अब मुजफ्फरनगर में दलितों ने छोड़ा हिन्दू धर्म, अपनाया बौद्ध धर्म, कहा- हो रहा भेदभाव

By: jhansitimes.com
Jun 15 2017 08:30 pm
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मुज़फ्फरनगर : सहारनपुर हिंसा के बाद उत्तर प्रदेश में लगातार दलित समाज में धर्मपरिवर्तन का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है | अब मुज़फ्फरनगर में भी 14 जून बुधवार को बड़ी संख्या में दलित समाज ने हिन्दू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म की दीक्षा लेते हुए धर्मपरिवर्तन कर लिया है | धर्मपरिवर्तन करने वाले दलित समाज के लोगो का कहना है की वर्षो से दलितों का उच्च वर्ग द्वारा उत्त्पीडन होता चला आ रहा है | दलित को और दलित बनाया जा रहा है | सहारनपुर में हुई जातीय हिंसा में दलितों के साथ अत्याचार ही नहीं बल्कि भेदभाव कर योगी सरकार ने पीड़ितों की कोई आर्थिक और कानूनी मदद नहीं की | 

मुज़फ्फरनगर के चरथावल थाना क्षेत्र के गांव न्यामू में 14 जून बुधवार दोपहर गांव के रविदास मंदिर में गांव के सैकड़ो दलित समाज के परिवारों ने हिन्दू धर्म को छोड़ बौद्ध धर्म स्वीकार कर लिया है | जिसमे महिलाये पुरुष, और युवाओ ने बढ़चढ़ कर भाग लिया | धर्म परिवर्तन करने वाले दलितों का कहना है की दलितों पर हो रहे अत्याचार पर सरकार और जिला प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है |

सहारनपुर में हुई हिंसा में दलित समाज पर एक तरफ़ा कानूनी कार्यवाही की गयी | उनके घर जला दिए गए, बच्चों और महिलाओं के बर्बरता की और  उनके ऊपर ही FIR दर्ज कर दी गयी | हमने मुख्यमंत्री जी को एक ज्ञापन भी भेजा था उसमे कहा गया था की सरकार अगर दलितों पर एक तरफ़ा कार्यवाही करेगी तो सभी दलित समाज के लोग धर्म परिवर्तन के साथ-साथ जेल भरो आंदोलन चलाएंगे | सैकड़ो दलित समाज ने बोध धर्म की दीक्षा लेकर बौद्ध धर्म अपना लिया है।  देश को आजाद हुए 70 वर्ष हो गए लेकिन दलित आज भी दलित है | इनके विकाश के लिए सरकार ने कुछ नहीं किया | 

हिन्दू धर्म को अलविदा कहने वाले भूप सिंह बौद्ध ने कहा कि वह इसलिए धर्म परिवर्तन कर रहे हैं क्योंकि दलितों पर अत्याचार की घटनाओं में इजाफा हो रहा है  और प्रशासन तमाशबीन बना हुआ है | सरकार उच्च वर्ग को खुश करने के लिए एकतरफा कार्यवाही कर रही है तथा निर्दोष लोगो को नाजायज फसा रही है। 

सहारनपुर जिले के जो शब्बीरपुर गांव में दलितों के घर में जो आग लगाईं गयी है उनमे बस चार घरों की एफ आई आर दर्ज है जबकि वह 70 घरों माँ आग लगी थी।  उसमे 66 घर की एफ आई आर दर्ज नहीं है इसी मामले को लेकर हमने 9 तर्रीख को  माननीय मुख्यमंत्री जी और जिलाधिकारी साहब को  चरथावल थाने द्वारा  ज्ञापन भी भेजा था।  हमने उस ज्ञापन द्वारा निर्णय लिया था की अगर सरकार दलितों पर एकतरफा कार्यवाही करेगी तो समस्त  दलित समाज द्वारा जेलभरो आंदोलन करेगा तथा धर्म परिवर्तन करेगा।  कल यहां के लगभग सेकड़ो परिवारों न बौद्ध धरम अपनाया है और हमारे गांव की दलितों की लगभग आठ सौ वोट है। हमे कल हरिद्वार से आये  महंत धन सागर जी के द्वारा दीक्षा भी ली थी।  

हमारी सरकार से मांग है की सभी दलित समाज को बराबरी का दर्जा और न्याय मिलना चाहिए क्योकि सभी दलित समाज यहां का मूल निवासी है जो क़ानून डाक्टर भीम राव आंबेडकर जी द्वारा बनाये गए थे सरकार उनके आधीन कार्य कर रही है देश को आजाद हुए 70 साल हो गए है लेकिन आज तक दलित लोग गरीब है न तो हमकों सरकार द्वारा कोई  नौकरी दी  है न ही जमीन दी गई है दलित समाज आज भी मजदूरी करता है और जब तक हमारी मांगो को लेकर कारवाही नहीं होती तब तक यह आंदोलन जारी रहेगा। और अब अगर सरकार हमारी मांग पूरा भी कर दे फिर भीं हम बौद्ध धर्म छोड़कर पीछे हटने वाले नही है।  क्योकि बौद्ध धर्म की एक ख़ास बात है उसमे मानव मानव एक समान है ,कोई छोटा बड़ा कोई किसी प्रकार की ऊच नीच और न ही किसी प्रकार का कोई भेदभाव नहीं है। जबकि  हिन्दू धर्म में जाति व् बिरादरी को लेकर भेदभाव है। 

 शर्मिष्ठा (धर्मपरिवर्तित दलित युवती )मेरी धर्म परिवर्तन  कारण साहरनपुर हिंसा है। वहा पर दलितों पर एकतरफ़ा कार्यवाही हुयी है उसे लेकर क्योकि वो भी तो हमारे चाचा ,मामा व् रिश्ते से है वह भी हमारा परिवार है क्योकि वो भी  हमसे जुड़े हुए है। और हमारी किसी भी प्रकार की कोई सुनवाई नहीं है। कल हमारे गांव के सेकड़ो परिवारों  बौद्ध धर्म ग्रहण कर महंत घन सागर जी से  दीक्षा ली है। सरकार कार्यवाही तो कर रही है लेकिन सिर्फ  दलितों के खिलाफ और  आज से  सौ साल पहले जो सविधान लागू था उसी को लागू करने की सोच में लगी हुई है। 


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