मुफलिसी ने छीन लिया बच्चों का बचपन

By: jhansitimes.com
Oct 13 2017 05:56 pm
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(रिपोर्ट-सैय्यद तामीर उद्दीन) महोबा। किसी शायर की यह पंक्ति गरीबी कान छिदवाती है तिनका डाल देती है, मुफलिसी को रेखांकित करती है। यह तस्वीर भी कमोवेश उसी बात को साबित कर रही है, जिस उम्र में इन नौनिहालों को विद्यालय जाना चाहिये था उन खुशियों को गरीबी ने  छीन लिया। उन पर कम उम्र में परिवार का खर्चा चलाने का बोझ कंधों पर आ पड़ा है। यह तस्वीर जिम्मेदारों को आइना दिखाने का काम कर रही है लेकिन अंधेर की बात यह है कि इस तरह एक नही अनेक उदाहरण रोजाना दिखाई पड़ते है लेकिन जिम्मेदार है कि सबक लेने को तैयार नही है। 

  मुफ्त शिक्षा को लेकर रोजाना  हुकूमत तमाम तरह के दावे और इस संदर्भ में दलीले दे रहे है। लेकिन जिन्हें इस दिशा में कारगर कदम और ठोस कार्यक्रम चलाने है वे योजना को पलीता लगाने में लगे हुये है। 14 आयु वर्ष तक के बच्चों को मुफ्त शिक्षा का प्रबन्ध किया गया है। हर साल नवीन शिक्षण सत्र आरम्भ होते ही घर, घर जाकर उन बच्चों का पता लगाना है जो मुफलिसी के चलते शिक्षा नही ग्रहण कर पा रहे है। उनको विद्यालयों तक ले जाने का काम किया जाना है, लेकिन यह सारी कसरत इन मुफिलस बच्चों को विद्यालय तक ले जाने के बजाय कागजों को तंदुरूस्त किये जाने का काम किया जाता है। जबकि हकीकत इससे ठीक विपरीत है, लेकिन उन स्थिति और  परिस्थितियों की कभी भी ठोस तरीके से जांच पड़ताल नही की जाती है यही वजह है कि अभी भी न जाने कितने गरीब परिवार के बच्चे शिक्षा का प्रसाद ग्रहण करने के बजाय परिवार का खर्चा चलाने के लिये दर,दर भटक कर भिक्षा मांग रहे है। यह बच्चे भी उसी बात को साबित करने का काम कर रहे है जो शहर की गलियों और सड़कों में घूमकर दो वक्त की रोटी का प्रबन्ध करने में लगे हुये है किसी को इन पर दया आ जाती है तो कही इन्हें डांट, फटकार का भी सामना करना पड़ता है, मजबूरी इनसे सब कुछ कराने को मजबूर किये हुये है। 


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