फेफड़ों की बीमारी में विटामिन डी की भूमिका

By: jhansitimes.com
Feb 27 2019 09:43 am
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रिपोर्ट - प्रदीप श्रीवास्तव) 

नई दिल्ली। अस्पताल के आईसीयू में भर्ती मरीज की जान बनाने में विटामिन डी की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। अमेरिका में रहने वाले भारतीय मूल के डाॅक्टर बैडिरेड्डी अपने रिसर्च में इसे साबित किया है। साथ ही बताया है कि विटामिन डी की कमी से फेफड़ों में खराबी शुरू हो जाती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। डाक्टर बैडिरेड्डी के रिसर्च को मेडिकल क्षेत्र में काफी सराहना मिल रही है। 

फेफड़ों का जीवन आॅक्सीजन की मात्रा से तय होता है। रक्त आॅक्सीजन को दूसरे अंगों तक पहुंचाता है साथ ही कार्बन डाइआॅक्साइड छोड़ता है। अगर रक्त को पर्याप्त आॅक्सीजन नहीं मिलता है तो फेफड़ों में खराबी शुरू हो जाती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत होती है। और दूसरे अंग भी प्रभावित होने शुरू हो जाते हैं। इसका शरीर पर अल्पकालिक व दीर्घकालिक प्रभाव पड़ता है। मांसपेशियां, तंत्रिका, हड्डियां, टिशू के साथ ही फेफड़े सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं।  

भारतीय मूल के डाक्टर श्रीधर बैडिरेड्डी ने पल्मोनरी एवं क्रिटिकल केयर मेडिसिन में अभूतपूर्व कार्य किया है। वह भारत के आंध्र प्रदेश के आंध्र मेडिकल कॉलेज एनटीआर मेडिकल स्कूल के पूर्व छात्र रहे हैं। वह वर्तमान में उत्तरी लिटिल रॉक, अर्कांसस, संयुक्त राज्य अमेरिका में बैपटिस्ट हेल्थ क्लिनिक में आईसीयू के चिकित्सा निदेशक हैं। डॉक्टर बैडिरेड्डी को आईसीयू में पल्मोनरी केयर का विशेष अनुभव है। उन्होंने अपने रिसर्च में पाया है कि न्यूरोमस्कुलर रोगों (एनएमडी) के रोगियों की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इन रोगियों में विटामिन डी की कमी अधिक होती है, जिससे आईसीयू में भर्ती मरीज जल्दी रिकवर नहीं कर पाता है। विटामिन डी हमें सूरज और समुचित आहार से मिलता है, इससे शरीर की हड्डियां मजबूत होती हैं और रोग प्रतिरोग क्षमता में वृद्धि होती है। विटामिन डी की कमी से फेफड़ों के ताकत में कमी आती है और उन्हें सांस लेने में दिक्कत होती है। यह अध्ययन जर्नल ऑफ पैरेंट्रल एंड एंटरल न्यूट्रिशन में प्रकाशित हुआ था।

रेस्पिरेटरी केयर के क्षेत्र में डॉक्टर बैडिरेड्डी ने रिलैप्सिंग पॉलीकॉन्ड्राइटिस (आरपी) के प्रभाव का अध्ययन किया है। यह एक दुर्लभ बहु-प्रणालीगत स्थिति है, जो मुख्य रूप से फेफड़ों के कार्य पर कार्टिलाजिनस संरचनाओं को प्रभावित करती है। सूजन के कारण श्वासनली या ब्रोन्कस के वायुमार्ग के संकीर्ण होने से सांस लेने में दिक्कत होती है। डॉक्टर बैडिरेड्डी ने मायोपथी और पोस्ट-आईसीयू के रोगियों की देखभाल को लेकर काफी बेहतर कार्य किया है। विटामिन डी की कमी को दूर कर मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

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