दस रुपए में बिक रही मौत, प्रशासन की आंखों में बंधी पट्टी, अधिकारी है मेहरबान

By: jhansitimes.com
Sep 14 2018 01:49 pm
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सुप्रीम कोर्ट के रोक के बाबजूद मिश्रित गुटखा सरेआम बिना किसी खौफ के बेंचा जा रहा है और इसको रोकने के जो प्रमुख विभाग है वों आंखो में पटटी बांधे हुए है जबकि इसका सेवन करने से लोग मौंत के काल में सो जाते है फिर भी इस पर कोई कडी कार्यवाही नहीं होती और यह अवैध धंधा दिन दूना रात चौगुना फल फूल रहा है जिससे जहां राजस्व को लंबी हानि हो रहीं है वहीं कैंसर जैसी घातक बीमारी भी दस रूपए में लोग अपने हिस्सें में ला रहें है।

जानकारी के अनुसार मिश्रित गुटखें पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है इतना हीं नहीं पूरे हिन्दुस्तान में इस नगर में कैंसर के रोगी सबसे अधिक है और जो कि तीसरे नंबर पर आता है। कई बार गोष्ठियों के माध्यम से लोगो को सचेत किया गया। गुटखा घातक है इसका सेवन न करें, परंतु लोग अपनी आदतों से बाज नहीं आ रहें है। किसी जमाने में एक रूपए में मिलने वाला गुटखा अब दस रूपए में उपलब्ध हो रहा है और इसे खाने वालो की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रहीं है। कई बार छापें डाले गए। २५ से ५० लाख के बीच में इनका माल पकड़ा गया जब्त हुआ लेकिन इन गुटखा माफियाओं पर इसका कोई असर नहीं पड़ा। सुपाड़ी, तंबाकू सब कुछ अवैध रूप से आती है जिसका कहीं कोई सजरा नहीं होता है और जो गुटखा बिक रहा है वों भी बिना टैक्स अदायगी के प्रतिदिन लाखों रूपए की इस अवैध गुटखें की बिक्री है। यह गुटखा सुबह बसों से अन्य जनपदों के लिए रवाना किया जाता है। कोबरा से लेकर डायल १०० आदि इस नजारा को देखती रहती है परंतु कार्यवाही नहीं होती है। पकडऩे में किसी का फायदा नहीं है, छोडने में सभी की हिस्सेदारी तय होती है यही वजह है कि गुटखा माफिया बिना किसी कानून की परवाह किए अपना काम करने में लगे हुए है। 

व्यापार कर में सचल दस्ता बना हुआ है, एक्साइज में अधिकारी मौजूद है, वहीं रसद एवं खाद विभाग में इनकी पूरी जानकारी होना चाहिए और कितनी तादाद में गुटखा बन रहा है यह कुछ भी विभागो के पास नही हैं। सब कुछ चोरी छिपे हो रहा है तो फिर परमीशन की जरूरत क्या है। कुछ दिन पहले एक अभियान चलाया गया था और जिसमें यह तय किया गया था कि सार्वजनिक जगह के आसपास न गुटखा बिकेगा न ही किसी भी तरह की कोई गंदगी रहेंगी, परंतु इस अभियान का कहीं कोई मकसद नजर नहीं आ रहा है। कहा जायें तो गलत नहीं होगा कि तंबाकू मुक्त कार्यालय में भी इसका शौक फरमा रहें है। गुटखा खाने वाले कुछ समय बाद एक नहीं अनेक बीमारियों से ग्रस्त हो जाते है और जिसका इलाज संभव नहीं है और उनके इस शौक को उनके परिवारीजन झेलते है। ऐसे परिस्थितियों में भी इस मिश्रित गुटखे का चलन बंद नहीं हो रहा है। 

जनहित में जिलाधिकारी से मांग की जाती है कि वों शहर में बन रहें अवैध गुटखे पर प्रतिबंध लगवाए ताकि जो दस रूपए में लोगो की मौत हो रही है वों सिलसिला रूक सकें।


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