HAPPY Friendship Day 2017: ये है फ्रेंडशिप डे का इतिहास, दोस्ती आईना है सही-गलत का

By: jhansitimes.com
Aug 06 2017 08:55 am
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कहावत है कि दोस्ती से बढ़कर दुनिया में कोई रिश्ता नहीं होता है| दोस्तो 'फ्रेंडशिप डे' आ गया है।वैलेंटाइन डे के दिन जहां प्रेमी जोड़े प्यार का इजहार करते हैं तो वहीं दोस्ती में निखार लाने के लिए 'फ्रेंडशिप डे' के दिन दोस्त अपनी दोस्ती का इजहार करते हुए दिखाई देते हैं. वैसे तो दोस्ती का कोई दिन नहीं होता क्योंकि ये तो ऐसी खुशी है जो हर दिन हर पल सेलिब्रेट होती है। लेकिन दुनिया है न ..हर दिन को किसी रंग या किसी रूप में रिश्तों से जोड़ देती है इसलिए उसने 'फ्रेंडशिप डे' को भी बना दिया। दोस्ती में बिना शब्दों के अभिव्यक्तियों से ही बहुत कुछ कहा जाता हैं। इस साल भी यारों को अपनी यारी का इजहार करने का भरपूर मौका मिलेगा. हर साल भारत में अगस्त के पहले रविवार को 'फ्रेंडशिप डे' मनाया जाता है और इस साल 6 अगस्त को 'फ्रेंडशिप डे' मनाया जाएगा. लेकिन क्या आप फ्रेंडशिप डे के इतिहास के बारे में जानते हैं..? नहीं, तो आज जान लीजिए और फिर मजे से फ्रेंडशिप डे मनाइए.

फ्रेंडशिप डे का इतिहास

हर साल अगस्त महीने के पहले रविवार को मनाया जाने वाला 'फ्रेंडशिप डे' भारत में भी पिछले कुछ सालों से काफी पॉपुलर हो रहा है. सोशल मीडिया के बढ़ते चलन के कारण बड़ी ही धूमधाम से दोस्ती-यारी के इस दिन को भारत की युवा पीढ़ी मनाती है. लेकिन भारत से पहले दक्षिण अमेरिकी देश खासकर पैराग्वे में फ्रेंडशिप डे काफी जोरो-शोरो से मनाया जाता था. यहां 1958 में पहले अंतरराष्ट्रीय फ्रेंडशिप दिवस का भी प्रस्ताव रखा गया था. जिसके बाद शुरू में ग्रीटिंग कार्ड्स को इस दिन अपने दोस्तों को देने का बढ़ावा मिला था.

इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे

भारत के साथ कई दक्षिण एशियाई देशों में अगस्त के पहले रविवार को फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है तो वहीं कुछ जगह इसे अगस्त के पहले रविवार को नहीं बल्कि दूसरी तारीख को मनाया जाता है. ओहायो के ओर्बलिन में 8 अप्रैल को फ्रेंडशिप डे मनाया जाता है. इसके अलावा भी दुनिया के कई हिस्सों में फ्रेंडशिप डे मनाने की तारीख  अलग है. बता दें कि 27 अप्रैल 2011 को संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा ने 30 जुलाई को आधिकारिक तौर पर 'इंटरनेशनल फ्रेंडशिप डे' घोषित किया था. 

दोस्त प्यार भी है, दोस्त जिंदगी भी है और दोस्ती कभी-कभी कमीनेपन पर उतर जाती है लेकिन यह कमीनापन भी दोस्ती की हद तक ही होता है और यह बात केवल वह ही समझ सकता है जिसके पास दोस्त है। .

जो तेरा है वो मेरा है..  

डेविड धवन ने अगर कहा कि हर दोस्त कमीना होता है.. तो गलत क्या है.. क्योंकि जब दोस्त यह कह सकता है कि..जो तेरा है वो मेरा है तो फिर जब किसी दोस्त की प्रेमिका पर उसका दोस्त लाइन मारे तो फिर वह कमीना ही हो सकता है?  इस दोस्ती से ही कभी-कभी इंसान को इश्क वाला लव हो जाता है तो कभी यह दोस्ती-यारी इंसान का ईमान बन जाती है। 

भावनाओं और एहसास का ऱिश्ता है 

दोस्ती का दोस्ती क्या है इसे परिभाषित कर पाना बहुत मुश्किल है लेकिन भावनाओं और एहसास के इस रिश्ते को हम कुछ इस तरह से कलमबद्ध कर सकते हैं...

