अब हो सकेगा मासूम विक्षिप्त बालिका का इलाज, मिलेगी सरकारी मदद

By: jhansitimes.com
Jan 30 2018 09:34 pm
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टीकमगढ़। मध्य प्रदेश के बुन्देलखण्ड में एक बेबस माँ अपनी इकलौती मानसिक विक्षिप्त बेटी के इलाज में अपनी जमीन- जायदाद बेच चुकी है। जिंदगी से हार कर उसने अपने इस बालिका को सिर्फ इस कारण जंजीरो में पिछले 10 वर्षों से कैद कर के रखा है कि कोई उसे सताए नहीं। इस बेबस माँ की आवाज सुनने की फुर्सत ना तो किसी जनप्रतिनिधि को है और न ही प्रशासन को। शासन की योजनाओं से महरूम और अब धन से लाचार माँ अपने कलेजे के टुकडे को जंजीरो में बांधकर आज कलेक्टर की जन-सुनवाई में पहुंची गई।

टीकमगढ़ जिले के रतनगुवां गांव की यह आदिवासी किशोरी पिछले 10 वर्षों से इसी तरह जंजीरो में जकड़ी हुई है। इसकी माँ नन्ही बाई आदिवासी का कहना है कि दिनभर घर के आंगन में और रात में सोते समय भी अपनी इस इकलौती बेटी को खटिया से बांधकर रखना पड़ता है। परिवार की गरीबी और आर्थिक तंगी के बावजूद भी हम लोगों ने मेहनत मजदूरी करके इसके इलाज पर करीब ढाई लाख रूपये से उपर खर्च कर दिया है।

आर्थिक तंगी से हार चुकी मां आज अपनी बेटी को जंजीरों में बांधकर इस उम्मीद के साथ कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंची कि शायद इस विक्षिप्त बेटी को देख प्रशासन का दिल जरूर पसीजेगा और इसके इलाज की व्यवस्था करेगा। मां ने कलेक्टर से गुहार लगाते हुये कहा कि प्रशासन अगर मदद कर दे तो मेरी बेटी भी एक सामान्य जिंदगी जी सकेगी और एक मां की लालसा कि वह अपनी बेटी के हाथ अपने सामने पीले कर सके। जिससे आगे चलकर वह किसी के लिये बोझ न बनकर रह जाये। कलेक्टर अभिजीत अग्रवाल ने बताया  कि उसके इलाज की व्यवस्था हेतु निर्धारित प्रक्रिया पूर्ण कर इलाज कराने का आश्वासन दिया है। जल्द ही उसका इलाज शुरू हो जाएगा।


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