बुंदेलखंड में ओलावृष्टि ने लिखी तबाही की इबारत, तसल्ली के लिये नहीं उठे अभी हाथ

By: jhansitimes.com
Feb 13 2018 05:05 pm
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 रिपोर्ट-सैय्यद तामीर उद्दीन महोबा/पनवाड़ी। एक बार फिर जनपद का किसान प्राकृतिक आपदाओं का शिकार हो गया है, सोमवार की रात तेज बारिश के साथ हुयी ओलावृष्टि ने पूरे जनपद में तबाही मचा दी है, खेत में खड़ी फसलें धरासायी हो गयी है,और फसलों की जगह सफेद चादर बिछी हुयी है, किसान फसल की बर्बादी देख कर फूट, फूट कर रो रहा है और उसका मुंह गुस्से से लाल हो रहा है, उसे नहीं सूझ रहा है कि अब भविष्य की गाड़ी किस तरह आगे बढ़ेगी।

यहां पिछले दो दिनों से मौसम का मिजाज बेहद खराब चल रहा था, हालांकि रविवार को हल्का बूंदा बांदी के बाद मौसम कुछ देर के बाद साफ हुआ था, लेकिन किसानों की धड़कने मौसम के मिजाज को देखकर बेकाबू हुयी जा रही थी। पूर्व में भी यहां का किसान मौसूम की बेरूखी का शिकार हो चुका है और इसको लेकर उनका अनुभव बेहद खटटे और निराशाजनक रहे है। 

लेकिन जिस बात का यहां के किसानों को डर था, सोमवार की रात वह डर उसे और डराकर बर्बादी की इबारत लिख गया। कबरई विकास खण्ड से लेकर जैतपुर और पनवाड़ी विकास खण्ड तक जबदरस्त बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों को कहीं का नहीं छोड़ा है। पनवाड़ी विकास खण्ड के दिदवारा, महुवा, रूरीखुर्द, टिंगुरा, ब्यारजो, टोलापातर, समेत कोई दो दर्जन से अधिक गांवो में हुयी भीषण ओलावृष्टि से खेतों पर खड़ी तकरीबन 95 प्रतिशत से अधिक फसलें पूरी तरह से नष्ट हो गयी है। किसानों ने बढ़ी उम्मीदों से चना, मटर, गेंहू लाही की फसलें लगायी थी अथक मेहनत और प्रयास के बाद उसकी मशक्कत जब रंग ला रही थी तभी एन वक्त पर प्राकृतिक आपदा ने उसे कही का नहीं छोड़ा परिवार के म ुखिया से लेकर घर की महिलाऐं, छोटे बड़े बच्चें फसलों की बर्बादी के बाद रो रहे है। उन्हें ढाढंस बधाने के लिये अभी तक कोई हाथ नहीं उठा है गांवों में सबका एक तरह का हाथ है कौन किसको तसल्ली दे किसी की समझ में नहीं आ रहा है। ,

यहीं हाल बेलाताल से लेकर  उसके इर्द, गिर्द के तमाम गांवों का भी है, तो कबरई विकास खण्ड के लिवाही से लेकर कई गांवों में ओलावृष्टि ने किसानों के अरमानों का कचूमर निकाल दिया है। बेबस किसान अब मुआवजे के लिये शासन और प्रशासन का मुंह ताक रहा है। 

500 ग्राम वजन तक के गिरे ओले 

पनवाड़ी। पनवाड़ी विकास खण्ड के टोलापातर गांव के प्रधान अजय पाल ने बताया कि उनके गांव में 500 ग्राम वजन तक के ओले गिरे है, वहीं टुंगरा के पूर्व प्रधान का कहना है, कि ओलावृष्टि से फसलें छह इंच तक धस गयी है, कमोवेश पूरे जनपद में ओलावृष्टि से फसलें जमीदोज हुयी है और किसान परेशान हाल उठा है, बीते कई सालों से यहां का किसान इन्हीं परेशानियों का शिकार रहा है। 


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