बुंदेलखंड में एल्कोहोलिक हेपेटाॅइटिस का डाक्टर चितरंजन ने ढूंढा नया इलाज, पहले से ज्यादा कारगर

By: jhansitimes.com
Mar 06 2017 09:21 am
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झांसी। डाक्टर चितरंजन दुवूर अमेरिका में अपने काम से भारतीय प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। उन्होंने अत्यधिक शराब पीने के कारण होने वाली बीमारी एल्कोहोलिक हेपेटाॅइटिस के इलाज में बहुत ही महत्वपूर्ण काम किया है। यह बीमारी मरीजों को पूरी तरह से तोड़ देती है। इसका शुरूआती स्टेज पर पता नहीं चलता है, जिस कारण मरीज के बचने की संभावना भी कम हो जाती है। 

डा. चितरंजन दुवूर ने कोलार से एमबीबीएस किया है। डाक्टर की पढ़ाई करने के बाद वह यूके चले गए। वह रायल कालेज आॅफ जनरल पे्रक्टिशनर के मेंबर हैं। वर्तमान में डाक्टर चितरंजन यूनिवर्सिटी आॅफ आरकांसास के मेडिकल साइंसेज विभाग में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट में फेलो हैं। डा. दुवूर ने एल्कोहोलिक हेपेटाॅइटिस रोग के इलाज पर काफी महत्वपूर्ण कार्य किया हैं। यहां बताते चले कि ज्यादा शराब के सेवन से लिवर में सूजन आ जाता है, जिससे लिवर ठीक से काम करना बंद कर देता है और व्यक्ति की मौत हो जाती है। इस समस्या से लोगों को निजात दिलाने के लिए डाक्टर दुवूर ने एल्कोहोलिक हेपेटाइटिस पर बेहद महत्वपूर्ण काम किया है। एल्कोहोलिक हेपेटाइटिस की बीमारी से मरीजों का जीना बहुत मुश्किल हो जाता है। इस बीमारी का सबसे दुर्भाग्यपूर्ण पक्ष है कि इसका प्रारंभिक स्टेज पर पता नहीं चलता है, जिस कारण से इस बीमारी से मरीजों को बचाना बहुत मुश्किल हो जाता है। शराब के अलावा मेटाॅबोलिक डिजीज, ऐबोसिटी एयर डिजीज से भी लिवर हेपेटाइटिस हो सकता है। इस आधार पर डाक्टर दुवूर का काम महत्वपूर्ण है। क्योंकि, मेडिकल क्षेत्र में तमाम शोधों और डाक्टरों की लाख कोशिशों के बावजूद इस बीमारी का प्रांरभिक स्टेज पता नहीं चल सकता है।

अब डाक्टर चितरंजन प्रेडनिसोलोने विधि से इलाज करके मरीज की जिंदगी को और लंबी उम्र देते हैं। यहां बताते चले कि पश्चिमी देशों में शराब के अत्यधिक चलने के कारण एल्कोहोलिक हेपेटाॅइटिस बहुत ही सामान्य बीमारी बनती जा रही है। डा. दुवूर अमेरिका में एक प्रसिद्ध इंडोक्रिनोलोजिस्ट हैं। और इंटरनल मेडिसिन से बोर्ड सर्टिफाइड हैं। डाक्टर दुवूर मेडिसिन और पीडियाट्रिक्स में सिद्धहस्त हैं। वह फैटी लिवर डिजीज, डायबिटीज और थाॅयराइड डिजीज आदि का बेहतर तरीके से इलाज करते हैं। इसकी रिपोर्ट । अमेरिकन जर्नल आॅफ गेस्ट्रोइंटेरोलाॅजी में प्रकाशित हुआ हैं। यह जर्नल गेस्ट्रोइंटेरोलाॅजी का सबसे महत्वपूर्ण जर्नल है।


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