क्रेशर निगल रहे जमीनों की उर्वरा शक्ति, मानकों को दर किनार कर पीसा जा रहा पत्थर

By: jhansitimes.com
Oct 10 2018 06:14 pm
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रिपोर्ट-सैय्यद तामीर उद्दीन महोबा। अनगिनत क्रेशर मशीनों से उड़ती डस्ट, धूल, के धुंआं ने आस-पास की जमीनों की उर्वरा शक्ति क्षीण कर दी है, इन खेतों पर उड़ती डस्ट की मोटी, मोटी परते जमा हो गई है, अच्छी खासी उपजाऊ जमीनों को डस्ट ने बेकार कर दिया है, किसानों को इन जमीनों से कुछ लाभ नहीं मिल रहा है, लिहाजा क्रेशरों के ईर्द, गिर्द जिनकी जमीनें है वह उन्हें औने, पौने दामों में बेंच रहे है। 

 कबरई ने बीते कुछ वर्षों के भीतर पत्थर उद्योग नगरी के रूप में ख्याति हासिल कर ली है, करीब 10 से 12 के दायरे में तीन सैकड़ा के आस-पास क्रेशर प्लांट डहर्रा गांव शुरू हो जाते है, और इनका तांता कानपुर मार्ग तक खत्म नहीं होता, मार्ग के दोनों तरफ क्रेशर प्लांटों में दिन रात पहाड़ों से निकालें जाने वालें पत्थरों को पीसा जाता है, दिन भर और रात को इस मार्ग पर डस्ट का धुआं ही धुंआ उड़ता दिखाई पड़ता है, रात के वक्त यहां दौड़ने वालें यात्री वाहनों की लाइट भी काम नहीं कर पाती है, उन्हें इस 10 कि0 मी0 मार्ग को बड़े सावधानी के साथ पार करना पड़ता है, चालक कि जरा सी असावधानी सवारियों के लिये मुसीबत बन कर खड़ी हो सकती है। क्रेशर के नजदीक भूमियांें की उर्वरा शक्ति लगातार क्षीण होती जा रही है, जिसकों लेकर किसान बेहद परेशान है। 

क्रेसरों के अगल, बगल की खेती  योग भूमि लगातार धूल, डस्ट और चलती क्रेसरों और पिसते पत्थरों के चलते जहां अपनी उर्वरा शक्ति को खो रही है वही दूसरी तरफ इन खेतों से जुड़े किसानों को उपज का सही लाभ न मिलने के कारण वे इसे औने-पौने दामों पर बेंच रहे है। उधर क्रेसरों के श्रृखंला जनपद मुख्यालय से कोई 10 किलो मीटर दूर डहर्रा से शुरू होकर बांदा और कबरई मार्ग पर तकरीबन  20 किलो मीटर तक फैल गयी है। जहां दिन, रात धूल और डस्ट उड़ने के कारण अक्सर हादसे होते रहते है। लेकिन क्रेसरों का पहिया इस सब के बाद बिना विघ्न बाधा के चलता रहता है। 

नियम और मानक उड़ रहे हवा में 

मानक और नियमों का क्रेसर संचालकों द्वारा पालन नही किया जा रहा है क्रेसर के चलते समय पानी युक्त फव्वारों का चलना अनिवार्य है, पेड़, पौधा का परिसर में होना भी आवश्यक है फस्टएड बाक्स से लेकर अग्निशमन यंत्रों का भी क्रेसर पर होना जरूरी है इतनी सब अनिवार्यता और अर्हता पूरी करने के बाद ही क्रेसर चलाया जाना जरूरी बनाया गया है लेकिन इन नियमों का यहां शायद ही कोई पालन करता हो उधर क्रेसर चलाये जाने का समय जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित कर रखा गया है, जिसमें दिन के समय क्रेसर चलाना निषेध है लेकिन वर्जित समय में भी क्रेसर धड़ल्ले के साथ चलती है, औचक निरीक्षण और जांच पड़ताल के दौरान ही यहां नियमों और समय का पालन किया जाता है। उसके बाद नियम और  समय हवा में उड़ा दिये जाते है। 


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