बुंदेलखंड के झाँसी में इसलिए नहीं खेली जाती होली, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान

By: jhansitimes.com
Mar 01 2018 11:01 am
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झाँसी। रंगों के त्यौहार होली को पूरे देश में हर्षोल्लास से मनाया जाता है और देश भर में इसकी तैयारियां भी शुरू हो चुकी हैं। लेकिन देश में कई ऐसी जगह भी जहां लोग कुछ ऐतिहासिक घटनाओं के आधार पर होली नहीं मनाते हैं। इन जगहों में से बुंदेलखंड के झांसी जनपद का नाम भी शामिल है। जहां कुछ लोग होली नहीं मनाते हैं। जानकारों का कहना है कि होली के दिन ही झाँसी में अंग्रेजों का फरमान पहुंचा था कि वो लक्ष्मीबाई के गोद लिए हुए बेटे दामोदर राव को उनका उत्तराधिकारी नहीं मानते। इस फरमान से नाराज झांसी की रानी और वहां की जनता ने होली नहीं मनाई थी। बस उसके बाद से यहां लोग होली नहीं मना रहे हैं।

अगले दिन खेला जाता है रंग

झांसी जनपद में लोग होली वाले दिन नहीं, बल्कि इसके अगले दिन इस पर्व को हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। गौरतलब है कि 21 नवंबर, 1853 को झांसी के राजा गंगाधर राव की मृत्यु के बाद वहां के राज की कमान रानी लक्ष्मीबाई के हाथों में आ गई थी। गंगाधर राव ने अपनी मृत्यु से पहले ही एक बालक (दामोदर राव) को गोद लेकर अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। अंग्रेजों ने इस सत्ता के हस्तांतरण को मानने से इनकार कर दिया। जिस दिन झांसी में यह फरमान जारी किया गया, वह होली का ही दिन था। 

लेखक ओम शंकर असर की किताब में है जिक्र...

ओम शंकर असर नामक लेखक ने उन दिनों एक किताब लिखी थी। इस किताब का नाम महारानी लक्ष्मीबाई और उनकी झांसी है। किताब के अनुसार इस फरमान के तहत डलहौजी ने लेटर लिखा था कि भारत सरकार की 7 मार्च 1854 की आज्ञा के अनुसार झांसी का राज्य ब्रिटिश इलाके में मिलाया जाता है। इस इश्तहार के जरिए सब लोगों को सूचना दी जाती है कि झांसी प्रदेश का शासन मेजर एलिस के अधीन किया जाता है। प्रदेश की प्रजा अपने को ब्रिटिश सरकार के अधीन समझे और मेजर एलिस को ही टैक्स अदा करे और सुख, शांति एवं संतोष के साथ जीवन निर्वाह करे।

खुशी गम में बदल गई...

वहीं झांसी गजेटियर में दर्ज इतिहास के मुताबिक यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना ठीक होली के दिन घटी थी।  होली के जश्न की तैयारियां जारी थीं। इसी बीच अंग्रेजों का तुगलकी फरमान सुनाया गया। लोग शोक में डूब गए और होली नहीं मनाई गई। रानी ने किला छोड़ा और दूसरे महल में चली गईं। इसी गम में आज भी झांसी के कई लोग होली के दिन होली नहीं मनाते। इसके बजाय वे अगले दिन रंग खेलते हैं।

यह कहते हैं जिला धर्माचार्य

महंत पं. विष्णुदत्त स्वामी का कहना है कि होली के दिन ही झाँसी के राजा गंगाधर राव व रानी के इकलौते पुत्र और झाँसी के उत्तराधिकारी का स्वर्गवास हो गया था। इससे पूरा झाँसी प्रदेश शोक में डूब गया और होली खोटी हो गई। इसलिए होली नहीं मनाई जाती है। वहीं वे इस बात से भी इत्तेफाक रखते हैं कि झाँसी प्रदेश को ब्रिटिश हुकुमत में मिलाने का फरमान भी होली के दिन ही सुनाया गया था। इसलिए भी यहां के लोग होली नहीं मनाते और अगले दिन रंग गुलाल खेलते हैं। 

 


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