लोकसभा चुनाव 2019: जालौन लोकसभा सीट पर भानु के विकल्प की तलाश में भाजपा

By: jhansitimes.com
Mar 13 2019 01:42 pm
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उरई(जालौन)। जालौन गरौठा लोकसभा सीट पर जहां कांग्रेस सबसे अधिक समय तक काबिज रही वहीं भाजपा को भी पांच बार इस सीट पर जीत हासिल हुई है जबकि जनता पार्टी, जनता दल, बसपा एवं सपा को भी एक-एक बार चुनाव में सफलता मिल चुकी है। इस सीट पर केवल कांग्रेस के चौधरी रामसेवक को जीत की हैट्रिक नसीब हुई तो भाजपा के सांसद भानु प्रताप वर्मा ने चार बार अपनी जीत का परचम फहराया। 

देश की आजादी के बाद हुए पहले लोकसभा चुनाव में आम मतदाता के लिए कांग्रेस पार्टी ही सब कुछ थी क्योंकि देश को आजाद कराने में कांग्रेस की महत्वपूर्ण भूमिका रही। जिसके चलते उस समय कांग्रेस का ही बोलबाला था। 1952 में हुए पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने चौधरी लच्छीराम को टिकट दिया और उन्हें एकतरफा जीत हासिल हुई थी। 1957 के लोकसभा चुनाव में चौधरी लच्छीराम लगातार दूसरी बार सांसद बने। लेकिन 1962 में कांग्रेस ने चौ. रामसेवक को उम्मीदवार बनाया और वह सांसद बने यह सौभाग्य चौधरी रामसेवक को ही प्राप्त है कि 1962 एवं 1967- 1971 में कांग्रेस का टिकट पाकर लगातार तीन बार वह सांसद बने जीत की हैट्रिक लगाने वाले चौधरी रामसेवक इकलौते सांसद है। लेकिन देश में आपातकाल के बाद हुए चुनाव में कांग्रेस के खिलाफ बने माहौल के चलते कांग्रेस को यहां से पराजय का सामना करना पड़ा और पहली बार 1977 में गैर कांग्रेसी सांसद रामचरन दोहरे जनता पार्टी के टिकट पर बने। लेकिन केन्द्र में जनता पार्टी की सरकार अपना कार्यकाल पूरा नही कर पायी। खिचड़ी सरकार ने नेताओं की राजनैतिक महत्वकांक्षाओं ने देश को लोकसभा चुनाव की स्थिति में ला दिया। जनता पार्टी की सरकार गिरते ही 1981 में लोकसभा चुनाव हुए जिसमें देश की सत्ता पर फिर से इंदिरा गांधी ने कब्जा किया।

 1981 के लोकसभा  चुनाव में गैर चौधरी समाज को टिकट मिला। जिसमें कांग्रेस ने कोरी समाज के नाथूराम शाक्यवार को प्रत्याशी बनाया और सांसद निर्वाचित हुए। लेकिन 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या ने कांग्रेस के पक्ष में देश भर में लहर पैदा कर दी। इस चुनाव में एक बार फिर से कांग्रेस ने पूर्व सांसद चौधरी लच्छीराम को प्रत्याशी बनाया। इस चुनाव में जीत के साथ ही चौधरी लच्छीराम तीसरी बार जालौन लोकसभा सीट से सांसद चुने गये। 1989 के लोकसभा चुनाव तक कांग्रेस की लहर शांत हो चुकी। विश्वनाथ प्रताप सिंह के नेतृत्व में देश में संयुक्त मोर्चे ने अंगड़ाई ली बोफोर्स तोप घोटाला के शोर के कारण जालौन गरौठा लोकसभा क्षेत्र से बीएलडी के रामसेवक भाटिया सांसद चुने गये जबकि कांग्रेस से चुनाव लड़े पूर्व सांसद चौधरी लच्छीराम को पराजय का सामना करना पड़ा। हालांकि चौधरी लच्छीराम की इस चुनाव में हार का सबसे बड़ा फैक्टर बहुजन समाज पार्टी का उभरकर आना भी माना गया था। 

