ग्राउंड रिपोर्ट: गांवों में कोई नहीं जानता महिला संपत्ति के बारे में.... बता रहे, प्रदीप श्रीवास्त

By: jhansitimes.com
Jan 01 2018 05:51 pm
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झांसी। आज के समय में जब महिलाओं को बराबरी का दर्जा देने के लिए पूरे दुनिया में आंदोलन चल रहा है, ऐसे में महिलाएं संपत्ति के अधिकार से ही वंचित हैं। सबसे ज्यादा भयानक स्थिति गांवों की है। यहां पर महिलाओं को संपत्ति में हिस्सा देने की बात कहना ही किसी नए कानून को लागू करने के बराबर है, जिसका जबरदस्त विरोध झेलना पड़ेगा। 

दतिया जिले में दतिया भांडेर राजमार्ग पर जिला मुख्यालय से करीब 25 किलोमीटर दूर स्थित दुरसड़ा गांव की आबादी करीब तीन सौ की है। यहां पर कुल 63 परिवार निवास करते हैं। इनमें 148 पुरूष व 122 महिलाएं हैं। अधिकतर परिवार अनुसूचित जाति से संबंधति हैं, उनका मुख्य व्यवसाय कृषि एवं मजदूरी है। गांव में अधिकतर लोग खेती के भरोसे हैं, लेकिन वर्तमान हालात में छोटी खेती होने या मौसम पर पूरी तरह से निर्भय होने के कारण उन्हें खेती से बहुत अच्छी आमदनी नहीं होती है, जिस कारण से उन्हें साल भर खेती के अलावा किसी न किसी रोजगार के साधन की तलाश रहती है। गांव में स्वरोजगार के प्रशिक्षण का कोई साधन नहीं है। जिस कारण से अधिकतर युवा अकुशल मजदूर के रूप में मजदूरी करते हैं, उन्हें आय भी कम होती है। इनमें भी महिलाओं की स्थिति सबसे खराब है। गांव का परिवेश सामंति होने के कारण महिलाओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। यहां पर महिलाओं के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है। उन्हें संपत्ति में हिस्सा नहीं मिलता है।

गांव की ही गुलाबी बाई कहती हैं कि उनके खानदान में आजतक किसी भी महिला को संपत्ति में हिस्सा नहीं दिया गया है। महिलाओं को संपत्ति में हिस्सा देने का हमारे यहां कोई नियम नहीं है। वहीं, गांव की विधवा राधा कहती है कि उनके पति की मौत हुए चार साल से ज्यादा हो चुका है। वह अपने मायके में रह रही हैं, लेकिन उन्हें ससुराल वालों ने पति की किसी भी संपत्ति में हिस्सा नहीं दिया। अगर वह अपने ससुराल वालों से संपत्ति में हिस्सा मांगती भी हैं, तो पहले तो मायके वाले ही इसके लिए तैयार नहीं होंगे। मायके में ही विरोध शुरू हो जाएगा। 

देश में महिलाओं को संपत्ति में हिस्सा देेने के अभियान हरशेयर की शुरूआत हो चुकी है। यूएनएफपीए व एनएफआई के सहयोग से गल्र्स काउंट ने सोशल मीडिया पर इस अभियान की शुरूआत की है, जिसके तहत महिलाओं में संपत्ति में हिस्सा देने के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। 


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