हाल के हालात, पत्रकार अतुल शर्मा के साथ , विनय न मानहिं जलधि जड़...

By: jhansitimes.com
Nov 13 2016 06:56 pm
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बाबा गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरित मानस भले ही एक धार्मिक ग्रंथ हो, लेकिन उसमें लिखित चौपाई, दोहा और सोरठा मानव जीवन के ईद गिर्द ही घूमता नजर आता है। या फिर यूं भी कह सकते हैं कि सैकड़ों वर्ष पूर्व लिखे गये इस काव्य की सारर्थकता आज भी है। इसमें दिये गये उदाहरण समसामायिकनजर आते हैं। अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों को ही ले लो। अल्प समय में उन्होंने दो सजर्किल स्ट्राइक कर डाली। पहली दूर देश में छिपे बैठे उन दरिंदों को सबक सिखाकर ली जो अपने देश के अमन में खलल डाल रहे थे तो दूसरी सर्जिकल स्ट्राइक हजार और पांच सौ नोटों की बंद करके की गई। निसंदेह आजाद देश में पहली बार किसी सरकार ने इतना बड़े फैसला लेने की हिम्मत की। ठीक उस तरह से जैसे एक चिकित्सक आपरेशन करता है उसी तरह यह आपरेशन भी किये गये। 

चिकित्सक मानव शरीर में चीरा लगाने के बाद घाव को भरने का काम करता है तो देश के प्रधानमंत्री ने भी पहले आपरेशन के बाद सजर्किल स्ट्राइक के बाद समय पर प्रतिक्रिया रूपी घाव को भरने का इंतजाम कर दिया था, नतीजा यह रहा कि परिणाम सुखद और सफल सामने आया। हमारे दुश्मन लाख कोशिशों के बाद बाल तक बांका नहीं कर सके। अब बात आती है दूसरी सजर्किल स्ट्राइक की जो देश के अंदर छिपे दुश्मनों के खिलाफ की गई। कालाबाजारी, तस्करी और आतंकवाद जैसी लाइलाज बीमारी की बोलती बंद करने के लिये इससे बेहतर विकल्प कोई दूसरा हो भी नहीं सकता है। प्रधानमंत्री के नोट बंद करने रूपी आपरेशन का इसका असर भी तत्काल में देखने को मिला। तीन दिन में जो खबरें छनकर आ रही हैं, उसके अनुसार जहां जम्मू और कश्मीर में वीर सैनिकों पर पत्थर चलाने वाले अचानक गायब हो गये हैं तो आतंकी भी किसी बिल में छिपे नजर आ रहे हैं। 

नकली करेंसी के माध्यम से चलने वाले इनके धंधों पर करारी चोट जो पहुंची है। देश के बाहर ही नहीं, देश के अंदर भी इसका बड़ा असर हुआ है। हर शहर और हर गली से ब्लैकमनी निकलती नजर आ रही है। इन काले कारोबारियों की रात की नींद और दिन में आराम हराम दिखाई दे रहा है। अपने सुख में खलल पड़ते देख अब इन दुश्मनों ने कांटे से कांटा निकालने की रणनीति निकाल ली है और इसमें उनका साथ दे रही है वह अलाल अफसर और कर्मचारियों की फौज जो मोटा वेतन लेने के बाद भी इधर की सींक उधर रखने की कोशिश नहीं करती है। प्रधानमंत्री ने नोट बंद किये और आम जन को किसी तरह की कोई दिक्कत न हो, इसके लिये तमाम विकल्प खोल दिये। मसलन आवश्यक कार्य के लिये पंप से प्रतिबंधित नोट से गाड़ी में डीजल पेट्रोल डलवाने, एटीएम से एक बार में दो हजार रुपये निकालने और बैंक से चार हजार तक पुराने नोट बदलना आदि शामिल है। 

हां, तो मैं कह रहा था कि मोदी ने दूसरी सजर्किल स्ट्राइक रूपी आपरेशन को सफलता पूर्वक कर लिया, लेकिन इस जख्म को भरने का जिम्मा जिन कंधों को दे दिया कि वह टिंचर और पट्टी करते रहें, वही अब अच्छी पहल को बदनाम करवाने में जुट गये हैं। जैसे आदमी पूरे दिन लाइन में लगा रहता है और कई घंटे बाद डाकघर से उसे बताया जाता है कि कैश नहीं है, इसलिये आज कुछ नहीं होगा। जगह - जगह लगे एटीएम की शटर का बंद होना, अस्पताल में भर्ती मरीज के इलाज में किसी तरह की किसी भी स्तर से कोई मदद न करना आदि आदि समस्याओं से आम आदमी जूझ रहा है। इन समस्याओं के निदान के लिये न तो जिलास्तर का कोई अधिकारी आगे आ रहा है और न ही बैंक अथवा अस्पतालों के प्रबंधन। हालातों का अंदाजा इसी बात से लगा लो कि आम आदमी चिकित्सक का पर्चा लेकर दवा की दुकान पर जा रहा है तो उसे उल्टे पांव लौटा दिया जा रहा है। इन हालातों में अपना तो यही कहना है कि प्रधानमंत्री जी याद कर लो रामायण की वह चौपाई जिसमें समुद्र की हट के कारण भगवान राम ने कह दिया था कि विनय न मानहिं जलधि जड़, गये तीन दिन बीत। बोले राम सकोप तब भय बिन न हो प्रीत।। ऐसे में चढ़ा लो अपने भी धनुष की प्रत्यंचा और ठीक कर दो उन सभी को जो आपके काला धन, आतंकवाद, नक्सलवाद जैसे पवित्र अभियान को बट्टा लगाने की कोशिश कर रहे हैं। वर्ना यह तो जनता है फ्री सिम लेने के लिये भले ही चार दिन तक लगातार लाइन में लगी रहे और उफ तक न करे और सरकारी कार्यक्रम में पांच मिनट की लेट लतीफी अथवा दिक्कत में भूलने लगती है तो कामों को।


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