कोच से परेशान इस सिंधु ने की आखिरी नमस्ते और कर ली आत्महत्या, PM मोदी को लिखा खून से पत्र

By: jhansitimes.com
Aug 21 2016 09:41 am
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पटियाला। एक तरफ तो ओलिंपिक में लड़कियां मेडल जीतकर देश का नाम रोशन कर रही हैं, वहीँ अपने देश में ही बेटियां सिस्टम की शिकार हो रही हैं। वो सिंधु और साक्षी की तरह आगे बढ़ना चाहती हैं लेकिन इस खराब सिस्टम के चलते बर्बाद हो जाती हैं।

 

पटियाला की नेशनल हैंडबॉल प्लेयर पूजा ने हॉस्टल की फीस न दे पाने के कारण और कोच से परेशान होकर खुदकुशी कर ली। 3720 रुपए फीस न देने पर कोच ने हॉस्टल में कमरा देने से मना कर दिया था। पूजा का सुसाइड नोट बरामद हुआ है। इसमें खून से नरेंद्र मोदी के लिए कुछ बातें लिखी हैं। फिलहाल कोच फरार है।    अच्छी परफाॅर्मेंस के बेस पर 20 साल की पूजा को कॉलेज में दो दिन पहले ही एडमिशन मिला था। मौत से पहले पूजा ने सात पेज का सुसाइड नोट लिखा है। इसके ऊपर खून से पीएम मोदी के लिए कुछ बातें लिखी हैं और कोच पर परेशान करने का आरोप लगाया है।   

ये लिखा सुसाइड पात्र में 

पूजा ने लिखा है कि एक तो काफी मुश्किल से एडमिशन मिला। इसके बाद जब हॉस्टल की बात आई तो कोच ने चक्कर कटवाए, फिर कमरा देने से मना कर दिया। पूजा का आरोप है कि जब उसने अन्य लोकल लड़कियों को हॉस्टल में कमरा मिलने की बात कही तो कोच ने उसे उल्टा-सीधा कहा।   

 

पूजा ने लिखा कि हॉस्टल न मिलने से कॉलेज आने-जाने में रोजाना 120 रुपए खर्च आ रहा था, जो हमारे परिवार के लिए मुश्किल हो गया था। अपने परिवार को गरीब और असहाय बताते हुए मोदी से इंसाफ की मांग की है।   पूजा ने लिखा है, 'मेरा सपना आर्मी में जाना था। लेकिन, कई लोगों की वजह से मेरी पढ़ाई खराब हो रही थी।' 'जिसके घर में 3 बेटियां हों, वह व्यक्ति पूरी कोशिश करता है कि बेटी पढ़े। लेकिन, कुछ अमीर लोग कभी आगे नहीं बढ़ने देते।

 

' 'श्री मोदी जी! ये न हो कि ऐसे ही हम जैसी बेटियां गरीबी और पढ़ाई न मिलने के कारण मरती रहें।'   'नमस्ते पापा! ये आखिरी नमस्ते है। इसका कारण हैं गिल सर। उनकी गलती की वजह से ही मैं आत्महत्या करने जा रही हूं।' 'पिछले साल हमें, कबड्‌डी और हॉकी प्लेयर्स को हॉस्टल मिल गया था। इस साल कबड्‌डी-हॉकी की लड़कियां मेडल लेकर नहीं आईं तो हॉस्टल नहीं मिला।' 'इसमें लड़कियों का क्या कसूर था। ये गिल सर की गलती थी। उन्होंने कबड्‌डी वालों को कोई कोच नहीं दिया था। वे खुद ही मेहनत करती थीं।'   'जबकि गिल सर को सरकार से तनख्वाह मिलती थी, वो पैसा भी वह खुद खा जाते थे। अब मुझे और पुष्पा को कॉलेज में तो एडमिशन दे दिया मगर हाॅस्टल में नहीं दिया 

 

जबकि पिछले साल हमको हॉस्टल दिया गया था।' 'इस साल कहते हैं कि आप लोकल पटियाला से हो, इसलिए हॉस्टल नहीं मिलेगा तो फिर इंदू शर्मा को क्यों हॉस्टल और कॉलेज में एडमिशन दिया गया।' 'वो भी तो लोकल पटियाला की थी। फिर चाहे उसका घर 21 किलोमीटर दूर था। कबड्‌डी की लड़कियां कहां एडमिशन करवातीं।'   ये तो एक लड़की की कहानी है ना जाने देश में ऐसी कितनी पूजा सिस्टम से लड‍़ रही हैं। 


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PM MODI
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