों की सहमति की जरूरत है। कई मायनों में ये फैसला चुनौतिपूर्ण है। ऐसे में अगर बुंदेलखंड को अलग राज्य का दर्जा देने की घोषणा भाजपा नहीं करती है तो भाजपा को यहां के वोटरों की आगामी चुनाव में नाराजगी झेलनी पड़ सकती है।

बता दें कि भाजपा के पास यूपी के बुंदेलखंड की 19 सीटें हैं। वहीं, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बात करें तो कभी ये भी बुंदेलखंड को अलग राज्य बनाने की पैरवी करते रहे हैं, लेकिन अब उनका रवैया काफी ढुलमुल है। इसी वजह से केंद्र और दोनों राज्यों पर वादा खिलाफी के भी आरोप लग रहे हैं। इस क्षेत्र के वोटरों को लुभाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने फरवरी 2018 में 20 हजार करोड़ के पैकेज का एलान भी किया था। ऐसे में भाजपा इस मांग को हैंडल करने की क्या रणनीति बनाती है, ये देखना काफी रोचक होने वाला है।


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