यहाँ सजता है पुरुषों के जिस्म का बाजार,रात होते ही महिलायें लगाती हैं बोली !

By: jhansitimes.com
Feb 08 2018 12:15 pm
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आपने वेश्याओं के बारे में तो सुना ही होगा और रेड लाइट ऐरिया के बारे में भी जानते होंगे, जहां महिलाओं के जिस्म की बोली लगाई जाती है, और बोली लगाते हैं पुरुष… मगर हमारे देश में ऐसी भी जगह हैं जहां मामला बिल्कुल उल्टा है.

जी हां, कुछ इलाके ऐसे हैं जहा महिलाओं की नहीं, बल्कि पुरुषों के जिस्म की बोली लगती है और ये बोली लगाती हैं महिलाएं.

दरअसल भारत में भी मर्दों के जिस्म का कारोबार बड़ी तेज़ी से पनप रहा है. हालात यह है कि दिल्ली, मुम्बई और बेंगलुरू जैसे शहरों के कई प्रमुख वीवीआईपी इलाकों के मार्केट में मर्दों का बाज़ार सजता है. देह की इस मंडी को ‘जिगोलो मार्केट’ कहते हैं. इन शहरों के पॉश इलाकों में रात होते ही मर्दों की जिस्म-फ़रोशी के धंधे का बाज़ार जाता है और सभ्य परिवार की महिलाएं आकर यहां पुरुषों की बोली लगाती हैं.

यहां लड़कियां मनचाहे मर्द को एक रात पाने के लिए मनचाही रकम अदा करने को तैयार रहती हैं. अगर दिल्ली की बात करें तो दिल्ली के जिगोलो मार्केट में खुलेआम युवा अपने जिस्म का सौदा करते हैं. राजधानी की सड़कें जब सुनसान होती हैं तब यहां इनका बाजार सजता है. ख़ास बात ये है कि युवा जिस्म की खरीददार उन घरानों या इलाकों की महिलाएं होती हैं जिन्हें आम बोलचाल में इज्ज़तदार या सभ्य कहा जाता है.

इनका मार्केट सिर्फ़ सड़कों पर ही नहीं बल्कि जिगोलो को बुक करने का काम हाई-फाई क्लब, पब और कॉफी हाउस में भी होता है. कुछ घंटों के लिए जिगोलो की बुकिंग 2000 से 3000 हजार रुपए और पूरी रात के लिए 8000 रुपये तक में होती है.

युवा पुरूषों के जिस्म की सौदेबाजी का काम बेहद नियोजित तरीके से होता है. यही वजह है कि कमाई का 20 प्रतिशत हिस्सा इन्हें अपनी संस्था को देना होता है, जिनसे ये जुड़े हुए हैं, जो इन्हें इस धंधे में लेकर आती है. जिस्म के इस कारोबार को कई युवा अपना प्रोफेशन भी बना चुके हैं तो कई अपनी लक्ज़री ज़रूरतों की पूर्ति के लिए इस दलदल में फंस रहे हैं. इनमें इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी करने वाले छात्र सबसे ज्यादा हैं.

जिस्म का यह बाज़ार रात 10 बजे से सुबह 4 बजे के बीच सजता है.

युवा पॉश इलाकों और प्रमुख बाज़ारों की मुख्य सड़कों पर खड़े हो जाते हैं. यहां गाड़ी रुकती है, जिगोलो बैठता है और सौदा तय होते ही गाड़ी चल देती है. रुमाल और गले के पट्टे पर होती है जिगोलो की डिमांड उसके गले में बंधे पट्टे पर निर्भर करती है.

आपको बता दें कि कई जाने-माने होटलों में भी यह धंधा जमकर फल-फूल रहा है, मगर यहां जिगोलो की पहचान गले में पहने पट्टे से नहीं बल्कि ड्रेस से होती है. दरअसल कई होटलों में जिगोलो के हाथ में लाल रुमाल और गले में पटटे की बजाय काली पैंट और सफ़ेद शर्ट पहचान होती है. बताया जाता है कि जिगोलो इन होटलों के रेस्तरां में बैठकर कॉफी की चुस्कियां लेते हुए अपने ग्राहक की तलाश करते हैं.

अगर आपको इस बात पर यकीन न हो रहा हो तो रात को दिल्ली के इन इलाकों का मुआयना खुद ही करके देख लीजिए कि किस तरह पुरुषों की बोली लगाई जाती है.


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