लालटेन जलाने वाला स्वयं भू बना बैठा पटल प्रभारी

By: jhansitimes.com
Jun 21 2018 04:36 pm
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(रिपोर्ट-सैय्यद तामीर उद्दीन) महोबा। अंधेर नगरी चौपट राजा टका शेर भाजी टका शेर खाजा का जीता जागता उदाहरण यहां की नगर पालिका परिषद बन चुकी है, यहां स्वयं भू पटल प्रभारी नियम, कायदे को जेब में डाल घूम रहा है, उसकी पालिका में मनमर्जी चल रही है। काम वह अपने अनूरूप और अपने अनुसार तय कर कर रहा है, आमजनमानस को इससे हैरानी और परेशानी होती हो उसकी बला पर है। 

आज जिस पटल पर बैठकर वह काम देख रहा है वह भी स्वयंभू है दरअसल यह पालिका का एक छोटा से कर्मचारी है और मामूली पद से इसने नगर पालिका में नौकरी शुरू की थी यह बात तब की है जब शहर में बिजली का प्रार्दुभाव नहीं हुआ था और शहर में रोशनी करने के लिये जगह, जगह लकड़ी के खम्भे लगे हुये थे और उनमें लेंप पोस्ट लगे थे। शाम को सूरज ढलने के बाद शहर को रोशनी करने के लिये इन्हें जलाया जाता था। यह काम यही एक अदना सा कर्मचारी करता था, शाम के वक्त इसकी यह जिम्मेदारी थी कि हाथ में कैरोसिन की बोतल लेकर शहर में लगे लैम्प पोस्ट पर जाकर उन्हें उड़ेले और फिर उन्हें जलायें। रात को प्रकाश से शहर अंधेेरे भागने का काम करे और सुबह तड़के होने से पहले इन्हें बुझाने का काम भी इसी के द्वारा किया जाता रहा है।

धीरे-धीरे शहर ने विकास किया और आज पूरा शहर बिजली की रोशनी में नहाता है लिहाजा जिस पद पर इसकी तैनाती हुयी थी अब उसके मायने नहीं रह गये है, अतएव बदली परिस्थितियों में यह अदना सा कर्मचारी महत्वपूर्ण पटल देख रहा है और उसका यह स्वयंभू प्रभारी बन गया है, दरअसल व्यवस्था में छेद होने का इसके द्वारा पूरा फायदा उठाया जा रहा है, आज, तक उसके काम करने के अंदाज को लेकर न को कोई टिप्पणी हो रही है और न ही उसे कोई टोक पा रहा है, लिहाजा उसके द्वारा अपनी मन मर्जी से नियम कायदों को गढ़ लिया गया है। लिहाजा शहर की सरकार से रोजाना लोगों के काम पड़ते है और विभिन्न कामो को सम्पादित कराने के लिये यहां नागरिक पहुंचते है ज्यादातर लोगों का काम मकानों को दर्ज कराना, गृह कर जमा करना जैसे कामो से वास्ता रोजाना पड़ता है, यहां नाम दर्ज कराने की निकलने वाली सूचनाओं पर स्वयंभू लिपिक अपनी मर्जी चला रहा है,उसने इसके लिये बकायदा नियम गढ़ रखे है, और उसके द्वारा तय किये गये नियमों की अवेहलना करना की जुर्रत कोई नहीं कर सकता है।

पालिका में मचे भर्राशाही को लेकर शहर में नाराजगी दिखाई पड़ रही है लेकिन इस नाराजगी के बाद भी स्थ्तिियों में यहां कोई परिवर्तन नहीं है शहर के चौसियापुरा के नफीस, हो या कसौरा टोरी के इफ्तिखार अथवा पप्पू सबकी शिकायतें एक समान्य है कि जब वह अपना मकान दर्ज कराने के लिये यहां पहुंचे तो उसकी सूचना निकलवानेे के कुछ नियम बता दिये, नियम इतने टेडे और बेकार किस्म के है जो यहां पहुंचने वाले फरियादियों के लिये जहमत खड़ी करते और उनके बीच कठिनाइया उत्पन्न करते है लिहाजा वह इसके लिये विरोध भी दर्ज कराते है लेकिन स्वयंभू पटल प्रभारी पर उनके एतराज और विरोध का कोई प्रभाव नहीं पड़ रहा है, और वह पूरी मनमर्जी के साथ अपने काम को अंजाम देने में लगा हुआ है। उधर इस सम्बन्ध में जब दैनिक स्वतंत्र चेतना ने नगर पालिका परिषद के अधिशाषी अधिकारी लालचन्द सरोज से इस सम्बन्ध में सवाल किया तो उनका जबाव था कि पालिका में इस तरह के कोई नियम नहीं है, सूचना का प्रकाशन उन्हें दर्ज कराने का काम यहां आने वाले फरियादी पर निर्भर है, उनका कहना है कि मामला संज्ञान में आने के बाद इस सम्बन्ध में जांच कराकर कार्यवाही की जायेगी।  

पालिका में कम बाजार में ज्यादा समय बीतता महाशय का 

पटल प्रभारी कब घर से पालिका आते है और कब जाते है यह वह ही जाने, यहां काम के लिये आने वाले पीड़ितों को उनका घण्टो इंतजार करना पड़ता है। जब वह घण्टों तक नहीं पालिका पहुंचते तो पीड़ित उन्हें तलाशने के बाद मायूस होकर घर लौट जाते है, इतना ही नहीं पालिका से वेतन तो पाते है लेकिन काम करने के नाम पर ज्यादातर समय उनका बाजार में बीतता है। नगर वासियों का कहना है, कि यह महाशय घर के सारे काम निपटाने के बाद ही कार्यालय में दर्शन देते है और कुछ समय के लिये दर्शन देने के बाद फिर पालिका से नदारत हो जाते है, अधिकारियों को जानकारी होने के बाद भी वह क्यो खामोश है यह बताने वाला भी कोई नहीं। 


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