उरई के रसगुल्लों के दीवाने थे अटल जी, बचपन जहां बीता इन पंक्तियों का लेखक भी रहा था उस मकान में

By: jhansitimes.com
Aug 17 2018 09:13 am
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उरई। देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के बाद पूरे देश में शोक की लहर छा गई है। बीजेपी शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्री उन्हें श्रद्धांजलि देने दिल्ली पहुंच रहे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की लंबी बीमारी के बाद देहावसान के साथ ही भारतीय राजनीत के एक युग का अंत हो गया। अटल बिहारी बाजपेयी के बारे में बहुत कम लोगों को पता है कि छात्र जीवन में साम्यवादी दल की छात्र शाखा से उन्होंने अपनी राजनीति की शुरूआत की थी। जिसमें वे आल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन के उम्मीदवार के रूप में ग्वालियर के विक्टोरिया कालेज से छात्र संघ के अध्यक्ष निर्वाचित हुए थे। 

श्री बाजपेयी बाद में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ से जुड़कर प्रचारक बन गये। संसद का पहला चुनाव उन्होंने 1957 में उत्तर प्रदेश के बलरामपुर क्षेत्र से जीता। उन्होंने संसद में अपने पहले भाषण में ही तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू को अपना मुरीद बना लिया था। जवाहर लाल नेहरू ने उसी समय भविष्यवाणी कर दी थी कि एक दिन बाजपेयी खुद इस देश के प्रधानमंत्री बनेगें और यह भविष्यवाणी चरितार्थ साबित हुई।

अटल बिहारी बाजपेयी को ग्वालियर से काफी लगाव था। लेकिन 1984 में माधवराव सिंधिया के आगे ग्वालियर में उन्हें पराजय का मुंह देखना पड़ा था। उन्होंने अपने बचपन के कुछ दिन भिंड में भी बिताये। भिंड की मदन मोहन गली में जिस मकान में वे रहते थे इन पंक्तियों का लेखक भी बाद में उसी मकान में रहा। न केवल इतना बल्कि अटल जी का जो स्टडी रूम उस समय था वही स्टडी रूम इन पंक्तियों के लेखक का रहा। जिसकी गवाही उक्त मकान के वर्तमान स्वामी अनुराग मिश्रा से ली जा सकती है। उरई से भी अटल जी का विशेष लगाव था। स्व. बाबूराम एमकाम के लिए जब वे एक जनसभा को संबोधित करने के लिए उरई आये थे तो उन्होंने अपने संबोधन में स्वयं कहा था कि उन्हें उरई के रसगुल्ले बहुत पंसद हैं। जब भी वे ट्रेन से यहां से होकर गुजरे उन्होंने उरई के रसगुल्लों की फरमाइश अपने लोगों से की। अटल जी को चुनाव न जीत पाने के बावजूद ग्वालियर, भिंड और उरई के लोगों से बहुत प्यार था और यहां के लोग भी अटल जी से अपने जुड़ाव पर नाज महसूस करते हैं। इसीलिए अटल जी के निधन की खबर से इन जिलों में हर वर्ग के लोग गमगीन देखे जा रहे हैं।

इस बीच यूपी के जिलों में भी अटल को श्रद्धांजलि देने के लिए शोकसभाएं आयोजित की जा रही है। जालौन में भी पूर्व प्रधानमंत्री की आत्मा की शांति के लिए शोकसभाएं हो रही है। जालौन में अटलजी का एक शुभचिंतक ऐसा भी है जिसके साथ अटलजी के छात्र जीवन से लेकर राजनैतिक सफर की यादें जुड़ी हुई हैं। उनके निधन पर यह शख्स बेहद दुखी है। 

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जालौन से भी पुराना नाता है। अपने छात्र जीवन में ग्वालियर से लखनऊ जाते वख्त वह जालौन के उरई स्टेशन पर हमेशा यहां के रसगुल्ले खाते थे। चूंकि यहां के रसगुल्ले यहां की खास पहचान हैं जिस कारण अटलजी को भी यहां के रसगुल्ले का स्वाद लेने की ललक रहती थी।

राजनीतिक सफर की शुरुआत से लेकर अंतिम पड़ाव तक वह ग्वालियर से लखनऊ जाते रहे और इस दौरान उन्होंने उरई के रसगुल्लों को खाना नहीं भुला। अटलजी को रसगुल्ले देने वाले दुकानदार शेलेन्द्र शर्मा बताते हैं कि अटलजी जब भी ग्वालियर से लखनऊ जाते थे तो यहां के रसगुल्ले खाना नहीं भूलते थे। छात्र जीवन से लेकर राजनीति के सफर तक उन्होंने यहां के रसगुल्ले खाये हैं। 


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