ब्लैकमेलिंग और भ्रष्टाचार का जरिया बने फर्जी आरटीआई कार्यकर्ता...बता रहे, धर्मविजय

By:
Aug 13 2017 03:57 pm
117

झांसी। जनसूचना अधिकार अधिनियम के आड़ में कुछ लोग अपनी गोटियां फेरने में लगे हुए हैं। आरआईटी विशेषज्ञ बने लोगों ने  इसे कमाई का जरिया भी बना लिए हैं। कई पहलुओं पर जनसूचना अधिकार का दुरुपयोग किया जा रहा है। इसे शासन और प्रशासन को सतर्कता बरतने की नितांत आवश्यकता है। 

भ्रष्टाचार और सरकारी तंत्र से परेशान आम जनता को सूचना की ताकत मुहैया कराने बना सूचना अधिकार कानून अब भ्रष्टाचार और ब्लैकमेलिंग का जरिया बन गया है। सूचना आयोग के मुताबिक उनके पास आने वाले मामलों में से महज 20 फीसदी मामले ही हकीकत में जानकारी पाने के लिए होते हैं। जबकि 80 फीसदी से ज्यादा मामले ब्लैकमेलिंग या परेशान करने के लिए लगाए जाते हैं। यही नहीं कई जगह तो इस कानून को अपनी दुश्मनी निकालने का भी नया तरीका बना लिया गया है।

देश में सूचना अधिकार अधिनियम ने भले ही नई क्रांति पैदा कर आम जनता को सरकारी तंत्र में सूचना की ताकत मुहैया कराई हो लेकिन इसका दुरूपयोग भी लगातार बढऩे लगा है। इस कानून का बेहतर इस्तेमाल करने के बजाय कई लोगों ने इसे ब्लैकमेलिंग का नया हथियार बना लिया है।

एक मामला जिसमें सरकारी नौकरी कर रहे दम्पति की नौकरी से लेकर व्यक्तिगत जानकारी उजागर करने आरटीआई लगाकर प्रताडि़त किया जा रहा था। यह सब महज इसलिए किया जा रहा था क्योंकि सरकारी नौकरी करने वाले पति-पत्नी के बेटे ने आरटीआई लगाने वाले व्यक्ति की बेटी को तलाक दे दिया था। इसी के बाद वह शख्स आरटीआई का हथियार लेकर उनके पीछे पड़ गए। लगभग आधा दर्जन से ज्यादा आवेदन लगाने के साथ ही मामले की अपील राज्य सूचना आयुक्त तक की गई। लेकिन असलियत सामने आने के बाद आयोग ने न केवल उनकी सभी अपीलें खारिज कर दी बल्कि उनको जमकर फटकार भी लगाई। घटनाएं प्रदेश में इस कानून के असली उपयोग की हकीकत बयां कर रहीं हैं।

प्रदेश के तमाम सरकारी विभागों में इस वक्त आरटीआई के नाम पर ब्लैकमेलिंग और अफसरों पर फंदा डालकर अपना मकसद पूरा करने का खेल जमकर चल रहा है जिसे कई बार सूचना आयोग ने अपनी जांच और मॉनिटरिंग में पकडा है। वहीं,खुद सूचना आयुक्त भी मानते हैं कि आरटीआई में लगभग 80 फीसदी मामले ब्लैकमेलिंग के लिए लगाए जा रहे हैं।  सूचना अधिकार अधिनियम की बिगडती सूरत से कई आरटीआई एक्टिविस्ट भी परेशान हैं। उनकी माने तो इसे ब्लैकमेलिंग का हथियार बनाने की बढ़ती आदत पर तत्काल रोक लगनी चाहिए और सरकार के साथ खुद आयोग को भी इस दिशा में तत्काल सख्त कदम उठाने चाहिए। 


comments

Create Account



Log In Your Account



छोटी सी बात “झाँसी टाइम्स ” के बारे में!

झाँसी टाइम्स हिंदी में कार्यरत एक विश्व स्तरीय न्यूज़ पोर्टल है। इसे पढ़ने के लिए आप http://www.jhansitimes .com पर लॉग इन कर सकते हैं। यह पोर्टल दिसम्बर 2014 से वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई की नगरी झाँसी (उत्तर प्रदेश )आरंभ किया गया है । हम अपने पाठकों के सहयोग और प्रेम के बलबूते “ख़बर हर कीमत पर पूरी सच्चाई और निडरता के साथ” यही हमारी नीति, ध्येय और उद्देश्य है। अपने सहयोगियों की मदद से जनहित के अनेक साहसिक खुलासे ‘झाँसी टाइम्स ’ करेगा । बिना किसी भेदभाव और दुराग्रह से मुक्त होकर पोर्टल ने पाठकों में अपनी एक अलग विश्वसनीयता कायम की है।

झाँसी टाइम्स में ख़बर का अर्थ किसी तरह की सनसनी फैलाना नहीं है। हम ख़बर को ‘गति’ से पाठकों तक पहुंचाना तो चाहते हैं पर केवल ‘कवरेज’ तक सीमित नहीं रहना चाहते। यही कारण है कि पाठकों को झाँसी टाइम्स की खबरों में पड़ताल के बाद सामने आया सत्य पढ़ने को मिलता है। हम जानते हैं कि ख़बर का सीधा असर व्यक्ति और समाज पर होता है। अतः हमारी ख़बर फिर चाहे वह स्थानीय महत्व की हो या राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय महत्व की, प्रामाणिकता और विश्लेषण के बाद ही ऑनलाइन प्रकाशित होती है।

अपनी विशेषताओं और विश्वसनीयताओं की वजह से ‘झाँसी टाइम्स ’ लोगों के बीच एक अलग पहचान बना चुका है। आप सबके सहयोग से आगे इसमें इसी तरह वृद्धि होती रहेगी, इसका पूरा विश्वास भी है। ‘झाँसी टाइम्स ‘ के पास समर्पित और अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ संवाददाताओं, समालोचकों एवं सलाहकारों का एक समूह उपलब्ध है। विनोद कुमार गौतम , झाँसी टाइम्स , के प्रबंध संपादक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। जो पूरी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता का पिछले लगभग 16 वर्षों का अनुभव है। के पी सिंह, झाँसी टाइम्स के प्रधान संपादक हैं।

विश्वास है कि वरिष्ठ सलाहकारों और युवा संवाददाताओं के सहयोग से ‘झाँसी टाइम्स ‘ जो एक हिंदी वायर न्यूज़ सर्विस है वेब मीडिया के साथ-साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना विशिष्ट स्थान बनाने में कामयाब रहेगा।