आज भी महत्वपूर्ण पदों पर हैं बसपा में नसीमुद्दीन के समर्थक, संगठन की जड़ों में डाल रहे मट्ठा

By: jhansitimes.com
Aug 07 2017 09:51 am
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 बहुजन समाज पार्टी को कमजोर करने की साजिश अभी भी रची जा रही है। पार्टी से निष्कासित होने के बाद कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कहा था कि मैं बसपा को बर्बाद कर दूंगा। ऐसे नेता के शुभचिंतक आज भी पार्टी में रह कर महत्वपूर्ण पदों पर बने हुए हैं। संगठन को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बसपा सुप्रीमो मायावती अभी भी भितरघातियों को समझने में कहीं न कहीं भूल कर रही हैं। जिसका परिणाम है कि वह आज भी पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर नसीमुद्दीन के नजदीकी पदाधिकारी बने हुए हैं तथा संगठन की जड़ों में मट्ठा डालने का काम कर रहे हैें। 

वैसे देखा जाए तो पार्टी से बड़े बेआबरू होकर निकाले गये नसीमुद्दीन ने अपना एक उद्देश्य बनाया था कि बसपा को बर्बाद करना है। वह अब बहुजन समाज पार्टी के निष्कासित और नाराज नेताओं को जोडऩे का प्रयास  कर रहे हैं। बसपा के वोट में सेध लगाने में जुटे हुए हैं। हालांकि उन्हें अभी तक यह सफलता नहीं मिल सकी है। वैसे देखा जाए तो जिस प्रकार मयावती ने उन्हें पद की गरिमा से सुशोभित किया था वह उस लायक नहीं थे। क्योंकि मुस्लिम समुदाय में भी उनकी पकड़ बहुत अच्छी नहीं है। वह मुसलमानों के भी एक मजबूत नेता बनकर नहीं उभर पायेे, हालांकि वह मैनेजर बहुत अच्छे हैं। आज वह उसी थाली को छलनी करने में जुटे हैं जिसने नसीमुद्दीन को एक पहचान दी और एक मुकाम दिया। 

बसपा में कई मुद्दों को लेकर अंतरकलह आज भी बरकरार है। संगठन में निचले स्तर के कार्यकर्ता संतुष्ट नहीं दिखाई पड़ रहा है। उसकी पीड़ा कहीं न कही उभर कर सामने आ जाती है। इसका कारण यह है कि अभी तक वह लोग ही पार्टी के महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हैं जिन्होंने पार्टी को रसातल की ओर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। विधान सभा चुनाव के बाद उन मौका परस्त लोगों के खिलाफ कार्यकर्ताओं का आक्रोश फूट पड़ा था। जिससे उन्हें लगा कि बसपा सुप्रीमो उन्हें अधिक तरजीह नहीं देंगी। लेकिन हुआ इसका उलट और वह अपने और सम्मान को अभी भी बनाये हुए हैं। 

बहुजन समाज पार्टी विधान सभा चुनाव के बाद काफी संर्घष के दौर से गुजर रही है। पार्टी से एक-एक कर दिग्गज या तो स्वयं पार्टी छोडक़र चले गये या फिर बसपा सुप्रीमो मायावती ने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों को देखते हुए बाहर का रास्ता दिखा रही हैं। बसपा में काफी मजबूत पकड रखने वाले मुस्लिम समुदाय के नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी भी आखिर कार मायावती के निशाने पर आ गये और उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया। हालांकि नसीमुद्दीन ने  अगला रास्ता अपना लिया है पर उनके समर्थक आज भी बहुजन समाज पार्टी के अंदर कई महत्वपूर्ण पदों पर विराजमान हैं। जो आज भी नसीमुद्दीन के इशारे पर काम करते हुए पार्टी को खोखला करने में जुटे हैं। ऐसे लोगों को पार्टी से निकाला नहीं जाएगा तो पार्टी दिन पर दिन और दुर्दिन देखने को मजबूर हो जाएगी। 


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