घपलेबाजी: दुकानें झाँसी जिला पंचायत की, किराया वसूल रहा कोई और...

By: jhansitimes.com
Jun 11 2019 07:46 pm
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झांसी। बीते वर्षों जिला पंचायत ने जनपद के कस्बों में पंचायत की आय बढ़ाने के लिये दुकानों का निर्माण कराया था, लेकिन उनकी ऐसी स्थिति रखी गयी कि उन दुकानों का किराया आज तक पंचायत नहीं ले पायी। प्रापर्टी जिला पंचायत की है, लेकिन वसूल कोई और रहा है। जब यह मामला विधानसभा में उठा, तो शासन ने कार्यवाही करने के निर्देश दिये। इस मामले में जिला पंचायत ने दो बाबुओं के खिलाफ मामूली कार्यवाही कर मामले को रफादफा कर दिया और पंचायत के अधिकारी व कर्मचारी उस प्रापर्टी को आज तक कब्जे में नहीं ले पाये। मामला काफी चर्चाओं में रहा। शहर के बड़े ठेकेदार से जुड़ा यह मामला है। जिसमें न्याय पालिका की भी शरण ली गयी है।

मालूम हो कि बीते वर्षो जिला ने अपनी आय बढ़ाने के लिये दुकानें निर्माण कराने का प्रस्ताव पारित किया जिसमें शहर समेत जनपद के सकरार, बघेरा, मोंठ, हंसारी, खैलार सहित अन्य स्थानों में जिला पंचायत द्वारा दुकानों का निर्माण कराया गया। लेकिन उस दौरान शहर के चर्चित ठेकेदार सुरेश गुप्ता से पंचायत का इकरारनामा हो गया और दुकानें निर्माण के बाद इकरारनामा के आधार पर बिना सर्किल रेट निर्धारित किये उन दुकानों का ठेकेदार द्वारा आवंटन कर दिया गया तथा दुकानों का किराया भी वे स्वयं वसूलते रहे। जिला पंचायत के अधिकारी व कर्मचारियों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया। बीते महीनों विधानसभा सत्र के दौरान गरौठा विधायक जवाहर राजपूत ने इस घपले के मामले को विधानसभा में उठाया। तब शासन ने इस मामले में जांच के आदेश दिये और प्रशासन द्वारा जांच करायी गयी। शासन ने यह भी निर्देशित किया कि जो भी इसके दोषी हों, उन पर कार्यवाही की जाये। जिला पंचायत के अधिकारी व कर्मचारियों ने दुकानों के मामले में कार्यवाही की, ठेकेदार को नोटिस भी दिया लेकिन जो लोग इस मामले के दोषी थे, पंचायत के अधिकारियों ने महज मामूली कार्यवाही कर मामले को रफादफा कर दिया लेकिन अभी तक जिला पंचायत उन दुकानों पर कब्जा नहीं ले पाया। इस प्रकरण में कारनामा करने वाले कर्मचारियों व अधिकारियों तथा जिस समय यह इकरारनामा हुआ उस समय के तत्कालीन जिला पंचायत अध्यक्ष व तत्कालीन अधिशासी अधिकारी के खिलाफ भी कोई कार्यवाही नहीं की गयी जिन्होंने ऐसा इकरारनामा तैयार कराया। इस घपलेबाजी में शासन को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाया गया। लेकिन जिम्मेदारों पर मिलजुलकर रहम बरता गया। इस मामले में मुख्य विकास अधिकारी निखिल टीकाराम फुण्डे से जानकारी करने की कोशिश की गई तो उनसे मोबाइल पर वार्ता नहीं हो सकी।

प्यास से तडफ़ रही जनता, टैंकर खड़े पंचायत भवन में

जिला पंचायत द्वारा पेयजल आपूर्ति के लिये पानी के टैंकर व ट्रैक्टर खरीदे गये थे, जो इस समय पंचायत भवन में खड़े हुये हैं। जबकि जनपद व शहर में पेयजल की काफी समस्या है। जगह-जगह लोग बूंद-बूंद पानी के लिये तरस रहे हैं और जिला पंचायत द्वारा पानी के लिये खरीदे गये टैंकर व ट्रैक्टर पंचायत भवन के अंदर संभाल कर रख दिये गये हैं। जब पेयजल आपूर्ति के लिये उनका प्रयोग ही नहीं होना था तो उनको खरीदने की क्या आवश्यकता थी, यह किसी को नहीं पता। बताया जा रहा है कि इन ट्रैक्टर व पानी के टैंकरों को निजी कार्यों के लिये प्रयोग किया जाता है।

घूस लेकर पंचायत से मिलता है अनापत्ति पत्र

जिला पंचायत की जमीनें जनपद में चारों तरफ हैं और शहर में भी हैं। अगर आसपास भी जिला पंचायत की जमीन है और कोई निर्माण कर रहा है अगर उसने जिला पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र मांगना चाहा तो जिला पंचायत के अधिकारी व कर्मचारी घूस लेकर अनापत्ति प्रमाण पत्र बना देते हैं। चाहे वह जमीन जिला पंचायत की हो या किसी और की। पंचायत की प्रापटी असुरक्षित है क्योंकि उस प्रापर्टी की सुरक्षा में वहां पर तैनात अधिकारी व कर्मचारियों ने ही घपलेबाजी की है।
 


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