...यहां की हम हैं सरकार

By: jhansitimes.com
Jan 08 2018 01:16 pm
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( न्यूज़ एडिटर, मदन यादव की खास रिपोर्ट) जालौन(रामपुरा)। हमारा राज है। कोई कानून यहां लागू नहीं होगा। यहां जो भी होगा, हमारी मर्जी से होगा। प्रत्येक कर (टैक्स) केवल हम ही वसूलेंगे, नगर पंचायत, ग्राम पंचायत अथवा जिला पंचायत नहीं। जी हां, यह अक्षरश: सही है। उत्तर प्रदेश के जनपद जालौन स्थित रामपुरा स्टेट के राजा का कुछ ऐसा ही हुकुम है, जिसे मानने वाला ही वहां रह सकता है। फिर वह चाहे वहां का वाशिंदा हो या सरकारी अधिकारी और कर्मचारी। वहां व्यवसाय, परिचालन अथवा कोई अन्य धंधा या नौकरी। राजा साहब का हुकुम माना तो सब ठीक, अन्यथा सब खत्म। इनके आगे सरकार और सरकारी एजेंसियां भी खुद को बौना महसूस कर रहीं हैं। अब नए नगर पंचायत अध्यक्ष ने इनके रसूख से टक्कर लेने की ठानी है। नवनिर्वाचित अध्यक्ष सरकार का राज वहां कायम करना चाहते हैं, लेकिन उनके रास्ते में तमाम अड़ंगे लगाए जा रहे हैं। इसलिए रामपुरा नगर पंचायत अब राजा साहब की इस हुकुमत के खिलाफ न्यायालय जाने की तैयारी में है।

आजाद भारत में गुलाम रामपुरा स्टेट

भारत की गुलामी की जंजीरें यूं तो वर्ष 1947  में ही टूट गई थीं और इसके बाद यहां नई सरकार बनीं, राजे-रजवाड़ों को भी तत्कालीन गृहमंत्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने भारतीय संविधान के अंतर्गत भारत सरकार में समाहित कर लिया, ताकि उनके अधीन आने वाली जनता और प्रजा को प्रजातंत्र, लोकतंत्र व स्वतंत्रता का एहसास हो, न कि पराधीनता का। भारतीय संविधान के लागू होने के बाद से ही पूरे भारतवर्ष के प्रत्येक नागरिक को उसके मूल अधिकार दिए गए, लेकिन कुछ रजवाड़े आज भी भारतीय संविधान और न्याय पालिका को दरकिनार कर अपना राज चला रहे हैं। इनके क्षेत्र में आज अभी संविधान, लोकतंत्र, प्रजातंत्र एवं न्याय पालिका उनके पास गिरवी है। ऐसा ही क्षेत्र है उत्तर प्रदेश के जालौन जनपद में स्थित रामपुरा स्टेट। 

यहां आज भी चलता है राजतंत्र 

जनपद जालौन के उरई मुख्यालय से लगभग 60  किमी दूर स्थित रामपुरा स्टेट में स्वतंत्रता के बाद भी राजशाही चलती रही। यहां के राजाओं ने अपने पैतृक रहन-सहन व ठाठ-बाट को बनाए रखने के लिए भारत सरकार के संविधान को कभी नहीं माना। परिणाम स्वरूप यहां लोकतंत्र कभी हावी नहीं हुआ। आम जनता हो या व्यापारी वर्ग। या फिर सरकारी काम-काज। सब राजा साहब के आदेशों पर ही  होता है। जहां उनका आदेश नहीं माना जाता, वहां फिर सरकारी तंत्र नहीं राजतंत्र चलता है। सत्तर के दशक में यहां नगर पंचायत बनी और प्रशासन के अंतर्गत शासकीय कार्य शुरू हुआ। उसके बाद अस्सी के दशक में पहला चुनाव हुआ। तब से जो भी अध्यक्ष चुना गया, राजा के किले से आशीर्वाद लेने के बाद ही कुर्सी पर बैठा। इस आशीर्वाद का कर्ज वह राजा के हुकुम को अमल में लाकर चुकाता रहा। 