हर रिश्ते से बड़ी 'दोस्ती' दोस्ती 

एक ऐसा रिश्ता है जो मामूली घटनाओं और यादों को भी खास बना देता है। हमारे जेहन में ऐसे बहुत से पलों को ताउम्र के लिए कैद कर देता है। जो वापिस तो कभी नहीं आते पर हाँ जब भी आप अपने पुराने दोस्तों से मिलते हैं तो अब उन बातों को याद कर जरूर हँसते होंगे। बेशक आज की 'बिजी लाइफ' के चलते दोस्त रोज मिल नहीं पाते लेकिन दिल से दूर नहीं होते हैं, उनकी रूह, उनकी सांसो में दोस्ती हमेशा साथ होती है।

फ्रेंडशिप डे का नाम दे देना कितना सही है? 

दोस्ती के लिए कोई दिन तय कर उसे फ्रेंडशिप डे का नाम दे देना कितना सही है यह कहना थोड़ा मुश्किल है। पर इतना जरूर है कि जिस दिन पुराने यार सब मिल बैठ जाएँ उनके लिए वही फ्रेंडशिप डे हो जाता है। दोस्ती को सीमाओं में बांधना बेवहकूफी होती है। किसी जवां लड़के या यंग लड़की के दोस्त साठ साल के बूढ़े भी हो सकते हैं।

दोस्ती आईना है सही-गलत का 

एक मां भी अपने बेटे की और एक पिता भी अपनी बेटी के अच्छे दोस्त हो सकते हैं। क्योंकि दोस्त वो बातें बताता है जो किसी क्लास या कोर्स में नहीं पढ़ाई जाती हैं। एक लड़का और एक लड़की जो अपने जीवन के भावी सपनों में खोए होते हैं वो भी अपने हर रिश्ते में पहले एक दोस्त खोजते हैं जानते हैं क्यों? क्योंकि यही वो आईना है जो सच और झूठ का अंतर बताता है।

हर दोस्त कमीना होता है.. 

शायद जिंदगी के थपेड़ों से बचने के लिए थोड़ा कमीना होना भी काफी जरूरी है जो इंसान को एक दोस्त ही समझा सकता है। दुनिया के आदर्श और सच्ची-गलत राहें तो बच्चों को मां-बाप और उसके शिक्षक सिखा देते हैं लेकिन जिंदगी के कुछ पलों के लिए इंसान को कभी-कभी टेढा़ बनना होता है जिसके लिए इंसान को दोस्त की जरूरत भी होती है। क्योंकि दोस्ती में कमीनेपन का मसाला ना हो तो वह दोस्ती स्वादिष्ट नहीं होती।

इस दिन के लिए हाय तौबा क्यों?..... 

लेकिन अफसोस इस खूबसूरत रिश्ते और खूबसूरत दिन को देश के कुछ ऐसे लोग जो अपने आप को बेहद ही समझदार समझते हैं, अपने आप को समाज का ठेकेदार कहते हैं,को ये दिन पाश्चात्य सभ्यता का दुष्प्रभाव लगता है। उनका मानना है इससे हमारे युवा भटक रहे हैं, अब ये उन्हें कौन बताये कि भले ही फ्रेंडशिप डे पाश्चात्य सभ्यता की देन है, लेकिन फ्रेंडशिप तो हमारे देश की मिट्टी में हैं। भगवान श्रीकृष्ण-सुदामा की दोस्ती के आगे क्या कोई और मिसाल है, नहीं ना..तो फिऱ इस दिन के लिए हाय तौबा क्यों?.....

'हैप्पी फ्रेंडशिप डे' 

हां अगर उन्हें इस दिन के मनाये जाने के ढंग से एतराज हो तो बेशक उसे दूर करें लेकिन इस दिन को कोस कर, विरोध करके इसकी गरिमा को नष्ट करने का उन्हें कोई अधिकार नहीं हैं। फिलहाल मेरा तो यही कहना है अपने साथियों से कि वो इस दिन का महत्व समझे, अपने सच्चे मित्रों को पहचाने और इस दिन को बेहद इंज्वाय करे , न जाने ये पल कल नसीब हो न हो। मेरी ओर से भी अपने सभी साथियों को 'हैप्पी फ्रेंडशिप डे'।


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