संघ मुक्त भारत का नारा देने वाले नीतीश ने मारी अपने पैरों पर कुल्हाड़ी, हारकर भी जीते लालू

By: jhansitimes.com
Jul 29 2017 09:18 am
1338

 सियासी घमासान के बीच बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 131 विधायकों के वोट पाकर विधानसभा में बहुमत साबित कर दिया है, जबकि 108 विधायकों ने उनके खिलाफ वोट डाले। भाजपा के समर्थन से सरकार बनाने के साथ ही नीतीश की एनडीए में पुनः वापसी हो गई है। एनडीए में वापसी से जहां नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी दोबारा मिली है, वहीं इसके लिए उन्हें एक बड़ी कीमत भी चुकानी पड़ी है। नीतीश कुमार के एनडीए में जाने से उन्हें कई बड़े नुकसान हुए हैं।

 पीएम बनने का ख्वाब टूटा 

 बिहारी में महागठबंधन के टूटने से पहले तक सियासी गलियारों में यह चर्चा जोर-शोर से थी कि नीतीश कुमार 2019 में विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर उतर सकते हैं। एनडीए में शामिल होने के साथ नीतीश कुमार ने परोक्ष रूप से प्रधानमंत्री पद की दावेदारी पूरी तरह से नरेंद्र मोदी को सौंप दी है। चूंकि 2019 में नरेंद्री मोदी ही एनडीए के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे, इसलिए नीतीश के इस कदम से उनका पीएम बनने का सपना फिलहाल दफन हो गया है। अब नीतीश कुमार केवल बिहार तक ही सीमित रहेंगे

सिद्धांतवादी नेता की छवि हुई चकनाचूर 

नीतीश के एनडीए के साथ जाने से उनकी सिद्धांतवादी नेता की छवि को धक्का लगा है। 2013 में उन्होंने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का दावेदार बनाए जाने पर 'सिद्धांतों से समझौता नहीं' कहकर भाजपा से संबंध तोड़ लिए थे। अब उन्होंने यह कहकर कि वह भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी लड़ाई से समझौता नहीं कर सकते, आरजेडी और कांग्रेस से संबंध तोड़कर फिर से भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना ली।

नीतीश कुमार जब एनडीए का हिस्सा थे तो उन्हें बड़े भाई का दर्जा मिला हुआ था। 2010 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू को चुनाव लड़ने के लिए कुल 243 सीटों में से 141 सीटें मिली, जबकि भाजपा को महज 102 सीटें ही मिली। 2015 में दोनों अलग-अलग चुनाव लड़े और भाजपा ने 157 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे, जबकि महागठबंधन में शामिल नीतीश को महज 101 सीटें चुनाव लड़ने के लिए मिलीं। 2009 के लोकसभा चुनाव में भी बिहार की 40 सीटों में से 25 भाजपा ने नीतीश कुमार को दी। आने वाले चुनावों में नीतीश को इस तरह ज्यादा सीटें मिलने की संभावना कम ही है। फिलहाल बिहार के 40 में से 31 सांसद एनडीए के हैं, जिनमें अकेले भाजपा के 22 एमपी हैं। ऐसे में 2019 में नीतीश को काफी कम सीटों पर सिमटना होगा।

धोखेबाज का नाम मिला 

बिहार में लालू प्रसाद यादव के साथ मिलकर सरकार बनाने के बाद नीतीश ने संघ मुक्त भारत की बात कही थी। 'कांग्रेस मुक्त भारत' के जवाब में नीतीश ने भाजपा की विचारधारा का विरोध करते हुए खुले मंच से 'संघ मुक्त भारत' का नारा दिया था। इससे विपक्ष में नीतीश की एक अलग छवि बनी थी। नीतीश को अब अपने इस नारे को त्यागना होगा। एनडीए में रहते हुए वो कभी संघ के खिलाफ नहीं बोल पाएंगे। सेक्युलर ब्रिगेड के नेताओं में भी नीतीश का कद काफी हद तक घट गया है।


comments

Create Account



Log In Your Account



छोटी सी बात “झाँसी टाइम्स ” के बारे में!

झाँसी टाइम्स हिंदी में कार्यरत एक विश्व स्तरीय न्यूज़ पोर्टल है। इसे पढ़ने के लिए आप http://www.jhansitimes .com पर लॉग इन कर सकते हैं। यह पोर्टल दिसम्बर 2014 से वीरांगना रानी लक्ष्मी बाई की नगरी झाँसी (उत्तर प्रदेश )आरंभ किया गया है । हम अपने पाठकों के सहयोग और प्रेम के बलबूते “ख़बर हर कीमत पर पूरी सच्चाई और निडरता के साथ” यही हमारी नीति, ध्येय और उद्देश्य है। अपने सहयोगियों की मदद से जनहित के अनेक साहसिक खुलासे ‘झाँसी टाइम्स ’ करेगा । बिना किसी भेदभाव और दुराग्रह से मुक्त होकर पोर्टल ने पाठकों में अपनी एक अलग विश्वसनीयता कायम की है।

झाँसी टाइम्स में ख़बर का अर्थ किसी तरह की सनसनी फैलाना नहीं है। हम ख़बर को ‘गति’ से पाठकों तक पहुंचाना तो चाहते हैं पर केवल ‘कवरेज’ तक सीमित नहीं रहना चाहते। यही कारण है कि पाठकों को झाँसी टाइम्स की खबरों में पड़ताल के बाद सामने आया सत्य पढ़ने को मिलता है। हम जानते हैं कि ख़बर का सीधा असर व्यक्ति और समाज पर होता है। अतः हमारी ख़बर फिर चाहे वह स्थानीय महत्व की हो या राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय महत्व की, प्रामाणिकता और विश्लेषण के बाद ही ऑनलाइन प्रकाशित होती है।

अपनी विशेषताओं और विश्वसनीयताओं की वजह से ‘झाँसी टाइम्स ’ लोगों के बीच एक अलग पहचान बना चुका है। आप सबके सहयोग से आगे इसमें इसी तरह वृद्धि होती रहेगी, इसका पूरा विश्वास भी है। ‘झाँसी टाइम्स ‘ के पास समर्पित और अपने क्षेत्र में विशेषज्ञ संवाददाताओं, समालोचकों एवं सलाहकारों का एक समूह उपलब्ध है। विनोद कुमार गौतम , झाँसी टाइम्स , के प्रबंध संपादक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। जो पूरी टीम का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्हें प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक पत्रकारिता का पिछले लगभग 16 वर्षों का अनुभव है। के पी सिंह, झाँसी टाइम्स के प्रधान संपादक हैं।

विश्वास है कि वरिष्ठ सलाहकारों और युवा संवाददाताओं के सहयोग से ‘झाँसी टाइम्स ‘ जो एक हिंदी वायर न्यूज़ सर्विस है वेब मीडिया के साथ-साथ पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना विशिष्ट स्थान बनाने में कामयाब रहेगा।