चलिए जानते हैं, भारत के 5 प्रमुख सर्प उद्यान!

By: jhansitimes.com
Dec 22 2017 09:33 pm
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टी.वी पर आने वाली नागिन की कहानी हो या पौराणिक कथाओं में नागों का उल्लेख, या फिर मंदिरों में पूजे जाने वाले नागों के देवता शेषनाग, इन सबसे पता चलता है कि हमारी मतलब कि भारतीय संस्कृति और परंपराओं में साँपों की कितनी महत्ता है।

 कई सारी साँपों की रहस्यमयी कथाओं पर बनाई गयी फिल्में और उनकी कहनाईयाँ बहुत दिलचस्प हैं।ख़ासकर आपको वो तो याद ही होगा 'लॉर्ड वॉल्डेमॉर्ट', जिसका अंत तक रक्षक भी एक साँप ही था।

सबसे ज़्यादा ज़हरीला और आकर्षक जीव होने की वजह से, यह रिसर्च और वाइल्डलाइफ में दिलचस्प लेने वालों का भी सबसे ज़्यादा ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है। साँपों के आधार पर ही बनी हॉलीवुड की ऐनाकोंडा फिल्म ने सबसे ज़्यादा दर्शक बटोरे थे। 

तो अब इसमें भी कोई शक नहीं है कि साँप की विशेष जातियाँ पर्यटकों का भी ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। चलिए इस लेख में हम कुछ मुख्य साँपों के उद्यान की यात्रा करते हैं और उनकी कुछ जातियों का पता लगाते हैं।

स्नेक पार्क, कोलकाता 

कोलकाता का स्नेक पार्क पूर्वी भारत का सबसे पहला स्नेक पार्क है। यह स्नेक पार्क वन्यजीव संरक्षणवादी और सरिसर्पवैज्ञानिक, श्री दीपक मित्रा के कोशिशों द्वारा स्थापित किया गया। कोलकाता का यह स्नेक पार्क 2 एकड़ के घने जंगलों में फैला हुआ है, जो जगह साँपों के संरक्षण के लिए सबसे अच्छी जगह है। सर्पों के अलावा यह कई स्तनधरियों, सरीसृपों और पक्षी की जातियों का भी वासस्थल है। पीले रंग की एक खास छिपकली की जाति भी यहाँ का मुख्य आकर्षण का केंद्र है।

कट्राज स्नेक पार्क 

कट्राज स्नेक पार्क, पुणे के राजीव गाँधी ज़ूलॉजिकल पार्क में स्थापित एक बहुत ही आकर्षक पार्क है। पुणे के इस स्नेक पार्क में बहुत बड़ी संख्या में साँपों की कई सारी प्रजातियाँ हैं, जैसे कोब्रा, इंडियन रॉक, पाइथॉन, वाइपर्स और किंग कोब्रा आदि। इस पार्क की एक खास बात यह है कि, यह संगठन साँपों के उन्मूलन की ग़लतफहमी को दूर करने के लिए कई सारे जागरूक कार्यक्रमों का भी आयोजन करता है। यह संगठन साँपों के संरक्षण के लिए वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी साँपों की जातियों का उन्मूलन करता है। इस संगठन द्वारा लोगों को धार्मिक उद्देश्यों के लिए साँपों के साथ दुर्व्यवहार करने से रोकने के लिए भी शिक्षित किया जा रहा है। इसलिए पुणे का यह स्नेक पार्क भारत के प्रमुख सर्प उद्यानों में से एक है।

बान्नेरघाटा स्नेक पार्क, बेंगलूरु 

बान्नेरघाटा स्नेक पार्क, बेंगलुरू के बान्नेरघाटा नैशनल पार्क का ही एक हिस्सा है। यह पर्यटकों के बीच मुख्य आकर्षणों में से एक है। यह स्नेक पार्क कई आकर्षक जातियों के साथ लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है। बान्नेरघाटा स्नेक पार्क को भारत के प्रमुख सर्प उद्यानों में से एक भी कहा जाता है।

परिस्सिनिकदावु स्नेक पार्क, कन्नूर

 परिस्सिनिकदावु, मुथप्पन मंदिर के साथ-साथ वहाँ के स्नेक पार्क के लिए भी प्रसिद्ध है। परिस्सिनिकदावु स्नेक पार्क कई सारे विषैले और निर्जीविष साँपों की प्रजातियों के लिए प्रसिद्ध है, जो कुन्नूर में आए पर्यटकों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हैं। यह केरल के एन.एच 17 से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थापित साँपों का एक अनुसंधान और संरक्षण केंद्र भी है। यहाँ पर कोब्रा, पीट वाइपर्स, पाइथॉन आदि जैसी विशेष जातियाँ, पर्यटकों को देखने के लिए मिलेंगे।

गिनडी स्नेक पार्क, चेन्नई 

गिनडी स्नेक पार्क या चेन्नई स्नेक पार्क संगठन, भारत का सबसे पहला सरिसृप पार्क है, जो सन् 1972 में स्थापित किया गया था। यह सर्प उद्यान भारत के ही कई साँपों की प्रजातियों के साथ-साथ विदेशी प्रजातियों का भी वास स्थल है। गिनडी स्नेक पार्क साँपों के प्रजनन और अनुसंधान का भी केंद्र है, जिसे प्रसिद्ध सरिसर्पवैज्ञानिक रॉम्युलस वाइटेकर द्वारा स्थापित किया गया था। 

आज यह बड़े ही दुख कि बात है कि, साँपों की प्रजातियों पर भी भूमंडलीकरण का दुष्प्रभाव पड़ रहा है। हमें सबसे ज़्यादा ज़रूरत है कि हम साँपों की प्रजातियों को लुप्त होने से बचा सकें। शुक्र है वन्यजीव के ऐसे ही कई संगठनों का जिनकी वजह से कई विभिन्न जातियों का संरक्षण किया जा सका है और किया जा रहा है। दुर्भाग्य से ये भी कई तरह के धार्मिक प्रथाओं की चपेट में आ रहे हैं, जिससे साँपों की प्रजातियों को सबसे ज़्यादा ख़तरा है। तो इसलिए अब हमारे लिए सबसे ज़्यादा ज़रूरी है कि, हम साँपों के बारे में ओर ज़्यादा जाने और लोगों को भी इनके बारे में शिक्षित करें।


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