नर्सिंगहोम मण्डी झाँसी : खुराना हॉस्पिटल फिर चर्चाओं में .....

By: jhansitimes.com
Jun 11 2019 07:21 pm
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झांसी। सरकार द्वारा जो आयुष्मान योजना चलायी गयी है उस योजना का लाभ शहर की मेडिकल कालेज के सामने स्थित नर्सिंगहोम मण्डी में नहीं मिल रहा है। इस योजना का लाभ पाने वाले व्यक्तियों को प्राइवेट अस्पतालों से दुत्कार कर भगा दिया जाता है। ऐसा ही मामला मेडिकल कालेज के समीप स्थित अस्पताल का आया है। जिसमें अस्पताल संचालक ने पीडि़त को नर्सिंगहोम से दुत्कार कर भगा दिया और आयुष्मान भारत योजना को बेवजह की योजना कह डाला तथा इलाज नहीं किया। पीडि़त ने सांसद, प्रशासनिक अफसर व शासन को प्रार्थना पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगायी है।

विवरण के मुताबिक शहर कोतवाली क्षेत्रांतर्गत मुहल्ला सागर गेट बाहर रहने वाले अनिल चड्ढा ने सांसद, प्रशासनिक अफसर व सरकार को शिकायती पत्र भेजते हुये बताया कि उसकी पत्नी साधना बीते रोज बीमार हो गयी। जिसका वह इलाज कराने के लिये मेडिकल कालेज के समीप स्थित खुराना हास्पीटल में गया। उसकी पत्नी को किडनी इन्फैक्शन व उल्टी-दस्त हो रहे थे। जबकि उसने फोन पर खुराना हास्पीटल में वार्ता की और कहा कि उसके पास आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत कार्ड है और उसका इलाज अस्पताल में हो जायेगा या नहीं होगा। तो इस पर अस्पताल से डा. नवल खुराना ने कहा था कि उनके पास इस मरीज का इलाज हो जायेगा क्योंकि उनका हास्पीटल आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत रजिस्टर्ड है। तो वह अपनी पत्नी को लेकर खुराना हास्पीटल गया। जहां पर उसके कार्ड की फोटो हास्पीटल में तैनात कर्मचारी ने मोबाइल में खींच ली और निशुल्क की रसीद काटी जिसका नंबर 1386 है। इसके बाद उससे पत्नी की विभिन्न जांचों को कराने के लिये पैसा मांगा गया। जिस पर उसने कहा कि उसके पास आयुष्मान भारत योजना का कार्ड है और हास्पीटल भी इसके अंतर्गत आता है तो उससे पैसा किस बात का मांगा जा रहा है। इस बात पर चिकित्सक ने उससे काफी भला-बुरा कहा और सरकार के बारे में भी बोलने की कोशिश की। सरकार के बारे में चिकित्सक ने कहा कि सरकार का क्या जाता है, ऐसी योजना तो बनती रहती हैं, ये योजनायें बिना काम की हैं। कोई भी व्यक्ति मुंह उठाकर प्राइवेट अस्पताल में आ जाता है और इलाज करने के लिये दबाव बनाता है। यदि फ्री में इलाज कराना है तो सरकारी अस्पताल में जायें। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि उनके मरीज का इलाज इस कार्ड से नहीं हो सकता, अपना मरीज अस्पताल से ले जाओ। जिस पर अपमानित होने के बाद वह अपनी पत्नी को दूसरे अस्पताल में ले गया। उसने मांग की है कि आयुष्मान भारत योजना का लाभ जिस तरह से प्राइवेट अस्पताल में मिलना चाहिये नहीं मिल रहा है। चिकित्सक अपमानित कर रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ जांच कराकर कठोर से कठोर कार्यवाही करायी जाये।

पहले भी हो चुकी है घटना
खुराना हास्पीटल की यह पहली घटना नहीं है। इसके पूर्व में भी बीते महीनों एक घटना हुयी थी जिसमें चिकित्सक द्वारा एक कर्मचारी की जमकर पिटायी की गयी थी। उस कर्मचारी ने नवाबाद थाने में लिखित शिकायती पत्र दिया था। वह पीडि़त व्यक्ति काफी दिन थाने व विश्वविद्यालय पुलिस चौकी के चक्कर लगाता रहा लेकिन असरदार चिकित्सक ने इस मामले को वहीं दफन कर दिया।
क्या चिकित्सक को ऐसा बोलने का अधिकार है

दिये गये शिकायती पत्र में पीडि़त ने जिस तरह से आरोप लगाया है और चिकित्सक ने जिस भाषा का प्रयोग किया है, क्या उसे केंद्र व प्रदेश सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं के बारे में ऐसा बोलने का अधिकार है और ये अधिकार उसे कहां से प्राप्त हुआ, यह कोई नहीं जानता। लेकिन अपने ही अस्पताल में आने वाले मरीज के साथ ऐसा व्यवहार करना बहुत ही गलत है। हालांकि यह जांच का विषय है। अब प्रशासन क्या जांच करता है और क्या कार्यवाही करता है, यह जांच के बाद पता चलेगा।
खुलेआम होती है प्राइवेट अस्पतालों में गुण्डई

महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कालेज के सामने व इर्दगिर्द प्राइवेट अस्पतालों की मण्डी है। मेडिकल कालेज में आने वाले मरीजों को वहां पर घूम रहे दलाल प्राइवेट अस्पतालों में ले जाते हैं और फिर दूरदराज गांव से आये गरीबों को इन अस्पतालों में जेल की तरह कैद कर दिया जाता है और उनसे पैसे की लूट शुरू हो जाती है। उस मरीज को वे लोग तब तक नहीं छोड़ते, जब तक उसकी जमीन जायदाद न बिक जाये और फिर वही मरीज वहां से निकलने के दो दिन बाद ठीक भी हो जाता है। इन अस्पतालों में इतनी गुण्डई होती है कि पैसा लेन देन पर मरीज के तीमारदारों को पीटा भी जाता, लड़ाई झगड़े भी होते हैं। जब यह शिकायत विश्वविद्यालय पुलिस चौकी में पहुंचती है तो असरदार चिकित्सक पुलिस से मिलकर मामले को रफादफा कर देते हैं। ऐसी घटनायें उस मण्डी में प्रतिदिन होती रहती हैं।


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