मां पार्वती की देन है मासिक धर्म, ये बातें जानकर- स्त्री पुरुष रह जाएंगे हैरान

By: jhansitimes.com
Dec 17 2017 05:54 pm
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स्त्रियों को अक्‍सर ये तर्क-वितर्क करते देखा जाता है कि आखिर महिलाओं को ही मासिक धर्म की पीड़ा क्‍यों झेलनी पड़ती है। भगवान ने आखिर पुरुषों को क्‍यों इससे दूर रखा है, लेकिन हम जो बातें बताने जा रहे हैं उसे जानकर महिलाओं को उनका उत्तर मिल जाएगा। पौराणिक कथाओं में जो बातें मिलती हैं, उनसे यह बातें सामने आती हैं कि मासिक धर्म का संबंध महिलाओं से ही नहीं है बल्कि इसका नाता पुरुषों से भी रहा है। ये बातें आपको अवैज्ञानिक लग सकतीं, लेकिन पौराणिक कथाएं इसी ओर इशारा करती हैं।

सृष्टि के आरंभ में सबसे पहले त्रिदेव प्रकट हुए। त्रिदेवों में भगवान विष्णु ने अपनी नाभि से ब्रह्मा जी को उत्पन्न किया। ये भी कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने ही अपने अंगूठे से गंगा को भी उत्पन्न किया। उसके बाद विष्‍णु ने सृष्टि के विकास का काम ब्रह्माजी को सौंपा। उसके बाद ब्रह्माजी अपने ने तपोबल से आठ संतानों को जन्म दिया। इनमें सात सप्तऋषि हुए और आठवें नारद मुनि हुए।

ब्रह्माजी द्वारा सृष्टि के विकास की धीमी गति को देखकर भगवान शिव ने अर्धनारीश्वर रूप लिया। तब से धरती से पर नारी का आगमन हुआ। तब शिव ने ब्रह्माजी से कहा कि वह स्‍त्री और पुरुष के समागम से मैथुनी सृष्टि का विकास आरंभ करें। तब से स्त्रियां रजस्‍वला होने लगीं। जबकि इससे पहले भगवान रजस्‍वला होकर संतानोत्‍पत्ति करते थे।

एक दिन माता पार्वती ने भोलेनाथ से कहा कि उन्‍हें पुरुषों के वस्‍त्रों पर लाल छींटें बहुत अच्‍छी लगती हैं और वह ऐसे वस्‍त्रों को प्राप्‍त करने के लिए हठ करने लगीं। शिव ने पार्वती को समझाने की लाख चेष्‍टा की लेकिन पार्वती नहीं मानीं। तब भगवान शिव ने पार्वती को वरदान दिया कि अब पुरुष नहीं महिलाएं रजस्‍वला होंगी और उन्‍हें ही संतान की उत्‍पत्ति करनी होगी। इके अलावा एक अन्य कथा भागवत पुराण में भी मिलती है।

एक बार इंद्र देवता ने एक ब्रह्मज्ञानी की हत्‍या कर दी थी। इससे उन्‍हें ब्रह्महत्‍या का घोर पाप लगा और ये पाप भयानक राक्षस के रूप में उनका पीछा करने लगा। इंद्र ने उससे बचने के लिए सूक्ष्‍म रूप लेकर खुद को एक फूल के अंदर छुपा लिया और एक लाख वर्षों तक भगवान विष्‍णु की तपस्‍या की।

तपस्‍या से प्रसन्‍न होकर भगवान विष्‍णु ने उन्‍हें श्राप से तो बचा लिया लेकिन उनके ऊपर लगे पाप से मुक्ति पाने के लिए एक उपाय दिया। पाप से मुक्ति पाने के लिए इंद्र को पेड़, जल, भूमि और स्‍त्री को अपने पाप का कुछ अंश बांटना था। उनके आग्रह पर चारों तैयार हो गए, लेकिन इसके बदले में उन सभी ने इंद्र से एक-एक वरदान मांगा।

पेड़, जल और भूमि को पाप का हिस्‍सा मिलने के बाद सबसे आखिर में स्‍त्री की बारी आई तो स्‍त्री को इंद्र के पाप के फलस्‍वरूप हर महीने मासिक धर्म से गुजरना पड़ता है। वहीं वरदान में महिलाओं को पुरुषों की तुलना में संभोग का अधिक आनंद मिला।


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