कांग्रेस के दलित, मुस्लिम वोटों की बसपा में गोलबंदी के चलते जालौन गरौठा क्षेत्र में कांग्रेस हासिये पर चली गई मंडल के विरोध में कमंडल लेकर आयी भारतीय जनता पार्टी को जालौन गरौठा लोकसभा क्षेत्र से पहली बार 1991 के लोकसभा चुनाव में जीत का जश्न मनाने का मौका मिला। हालांकि 1989 में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़े उजागरलाल दोहरे को 80 हजार से अधिक वोट मिले थे। उस चुनाव में बसपा से बाबूरामाधीन अहिरवार एवं भाजपा से उजागर लाल दोहरे की प्रत्याशिता से हुए वोटों के विभाजन का लाभ रामसेवक भाटिया को मिला था। लेकिन 1991 में गयाप्रसाद कोरी की जीत ने जालौन गरौठा क्षेत्र से जीत का ऐसा खाता खोला कि फिर भाजपा ने लगातार तीन लोकसभा चुनावों में भगवा फहराया था। फिर इसी सीट पर 1991 से लेकर 1998 तक लगातार तीन बार जीत दर्ज की। सांसद गयाप्रसाद कोरी के निधन के बाद भाजपा ने उनका राजनैतिक वारिस कोंच सुरक्षित सीट से भानुप्रताप वर्मा को 1996 में प्रत्याशी बनाया और उन्होंने 

सफलता हासिल की। 1998 के लोकसभा चुनाव में भानुप्रताप वर्मा लगातार दूसरी बार चुनाव जीते। 1999 में पहली बार बहुजन समाज पार्टी के युवा नेता ब्रजलाल खाबरी सांसद बने और भानुप्रताप वर्मा को पराजय का सामना करना पड़ा। लेकिन भानु प्रताप वर्मा ने अगले ही चुनाव 2004 में पराजय का बदला बसपा से ले लिया और तीसरी बार भाजपा के टिकट पर सांसद चुने गये। 2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने भानुप्रताप वर्मा को ही प्रत्याशी बनाया। जबकि समाजवादी पार्टी ने घनश्याम अनुरागी तो बहुजन समाज पार्टी ने तिलक चंद्र अहिरवार को प्रत्याशी बनाया इस चुनाव में घनश्याम अनुरागी ने पहली बार समाजवादी पार्टी को खुशी मनाने का मौका दिया। 

1992 में अस्तित्व में आयी समाजवादी पार्टी को 2009 के पहले तक लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में पराजय का ही स्वाद चखना पड़ता था। लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव की जीत ने समाजवादी पार्टी के लिए अच्छे दिन ला दिए। जिसके चलते 2012 के विधानसभा चुनाव में उरई सुरक्षित क्षेत्र से सपा के टिकट पर चुनाव लड़े दयाशंकर वर्मा ने सफलता हासिल की। लेकिन प्रदेश में सत्ता विरोधी लहर का असर और मोदी लहर में सपा-बसपा को कहीं ठिकाना नही मिला। मोदी लहर में भाजपा के भानुप्रताप वर्मा ने जीत का बड़ा रिकार्ड कायम किया। 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के भानु वर्मा को 5 लाख 48हजार 631 कुल 49.46 प्रतिशत वोट मिले थे। इस चुनाव में भानु वर्मा के दो लाख 75 हजार वोटों के अंतर से बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी बृजलाल खाबरी को दो लाख 61 हजार 429 कुल 23.75 प्रतिशत वोट मिले थे। जबकि समाजवादी पार्टी से लगतार तीसरी बार चुनाव लडे़ घनश्याम अनुरागी को एक लाख 80 हजार 921 कुल 16.31 प्रतिशत वोट पाकर तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था। इस चुनाव में कांग्रेस से चुनाव लड़े विजय चौधरी को 82 हजार 903 कुल 7.47 प्रतिशत वोट ही मिल पाये। पहली बार चुनाव में नोटा ने भी 10291 पाये थे। 

भानु के विकल्प की तलाश में भाजपा 

जालौन गरौठा लोकसभा सुरक्षित से लगातार छह बार भानु प्रताप वर्मा भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके है। जिसमें चार लोकसभा चुनाव में उन्हें जीत हासिल हुई वहीं पर दो बार पराजय का सामना करना पड़ा है। लेकिन 2014 के चुनाव में जीत के बाद से पांच साल के कार्यकाल उनकी कार्यप्रणाली एवं रूखे व्यवहार को लेकर भाजपा कार्यकताओं में नाराजगी देखी जा रही है। पार्टी कार्यकर्ता खुलकर सोशल मीडिया पर उनके कार्य व्यवहार को लेकर आलोचना कर रहे है। कार्यकर्ताओं के इस रूख को पार्टी के द्वारा कराये गये सर्वे ने भी पुष्ट किया है जिससे भानु वर्मा के विकल्प की तलाश भाजपा में जोरों पर चल रही है। भाजपा नेता शंभूदयाल, विधायक गौरीशंकर वर्मा, युवा नेता राजेन्द्र वर्मा पुर, और महामहिम रामनाथ कोविंद के भतीजे का नाम भी चर्चा में है। देखना होगा भाजपा की यह तलाश किस नेता पर जाकर टिकती है।


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