डिजिटल इंडिया में आज भी ढोया जाता है सिर पर मैला

By: jhansitimes.com
Jan 13 2018 03:25 pm
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जालौन। माधौगढ़ तहसील की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत सरावन के मजरा बदन्नपुरा में आज भी सदियों पुरानी परंपरा जारी है। यहां लोग सिर पर मैला ढोने को मजबूर हैं। आजादी के सत्तर साल बीत जाने के बाद भी यहां मैला सिर पर ढोने की परंपरा को बेहिचक जारी रखे हैं। जबकि शासन ने सिर पर मैला ढोना एक अपराध करार दिया है। 

 

शुष्क और झड़ाऊ शौचालय बने गांव में 

जालौन की माधौगढ़ तहसील के मजरा बदन्नपुरा में आज भी 80 प्रतिशत घरो में शुष्क  व झड़ाऊ शौचालय बने हैं। यहां सफाई के लिए मलिन बस्ती के लोग जाते हैं और सफाई के बाद मैला सिर पर ढोकर उसे निस्तारित किया जाता है। यहां के ग्रामीणों को आज तक शासन और पंचायत से जारी होने के बावजूद सरकारी शौचालय नहीं मिले। इस कारण यहां एक भी आधुनिक शौचालय नहीं हैं। 

 

कमीशन दो, शौचालय लो

यहाँ के निवासी दीपू, बृजेश, लालाराम ,मैकु, मेंबर खान, जमील खान आदि निवसियों का कहना है कि शौचाल्य के नाम पर कमीशन का खेल चल रहा है। कमीशन दो और शौचालय लो। कुछ ऐसा ही हो रहा इस क्षेत्र के साथ भी। गांव वालों ने काफी प्रयास किया, मगर सरकारी कर्मचारियों को क्षेत्र के विकास की नहीं, अपनी जेबों की चिंता है। उनका कमीशन नहीं मिला तो यहां सरकारी शौचालय नहीं बन सके। 

 

मजबूरी है मैला ढोना, बच्चे जो पालना हैं

यहां की मलिन् जाति के लोगों ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि क्या करें, बच्चों का पेट पालना है। इसलिए आज भी इस घृणित कार्य को अंजाम देना पड़ता है। मनरेगा में भी उन्हें तब ही काम मिलता है, जब वह मनरेगा में काम मांगते हैं तो वहां भी उनसे कमीशन मांगा जाता है। अब कमीशन ही बांटते रहेंगे तो खाएंगे क्या? इसलिए सिर पर मैला ढोना उनकी मजबूरी बन गई है।


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