जलपुरुष राजेन्द्र सिंह का चौकाने वाला खुलासाः महानगरों में बुंदेलखंड की लड़कियां का हो रहा यौन श

By: jhansitimes.com
May 13 2018 01:33 pm
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(Riport- ankit chaudhary )झांसी। बुंदेलखंड के वर्तमान दौर में पेट की आग बुझाने के लिए मजदूरी के लिए जो लड़कियां अपने माता-पिता और भाई व परिजनों के साथ दिल्ली या अन्य महानगरों में जाती तो हैं लेकिन लौटकर वापस नहीं आती हैं। पेट की आग बुझाने के लिए बुंदेलखंड से पलायन करने वाले परिवारों को ऐसे दंश भोगना पड़ते हैं, जिनकी कल्पना मात्र से रूह कांप जाती है। यहां से रोजगार की तलाश में जाने वाले कई परिवार ऐसे हैं, जिनकी बेटियां यौन शोषण की शिकार हो चुकी हैं। इतना ही नहीं, कई परिवारों की युवतियों को तो दबंगों ने अपनी रखैल बना लिया है। यह कहना है जलपुरुष राजेन्द्र सिंह का। जिन्होंने झांसी के सर्किट हाउस में मुलाकात करते हुए पत्रकारों से यह बात बोली है। 

झांसी विकास प्राधिकरण द्वारा स्वीकृत प्लाट बिकाऊ है आसान किस्तों पर, इंजीनियरिंग कालेज के पास कानपुर रोड दिगारा भगवंतपुरा बाईपास रोड झांसी पर स्थित

सम्पर्क करें- 08858888829, 07617860007, 09415186919, 08400417004

सूखा, बदलहाली और बेरोजगारी से जूझ रहे बुन्देलखंड का जलपुरुष राजेन्द्र सिंह ने भ्रमण किया। भ्रमण के बाद वह आज झांसी के सर्किट हाउस पहुंचे। जहां उन्होंने पत्रकारों से मुलाकात करते हुए डरावने सच को उजागर किया। उन्होंने कहा कि दुष्काल का प्रभाव सबसे से अधिक गरीबों पर पड़़ रहा है। यह स्थिति दिन प्रतिदिन भीषण होती जा रही है। इस बिगड़ती हालत में हमारी सरकारों व समाज की संवेदनाये यदि नहीं जागेगी तो भुगतना पड़ेगा ही। जिस प्रकार धरती का स्वास्थ्य खराब होता है उसी प्रकार मानवीय स्वास्थ्य भी खराब होने लगता है। लोग मरने लगते है, और कुपोषण का शिकार होने लगते है।

बुंदेलखंड की जमीनी हकीकत जानने के लिए जल पुरुष राजेंद्र सिंह ने अध्ययन किया है। उन्होंने आगे कहा कि जहां एक ओर बुन्देलखंड में रहने वाले लोगों की  कुपोषण के कारन हालत खराब है तो वहीं दूसरी तरफ उजाड़ है। उजाड़ में जो लड़कियां बुन्देलखंड से महानगरों में जा रही हैं वह लौटकर वापस नहीं आ रही। पता चला कि यहां की एक युवती को, जो अपने परिवार के साथ दिल्ली काम करने गई थी, उसे कई लोगों ने अपनी हवस का शिकार बनाया। किसी तरह वह वापस अपने गांव आई और बाद में उसकी शादी हो गई।"

विगत दिवस मलखान सिंह लोधी से जब वह मिले तो उन्होंने लगभग 10 घटनाओं के बारे में बताया। जिसमें उन्होंने बताया कि मजदूरी के लिए गई लड़कियां वापस दिल्ली से नहीं आई हैं। इस अकाल में वह अपने माता-पिता और परिवार के साथ मजदूरी के लिए जाती तो है लेकिन जब काम नही मिलता तो वह यौन शोषण का शिकार होने लगती है। मुझे ऐसे शब्दों का प्रयोग करने की आदत नहीं है लेकिन उनकी हालत काफी बुरी है। 

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घुवारा थाना क्षेत्र के बोरी गांव के बुजुर्ग मलखान सिंह (70) ने बताया कि उनके गांव का एक व्यक्ति रोजगार की तलाश में अपनी पत्नी के साथ दिल्ली गया था, कुछ दिनों बाद वह अकेला लौटा। जब उससे पूछा गया कि पत्नी कहां है, तो उसका जवाब था कि वह किसी और के साथ रहने लगी है। आज वह व्यक्ति परेशान है और गांव में मवेशियों को चराकर अपना गुजारा कर रहा है।

बुंदेलखंड में रोटी और पानी के संकट ने लोगों का यह हाल कर दिया है कि उनके लिए इज्जत-आबरूबचाना मुश्किल हो गया है। जो लोग रोजी-रोटी के लिए महानगर जाते हैं, उन परिवारों की कहानी दर्दनाक है। 

बुंदेलखंड की तस्वीर डरावनी है, मगर उन लोगों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, जो लोग ऐसे हालात के लिए जिम्मेदार हैं। बहुत शोर मचाने पर सत्तापक्ष बजट और सुविधाओं का ऐलान कर देगा और विपक्ष चुनावी मुद्दा बना लेगा, मगर इन गरीबों के जख्मों पर मलहम लगाने वाला कोई नहीं है।

सूखे से निपटने के लिए होना पड़ेगा जागरुक

पानी की समस्या दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। दर्जनों राज्यों के 300 से अधिक जनपद ऐसे हैं जहां अकाल है। इस अकाल की स्थिति काफी खराब है। पहले अकाल में पलायन होता था और अब उजाड़ हो रहा है। जो लोग पलायन कर गये है उनमे अधिकतर महिलायें और किशोर बहने वापस नहीं लौटी हैं। इस दुष्काल ने बहुत सारे परिवारों को तोड़ा है। इस दुष्काल से बचने के लिए एक चेतना की जरुरत है। बुदावनी में एक तालाब बनाया गया था, जिस पर दबंगों ने अब कब्जा कर लिया है और अब तालाब में पानी नहीं आने दिया। जिस कारण वह सूख गया। इस अकाल का एक ओर प्रकृति जिम्मेदार है तो दूसरी ओर लोगों द्वारा बनाया गया अकाल है। इस अकाल से बचने के लिए संवेदना को जगाना जरुरी है। 


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