नई खोज, अब डाइबिटीज का पहले से चल सकता है पता

By: jhansitimes.com
Mar 07 2017 10:57 am
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झांसी। भारतीय मूल के डाक्टर विजय सेना रेड्डी डेंडी ने साइलेंट किलर मानी जाने वाली डाइबिटीज बीमारी को पहले से पहचानने वाली क्रिया विधि पर महत्वूपर्ण शोध कार्य किया है। इससे न सिर्फ डाइबिटीज बल्कि गेस्ट्रिक और लिवर रोग के इलाज में भी काफी सफलता मिली है। इनके शोध को दुनिया के टाॅप जर्नल्स ने प्रकाशित किया है। 

डाक्टर विजय सेना रेड्डी डेंडी ने काकाटिया मेडिकल कालेज से एमबीबीएस किया है। वे यूके में रसेल्स हाॅल हास्पिटल, बसिल्डोन में डाक्टर रहे हैं। उन्होंने थुराॅक यूनिवर्सिटी हाॅस्पिटल में भी काम किया है। वर्तमान में डाक्टर विजय सेना रेड्डी अमेरिका के टेक्सास राज्य के ख्रिस्टस ट्रिनिटी मदर फ्रांसेस हाॅस्पिटल में इंटरलन मेडिसिन पर काम कर रहे हैं। इनके कई शोध व अध्ययन गेस्ट्रोइंटरनेरोलाॅजी विषय पर विभिन्न जर्नल्स में छपे हैं। इन्होंने सेल सेक्रेशन मैकेनिज्म पर काफी महत्वपूर्ण काम किया है। इन्होंने एटीपी की तरह ही सेल कैसे गुप्त केमिकल रिएक्शन करते हैं ? इस पर गंभीर शोध किया है। इससे डाइबिटीज, गेस्ट्रिक और लिवर रोग को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। 

हाल में ही डाक्टर डेंडी ने इंसुलिन सेक्रिशन के लिए जिम्मेदार एसएलसी17ए9 प्रोटीन चैनल के बारे में विस्तार से समझाया है। इससे डाइबिटीज के पहले चरण को ही जानने में आसानी होती है। अगर प्री डाइबिटीज का इलाज कर दिया जाए तो डाइबिटीज को नियंत्रित करने में काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जैसे लोगों को पहले ही व्यायाम व खानपान संबंधि निर्देशों को देकर डाइबिटीज रोग से बचने के उपाय सुझा सकते हैं। इसका स्वास्थ्य पर काफी असर होगा और स्वास्थ्य संबंधित खर्चों में भी कमी आएगी। डाक्टर डेंडी का शोध कार्य फिजियोलाॅजी के क्षेत्र में प्रसिद्ध व प्रमुख जर्नल फ्रंटियर्स मे प्रकाशित हो चुका हैं। यह जर्नल फिजियोलाॅजी जर्नल्स में विश्व की नंबर एक है।  

यहां बताते चले कि दुनिया में करीब 4,150 लाख लोग डाइबिटीज से प्रभावित हैं। इनमें से 90 प्रतिशत टाइप टू डाइबिटीज रोग से पीड़ित हैं। इससे मृत्यु दर में बढ़ोत्तरी हुई है। करीब 12 से 50 लाख लोगों की मौत डाइबिटीज के कारण हुआ है।  


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