भारतीय डॉक्टर का दावा, ज्यादा एंटीबायोटिक बना रहा है बीमार

By: jhansitimes.com
Apr 11 2018 08:23 am
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रिपोर्ट - प्रदीप श्रीवास्तव  

नई दिल्ली। एक भारतीय मूल के डाॅक्टर अमेरिका में एंटीबाॅयोटिक के दुष्प्रभाव के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं। दुनिया भर में एंटीबाॅयोटिक का अंधाधुंध प्रयोग हो रहा है, जबकि जरूरत से ज्यादा प्रयोग के कारण इससे स्वास्थ्य संबंधी कई प्रकार की गंभीर बीमारियां जन्म ले रही हैं।

1945 में नोबेल पुरस्कार प्राप्त वैज्ञानिक व डाॅक्टर अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने कहा था कि पेनिसिलिन सहित एंटीबाॅयोटिक दवाओं के ज्यादा उपयोग से उनका प्रभाव कम हो जाता है और वह नुकसान पहुंचाना शुरू कर देते हैं। आज यही हो रहा है, एंटीबाॅयोटिक दवाओं के ज्यादा इस्तेमाल के कारण सुपर बग की समस्या खड़ी हो गई है। अस्थमा, न्यूमोनिक और गोनोरिया आदि बीमारियों में एंटीबाॅयोटिक दवाओं का अंधाधुंध उपयोग विकराल रूप धारण करती जा रही है।

ऐसे में भारतीयमूल के डाक्टर किरण पानूगंति लोगों को एंटीबाॅयोटिक के दुष्प्रभाव के प्रति लोगों को जागरूक कर रहे हैं, जिससे अस्पताल प्रशासन भी एंटीबाॅयोटिक दवाओं के उचित उपयोग को परिभाषित करने के लिए रोगाणुरोधी प्रक्रिया को अपना रहे हैं। साथ ही आम लोगों को एंटीबाॅयोटिक दवाओं के उचित उपयोग की जानकारी देने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। वह कहते हैं कि जरूरी नहीं है कि गले में इंफेक्शन या यूरिनल इंफेक्शन हमेशा एंटीबाॅयोटिक दवाओं से ही ठीक हो।

डाॅक्टर पानूगंति के कार्यों को देखते हुए उन्हें इंटायर टेक्सास हेल्थ रिसोर्सेज के लिए इन्फेक्शन प्रिवेंशन कैबिनेट (आईपी कैबिनेट) में प्रमुख चुना गया है। वर्तमान में वह डेंटन स्थित टेक्सास स्वास्थ्य प्रेस्बिटेरियन अस्पताल में मेडिसिन के उपाध्यक्ष हैं। वह अपनी वेबसाइटwww.judiciousabx.com  के माध्यम से भी लोगों को एंटीबाॅयोटिक से होने वाले नुकसान के बारे में जागरूक कर रहे हैं।

कृषि और पशु उद्योग में एंटीबाॅयोटिक के अंधाधुंध इस्तेमाल का व्यापक विरोध हो रहा है। आपको जानकर हैरानी होगी कि शरीर के वजन और मांस को बढ़ाने के लिए चीन के मांस उद्योग में सूअरों को कोलीस्टिन खिलाया जा रहा है। इससे मनुष्य के शरीर की आंतरिक प्रणाली को काफी नुकसान होता है। कई बार समय से पहले बांझपन की समस्या भी पैदा होने लगी है। यह तब है जब कारबैपेंम और कोलीस्टिन जैसी जीवन रक्षक एंटीबाॅयोटिक्स वर्तमान में कुशलतापूर्वक काम नहीं कर रही हैं।


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