राजा के खौफ से होती है अवैध वसूली

रामपुरा स्टेट में स्थित कालका देवी बाग में पुराना बैल बाजार व सब्जी मंडी है। यहां से राजा के लोग ही व्यापारियों और दुकानदारों से तहबाजारी वसूलते रहते थे। शासन के दबाव में आकर वर्ष 1995-96  में रामपुरा स्टेट के तत्कालीन राजा चित्तर सिंह जूदेव ने प्रशासन ने यहां बैल बाजार व सब्जी मंडी लगाने के लिए अनुमति मांगी और न्यायालय के आदेश पर तत्काल शासन व नगर पंचायत रामपुरा द्वारा निर्धारित रकम जमा कराई। नगर पंचायत अभिलेखों के अनुसार उसकी रसीद भी उन्हें दी गई। इसके बाद से अभी तक किसी प्रकार का शुल्क नगर पंचायत में जमा नहीं कराया गया। बावजूद इसके वर्तमान राजा केशवेंद्र ङ्क्षसह जूदेव के लोग यहां होने वाले प्रत्येक व्यापार का कर वसूलते हैं। इतना ही नहीं, यहां से गुजरने वाली सडक़ों पर निकलने वाले वाहन, वह चाहे बस हो, ट्रक हो या फिर अन्य कोई गाड़ी। सबसे राजा के लोग अनाधिकृत वसूली करते हैं। 

खौफ पैदा कर बनाए अपनी आय के संसाधन  

यह टैक्स राजा साहब की नज़र किया जाता है। बैल बाजार, सब्जी मंडी के अलावा कालका देवी बाग में राजा साहब द्वारा प्रशासन को धता बताते हुए प्रतिवर्ष आम जनता के लिए प्रदर्शनी भी लगाई जाती है। इस सार्वजनिक समारोह से होने वाली आय भी सिर्फ और सिर्फ राजा साहब की होती है। ऐसे में शासन और जन प्रतिनिधि केवल मूक दर्शक बन कर तमाशा देखने के अलावा कुछ नहीं पाते। किसी ने अगर किले के फरमान के खिलाफ आवाज उठाई तो वह आवाज या तो बंद हो गई या फिर राजा की सरकार व उच्च स्तरीय पैठ के चलते वहां से हटा दी गई। समाजवादी पार्टी से यहां के वर्तमान राजा केशवेंद्र सिंह ने गत विधानसभा चुनाव में माधौगढ़ सीट से भाग्य आजमा चुके हैं, मगर किस्मत ने साथ नहीं दिया। 

किले का तिलिस्म तोडऩे की पहल

अब यहां पहली बार भाजपा से चुनाव लडक़र नगर पंचायत चेयरमैन पद पर शैलेंद्र सिंह ने किले की सियासत को तोड़ा। इससे नगर पंचायत के अधीन गांवों में रहने वालों को स्वाधीनता की उम्मीद जागी है। नवनिर्वाचित अध्यक्ष ने राजा साहब के एकाधिपत्य को चुनौती दी और शासन प्रशासन से उनके खिलाफ शिकायत की। ताकि नगर पंचायत को होने वाली आय में बढ़ोत्तरी हो और क्षेत्र का विकास हो सके। नव निर्वाचित अध्यक्ष के इस कदम से राजा खफा तो हैं, मगर अभी तक किसी प्रकार का सख्त कदम नहीं उठाया गया है। 

इनका कहना है...

नगर पंचायत के निर्धारित टैक्स को नगर पंचायत ही वसूल करेगी। अभी तक कालका देवी बाग में लगाए जाने वाले बैल बाजार, सब्जी मंडी और नुमाईश का जो भी टैक्स व जुमार्ना राजा पर बनेगा, उसके लिए नगर पंचायत उन्हें नोटिस देगी। यहां की सडक़ों पर वाहनों व दुकानदारों से होने वाली अवैध वसूली पर रोक लगाने के  लिए शासन प्रशासन की मदद ली जाएगी। यहां जरूरत पड़ी तो सक्षम न्यायालय में भी जाएंगे। ताकि आजाद भारत के इस रामपुरा स्टेट में राजा का अधिपत्य खत्म हो और लोकतंत्र लागू हो सके। 

शैलेंद्र सिंह 

नवनिर्वाचित अध्यक्ष

नगर पंचायत रामपुरा

 


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