जातीय दंश: ऊंची जाति के शिक्षकों के घड़े से पानी पीने पर प्रिंसिपल ने दलित शिक्षक को मारा थप्पड़

By: jhansitimes.com
Aug 31 2019 07:23 pm
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गांधीनगर।  एक दलित शिक्षक ने ऊंची जाति के शिक्षकों के घड़े से पानी ​पी लिया तो उसे पीट दिया गया। मामला  है गुजरात के सुरेन्द्रनगर जिले का, जहां स्कूल के प्रिंसिपल ने उसे थप्पड़ मारा। उसके बाद गालियां देते हुए नोटिस भी थमा दिया। इतना ही नहीं, एक दिन के लिए स्कूल को बंद भी कर दिया। 46 वर्षीय दलित शिक्षक ने चोटिला पुलिस स्टेशन आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। दलित शिक्षक द्वारा भेदभाव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के दो सप्ताह बाद, उन्हें दूसरे सरकारी स्कूल में स्थानांतरित कर दिया गया। सुरेन्द्रनगर जिले में पियाव सरकार प्राथमिक शाला-2 में काम करने वाले दलित शिक्षक कन्हैयालाल बरैया ने अब प्रिंसिपल पर जातिगत भेदभाव, आपराधिक धमकी और उनके खिलाफ घृणा फैलाने का आरोप लगाया है।

 घड़े से पानी पीने पर पीटा 
जानकारी  के अनुसार, बरैया ने प्रिंसिपल राठौड़ द्वारा दो साल पहले स्कूल में कार्यभार संभालने के दिन से ही भेदभाव का आरोप लगाया। बरैया ने कहा कि, स्कूल के प्रिंसिपल ने दो घड़े आवंटित किए थे। एक मेरे लिए, जैसा कि मैं वाल्मीकि समुदाय से हूं और दूसरा तीन शिक्षकों के लिए, जो कोली पटेल और दरबार समुदायों से हैं। एक दिन जब राठौड़ को पता चला कि वह दूसरे घड़े का पानी पी रहा है, तो उसने उसे थप्पड़ मार दिया। राठौड़ ने नोटिस भी दिया, जिसमें लिखा कि, आप वाल्मीकि समुदाय से संबंधित शिक्षक हैं। सवर्ण शिक्षकों के पिटारे से पानी मत पीना।
 स्कूल भी बंद करा दिया 
जब बरैया ने अमानवीय व्यवहार का विरोध किया, तो उसे न केवल राठौड़ ने धमकी दी, बल्कि छात्रों के माता-पिता ने भी एक दिन के लिए स्कूल बंद करने का ऐलान किया। बरैया ने आरोप लगाया कि माता-पिता ने तब विरोध किया, जब स्टाफ सदस्यों ने बताया कि वह वाल्मीकि समुदाय से हैं।
  प्रिंसिपल ने गालियां दीं 
बरैया, 2002 से सरकारी शिक्षक रहे हैं, उन्होंने प्राथमिकी में आरोप लगाया कि कुछ हफ्तों पहले अपने रिश्तेदार के बच्चे की उपस्थिति को धोखाधड़ी से चिह्नित करने के लिए उन्होंने प्रिंसिपल के निर्देश पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि राठौड़ ने शिक्षकों और छात्रों के सामने जातिवादी टिप्पणी के साथ उन्हें गाली देना शुरू कर दिया था। एफआईआर के बाद, बरैया को एक सशस्त्र पुलिस की सुरक्षा प्रदान की गई है जो उसके साथ कक्षा में खडी रहती है। 
 सरकार छुआछूत को खत्म करने में विफल 
वडगाम के निर्दलिय विधायक जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि, बरैया का मामला गुजरात में अस्पृश्यता का प्रमाण है, बावजूद इसके कि यह दंडनीय अपराध है। राज्य सरकार किसी भी तरह की छुआछूत को खत्म करने या किसी कार्रवाई के लिए कड़ी कार्रवाई करने में विफल रही है।
 


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